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विवादों में शंकराचार्य_ माघ मेले से POCSO केस तक, जानें साजिश या सच्चाई

विवादों के बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद: माघ मेले से लेकर POCSO केस तक पूरी कहानी

Laxmi Nautiyal, February 24, 2026February 24, 2026

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य के रूप में चर्चित Swami Avimukteshwaranand Saraswati पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में हैं। वे पहले भी कई बार सरकार और प्रशासन के साथ टकराव को लेकर खबरों में रहे हैं। खासकर उत्तर प्रदेश में आयोजित धार्मिक आयोजनों और परंपराओं को लेकर उनके बयान चर्चा का विषय बने।

पहले के विवाद और माघ मेला प्रकरण

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कुछ मौकों पर राज्य सरकार की नीतियों और धार्मिक आयोजनों के प्रबंधन पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि परंपराओं और संत समाज की गरिमा का सम्मान होना चाहिए।
इसी पृष्ठभूमि में प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान विवाद सामने आया। उनके समर्थकों का आरोप था कि प्रशासन ने उन्हें विशेष अनुष्ठान और स्नान से रोका। प्रशासनिक पक्ष की ओर से व्यवस्था और प्रोटोकॉल का हवाला दिया गया, लेकिन इस घटना ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी।

इस पूरे घटनाक्रम के कुछ दिनों बाद ही सर्कार ने रात 12 बजे करीब शंकराचार्य जी को एक नोटिश भेजा जिसमे लिखा था कि पहले या शाबित कीजिये की आप ही शंकराचार्य हैं। इस विवाद के बाद माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया।

सरकार पर सवाल उठाए तो नोटिस थमा दिया, पहले साबित कीजिए कि आप ही शंकराचार्य हैं!

आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका

इसी बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया। Ashutosh Brahmachari नाम के एक संत ने प्रयागराज की विशेष POCSO अदालत में याचिका दाखिल की।
आशुतोष ब्रह्मचारी स्वयं को संत और धार्मिक कार्यकर्ता बताते हैं। वे ‘श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट’ से जुड़े होने का दावा करते हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अदालत को बताया कि दो नाबालिग बच्चों ने उनके समक्ष कथित उत्पीड़न की शिकायत की।

उन्होंने यह भी कहा कि पहले पुलिस से संपर्क किया गया, लेकिन जब कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया मामला मानते हुए पुलिस को FIR दर्ज करने का आदेश दिया।

बच्चों और अभिभावक को लेकर सवाल

इस मामले में एक महत्वपूर्ण चर्चा यह भी है कि जिन दो बच्चों का जिक्र याचिका में किया गया, उनके अभिभावक के रूप में आशुतोष ब्रह्मचारी का नाम सामने आया। यानी अदालत में पेशी और बयान की प्रक्रिया में वे ही संरक्षक की भूमिका में दिखाई दिए। जहाँ पर थोड़ा सोचने में ये लगता तो है कि यह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के खिलाफ कोई कदम है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वे बच्चों के कानूनी अभिभावक हैं या केवल संरक्षक के रूप में साथ थे। यह बिंदु अभी जांच और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।

FIR और कानूनी स्थिति

अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज की। यह ध्यान रखना जरूरी है कि FIR दर्ज होना दोष सिद्ध होना नहीं है। इसका अर्थ है कि अदालत ने आरोपों को गंभीर मानते हुए जांच शुरू करने का निर्देश दिया है।
अब पुलिस जांच, बयान और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

शंकराचार्य का पक्ष

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह उनके खिलाफ साजिश है और धार्मिक व वैचारिक मतभेदों के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने जांच में सहयोग करने की बात कही है।

पूरा मामला धार्मिक प्रतिष्ठा, राजनीतिक पृष्ठभूमि और गंभीर कानूनी आरोपों का मिश्रण बन गया है। एक ओर सरकार से उनके पूर्व विवाद चर्चा में हैं, दूसरी ओर POCSO जैसे गंभीर कानून के तहत दर्ज मामला जांच के दायरे में है।
सच्चाई क्या है, यह अदालत और जांच एजेंसियों की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। अब जानना यह है कि कहीं सच में ये FIR शंकराचार्य जी के खिलाफ कोई साजिश तो नहीं। फिलहाल यह मामला संत समाज, राजनीति और कानून — तीनों के संगम पर खड़ा दिखाई दे रहा है।

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