क्या वाकई सरकार हमारे फोन सुनती है? असली सच क्या है? Hindi News, December 7, 2025December 7, 2025 भारत में फोन टैपिंग हमेशा से एक रहस्यमय विषय रहा है। लोग अक्सर कहते हैं—“सरकार सब सुन रही है”, “हर कॉल रिकॉर्ड हो रही है”—लेकिन असलियत क्या है? क्या सच में कोई हमारी बातचीत सुन रहा होता है या यह सिर्फ डर और अफवाह है? इस लेख में उसी का साफ और सच्चा जवाब है। फोन टैपिंग—कानून क्या कहता है? भारत में किसी व्यक्ति का फोन टैप करना एक सामान्य काम नहीं है। इसके लिए कड़े कानूनी नियम बनाए गए हैं। सरकार या कोई भी एजेंसी ऐसा तभी कर सकती है जब कुछ विशेष शर्तें पूरी हों, जैसे— राष्ट्रीय सुरक्षा का गंभीर खतराआतंकवाद या संगठित अपराध से जुड़ी जांचसार्वजनिक व्यवस्था या लोक सुरक्षा से संबंधित मामलेकिसी बड़े अपराध की गहन जांच इन मामलों में भी फोन टैपिंग सीधे नहीं हो जाती। इसके लिए उच्च अधिकारियों से लिखित अनुमति अनिवार्य होती है। बिना लिखित आदेश के फोन टैप करना कानूनन गलत है। क्या हर किसी का फोन सुना जाता है? बहुत से लोग सोचते हैं कि सरकार सभी नागरिकों की कॉल सुनती है। यह धारणा गलत है।सच यह है कि— हर नागरिक की रोजमर्रा की कॉल सुनने का कोई कारण नहीं होताइसके लिए बहुत भारी संसाधनों की जरूरत होती हैकानूनी तौर पर “मास सर्विलांस” की अनुमति नहीं है इसलिए सिर्फ उन मामलों में फोन टैपिंग की जाती है जहाँ राष्ट्रहित, सुरक्षा या अपराध से जुड़े मजबूत कारण होते हैं। क्या टैपिंग कभी गलत तरीके से हो सकती है? कानून इसकी अनुमति नहीं देता, लेकिन अगर कोई एजेंसी बिना अनुमति ऐसा करती है, तो यह निजता के अधिकार का उल्लंघन माना जाता है। अदालतें कई बार साफ कह चुकी हैं कि किसी की बातचीत बिना वैध आदेश के रिकॉर्ड करना गैरकानूनी है। यानी—अगर टैपिंग होती है, तो वह या तो पूरी तरह वैध होगी, या फिर वह अपराध माना जाएगा। क्या सरकार हमारे मैसेज भी पढ़ सकती है? यह एक आम डर है। लेकिन सच्चाई यह है: एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन वाले ऐप्स के संदेश सीधे नहीं पढ़े जा सकतेकिसी भी डिजिटल मैसेज को इंटरसेप्ट करने के लिए भी वैध अनुमति जरूरी हैहर चैट, कॉल या वॉइस नोट की निगरानी सामान्य तौर पर संभव नहीं इसलिए “हर मैसेज सरकार पढ़ रही है” जैसी बातें सच नहीं। मिथक बनाम सच्चाई मिथकवास्तविकतासरकार हर कॉल सुनती हैनहीं—केवल विशेष मामलों में, वह भी अनुमति सेविरोध करने वालों के फोन टैप हो जाते हैंराजनीतिक असहमति कारण नहीं बन सकती, कानूनी कारण जरूरी होते हैंसभी चैट और मैसेज पढ़े जाते हैंतकनीकी तौर पर संभव नहीं, कानूनी प्रक्रिया के बिना असंभव डर नहीं, समझदारी जरूरी फोन टैपिंग होती है—पर हर किसी की नहीं। यह सिर्फ उन्हीं स्थितियों में की जाती है जहाँ कानून इसकी अनुमति देता है और राष्ट्र या समाज की सुरक्षा इससे जुड़ी होती है।आम नागरिक की रोजमर्रा की कॉल, व्यक्तिगत संदेश या निजी बातचीत किसी की निगरानी का विषय नहीं होते। फिर भी, अपनी डिजिटल प्राइवेसी का ध्यान रखना हर इंसान की जिम्मेदारी है—संदिग्ध ऐप्स से दूर रहें, अनजान लिंक न खोलें, और अपने डेटा की सुरक्षा बढ़ाएँ। Facts Information