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क्या संचार साथी से खतरे में है यूजर्स की प्राइवेसी? इंटरनेट पर फैल रहे दावों की सच्चाई जानिए

संचार साथी ऐप और प्राइवेसी विवाद से जुड़ी इलस्ट्रेशन

संचार साथी ऐप और प्राइवेसी विवाद से जुड़ी इलस्ट्रेशन

पिछले कुछ समय से इंटरनेट पर कई पोस्ट वायरल हो रही हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार का ‘संचार साथी’ प्लेटफ़ॉर्म यूजर्स की प्राइवेसी के लिए खतरा बन सकता है। कई सोशल मीडिया यूज़र्स का कहना है कि यह पोर्टल आपके मोबाइल नंबर, आधार लिंकिंग और डिवाइस डिटेल्स तक पहुंचता है, जिससे आपकी निजी जानकारी रिस्क में पड़ सकती है।

लेकिन क्या ये दावे सच हैं? आइए इसे एक न्यूज़ रिपोर्ट की तरह समझते हैं।

संचार साथी क्या करता है?

संचार साथी दो मुख्य फीचर्स के माध्यम से काम करता है—

इसका उद्देश्य सिम कार्ड धोखाधड़ी, अवैध मोबाइल इस्तेमाल और साइबर फ्रॉड को रोकना है।

प्राइवेसी को लेकर किस बात पर सवाल उठ रहे हैं?

ऑनलाइन फैल रहे दावों में कहा जा रहा है कि:

इन दावों ने कुछ लोगों में यह डर पैदा किया है कि कहीं यह डेटा गलत हाथों में न चला जाए।

तकनीकी विशेषज्ञों का क्या मानना है?

टेक विशेषज्ञों के अनुसार, संचार साथी सीधे यूज़र की निजी जानकारी सेव नहीं करता, बल्कि टेलीकॉम कंपनियों के वेरिफाइड डेटाबेस से जानकारी खींचकर सिर्फ वही डेटा दिखाता है जिसकी यूज़र को जरूरत होती है।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि किसी भी बड़े सरकारी डेटाबेस में डेटा लीक की संभावनाएं हमेशा रहती हैं, इसलिए मजबूत सुरक्षा बेहद जरूरी है।

क्या यूज़र की प्राइवेसी खतरे में है?

अब तक ऐसा कोई स्पष्ट सबूत सामने नहीं आया है जो यह दिखाए कि संचार साथी प्राइवेसी का उल्लंघन करता है।
लेकिन क्योंकि सिस्टम आधार और मोबाइल डेटा से जुड़ा है, इसलिए लोगों के मन में चिंता होना स्वाभाविक है।

साइबर सुरक्षा से जुड़े जानकार सलाह देते हैं कि:

संचार साथी एक सुरक्षा-केंद्रित प्लेटफ़ॉर्म है जिसका उद्देश्य धोखाधड़ी कम करना है। इंटरनेट पर फैले कई दावे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं, लेकिन प्राइवेसी को लेकर जागरूक रहना हमेशा जरूरी है।

यूज़र को घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है।

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