Skip to content
Thehindinews
Thehindinews

  • Home
  • News Article
  • Story
  • Information
  • blog
  • Life Style
Thehindinews
Thehindinews

संचार साथी ऐप और प्राइवेसी विवाद से जुड़ी इलस्ट्रेशन

क्या संचार साथी से खतरे में है यूजर्स की प्राइवेसी? इंटरनेट पर फैल रहे दावों की सच्चाई जानिए

Hindi News, December 3, 2025December 3, 2025

पिछले कुछ समय से इंटरनेट पर कई पोस्ट वायरल हो रही हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार का ‘संचार साथी’ प्लेटफ़ॉर्म यूजर्स की प्राइवेसी के लिए खतरा बन सकता है। कई सोशल मीडिया यूज़र्स का कहना है कि यह पोर्टल आपके मोबाइल नंबर, आधार लिंकिंग और डिवाइस डिटेल्स तक पहुंचता है, जिससे आपकी निजी जानकारी रिस्क में पड़ सकती है।

लेकिन क्या ये दावे सच हैं? आइए इसे एक न्यूज़ रिपोर्ट की तरह समझते हैं।

संचार साथी क्या करता है?

संचार साथी दो मुख्य फीचर्स के माध्यम से काम करता है—

  • CEIR सिस्टम: खोए या चोरी हुए मोबाइल को ब्लॉक/अनब्लॉक करने की सुविधा।
  • TAFCOP सिस्टम: आपके नाम पर कितने मोबाइल नंबर चल रहे हैं, इसकी जानकारी देता है।

इसका उद्देश्य सिम कार्ड धोखाधड़ी, अवैध मोबाइल इस्तेमाल और साइबर फ्रॉड को रोकना है।

प्राइवेसी को लेकर किस बात पर सवाल उठ रहे हैं?

ऑनलाइन फैल रहे दावों में कहा जा रहा है कि:

  • प्लेटफ़ॉर्म आपके मोबाइल नंबरों की पूरी लिस्ट दिखाता है।
  • आधार से लिंक नंबरों, डिवाइस IMEI और सिम उपयोग डेटा तक पहुंच रखता है।
  • सरकारी डेटाबेस के साथ इंटीग्रेशन के कारण व्यक्तिगत जानकारी एक्सपोज़ हो सकती है।

इन दावों ने कुछ लोगों में यह डर पैदा किया है कि कहीं यह डेटा गलत हाथों में न चला जाए।

तकनीकी विशेषज्ञों का क्या मानना है?

टेक विशेषज्ञों के अनुसार, संचार साथी सीधे यूज़र की निजी जानकारी सेव नहीं करता, बल्कि टेलीकॉम कंपनियों के वेरिफाइड डेटाबेस से जानकारी खींचकर सिर्फ वही डेटा दिखाता है जिसकी यूज़र को जरूरत होती है।

  • यह डेटा यूज़र की पहचान सत्यापित करने के लिए लिया जाता है।
  • सिस्टम का उद्देश्य निगरानी नहीं, बल्कि सुरक्षा बढ़ाना है।
  • प्लेटफ़ॉर्म सरकारी सर्वर्स पर चलता है, जहां सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू होते हैं।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि किसी भी बड़े सरकारी डेटाबेस में डेटा लीक की संभावनाएं हमेशा रहती हैं, इसलिए मजबूत सुरक्षा बेहद जरूरी है।

क्या यूज़र की प्राइवेसी खतरे में है?

अब तक ऐसा कोई स्पष्ट सबूत सामने नहीं आया है जो यह दिखाए कि संचार साथी प्राइवेसी का उल्लंघन करता है।
लेकिन क्योंकि सिस्टम आधार और मोबाइल डेटा से जुड़ा है, इसलिए लोगों के मन में चिंता होना स्वाभाविक है।

साइबर सुरक्षा से जुड़े जानकार सलाह देते हैं कि:

  • लॉगिन करते समय OTP वेरिफिकेशन का ध्यान रखें
  • अपने मोबाइल नंबर और आधार का दुरुपयोग न होने दें
  • कोई भी संदिग्ध नंबर तुरंत रिपोर्ट करें

संचार साथी एक सुरक्षा-केंद्रित प्लेटफ़ॉर्म है जिसका उद्देश्य धोखाधड़ी कम करना है। इंटरनेट पर फैले कई दावे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं, लेकिन प्राइवेसी को लेकर जागरूक रहना हमेशा जरूरी है।

यूज़र को घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है।

जब बड़े चैनल भरोसा तोड़ें, तब सही खबरें कहाँ से लें? विश्वसनीय स्रोतों की पूरी गाइड

Information News Article

Post navigation

Previous post
Next post

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • अंकिता भंडारी की मौत: क्या इंसाफ पूरा हुआ या सच अब भी छिपा है?
  • दंतेवाड़ा में 63 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण: बस्तर में शांति की ओर एक बड़ा कदम
  • ट्रंप-मोदी रिश्ते: कहीं नाराज़गी, कहीं तारीफ़ — असल सच क्या है?
  • भारत की राजनीति क्यों हमेशा इतिहास में उलझी रहती है?
  • सकट चौथ व्रत: संतान सुख और संकटों से रक्षा का पावन पर्व

Advertisement

social link

  • Facebook
  • अंकिता भंडारी की मौत: क्या इंसाफ पूरा हुआ या सच अब भी छिपा है?
  • दंतेवाड़ा में 63 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण: बस्तर में शांति की ओर एक बड़ा कदम
  • ट्रंप-मोदी रिश्ते: कहीं नाराज़गी, कहीं तारीफ़ — असल सच क्या है?
  • भारत की राजनीति क्यों हमेशा इतिहास में उलझी रहती है?
  • सकट चौथ व्रत: संतान सुख और संकटों से रक्षा का पावन पर्व

Advertisement




©2026 Thehindinews | WordPress Theme by SuperbThemes
Go to mobile version