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जेरेमी वेड के वीडियो के बाद गंगा की स्वच्छता पर सवाल

जेरेमी वेड के वीडियो से उठे सवाल: गंगा के पानी की हकीकत पर नई बहस

Hindi News, February 18, 2026February 18, 2026

मशहूर ब्रिटिश बायोलॉजिस्ट और लोकप्रिय टीवी शो River Monsters के होस्ट Jeremy Wade का एक वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में उन्होंने Ganges River से लिया गया पानी एक साधारण टेस्ट किट की मदद से जांचा। जांच के दौरान जो परिणाम सामने आए, उन्होंने नदी की स्वच्छता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी।

वीडियो में क्या दिखाया गया?

जेरेमी वेड ने नदी से पानी का सैंपल लेकर उसमें एक केमिकल-आधारित टेस्ट किया। कुछ ही समय में टेस्ट का रंग बदल गया। उन्होंने समझाया कि यह बदलाव ऐसे सूक्ष्म जीवों की मौजूदगी की ओर संकेत करता है, जो आमतौर पर मानव अपशिष्ट से जुड़े होते हैं। उनका कहना था कि यह इस बात का संकेत है कि नदी में अनुपचारित सीवेज का प्रवाह अब भी एक गंभीर समस्या है।

हालांकि यह कोई विस्तृत लैब रिपोर्ट नहीं थी, लेकिन वीडियो ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। खासतौर पर इसलिए क्योंकि गंगा करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और रोज़मर्रा की जरूरतों से जुड़ी हुई है।

आस्था बनाम वास्तविकता

गंगा को भारत में मां के रूप में पूजा जाता है। हर साल लाखों लोग स्नान, पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए इसके तट पर पहुंचते हैं। लेकिन दूसरी ओर, तेजी से बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिक गतिविधियों और अपर्याप्त सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम ने नदी की सेहत पर असर डाला है।

कई शहरों में अब भी घरेलू गंदा पानी बिना पूरी तरह साफ किए नदी में छोड़ा जाता है। यही कारण है कि पानी में बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक तत्वों की मौजूदगी की खबरें समय-समय पर सामने आती रहती हैं।

सफाई अभियान और चुनौतियां

सरकार द्वारा नमामि गंगे जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना है। कई जगहों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए हैं और औद्योगिक कचरे पर निगरानी बढ़ाई गई है। कुछ रिपोर्टों में सुधार के संकेत भी मिले हैं, लेकिन पूरी नदी को स्वच्छ बनाए रखना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है।

बहस का असली मतलब

जेरेमी वेड के वीडियो को अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। कुछ लोग इसे भारत की छवि से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे पर्यावरणीय जागरूकता का एक जरिया मान रहे हैं। सच यह है कि किसी भी नदी की स्वच्छता भावनाओं से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक जांच और ठोस प्रबंधन से तय होती है।

गंगा सिर्फ एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है। इसलिए जरूरी है कि इस मुद्दे पर संवेदनशीलता के साथ-साथ व्यावहारिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी अपनाया जाए। साफ और सुरक्षित जल सुनिश्चित करना केवल सरकार की ही नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।

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