Google पर सच क्यों नहीं दिखता? — बड़े news channels की चुप्पी का सच एक जागरूक नागरिक, June 4, 2026June 4, 2026 Google पर सरकार की आलोचना क्यों नहीं दिखती? | एक जागरूक नागरिक Google पर सरकार की खामियाँ search करो —बड़े channels गायब क्यों हो जाते हैं? कभी आपने notice किया है? जब भी आप Google पर कुछ ऐसा search करते हैं जिसमें सरकार की कोई कमी हो, कोई घोटाला हो, कोई नाकामी हो — तो उसमें NDTV, Zee News, Aaj Tak, Republic TV जैसे बड़े channels की कोई news article नज़र ही नहीं आती। लेकिन जैसे ही आप सरकार की किसी नई योजना के बारे में, किसी उपलब्धि के बारे में search करते हैं — यही channels सबसे ऊपर चमकते हुए मिलते हैं। यह कोई इत्तेफ़ाक नहीं है। सवाल यह नहीं है कि Google कुछ छुपा रहा है। असली सवाल यह है कि जो खबर लिखी ही नहीं गई, वो दिखेगी कैसे? मीडिया का मालिक कौन है — यह क्यों ज़रूरी सवाल है? भारत के जो सबसे बड़े news channels हैं, उनमें से अधिकांश अब उन लोगों के हाथ में हैं जिनके सरकार से सीधे कारोबारी रिश्ते हैं। NDTV, जो कभी सरकार की आलोचना के लिए जानी जाती थी, अब Adani Group के पास है। दिसंबर 2022 में Gautam Adani ने NDTV का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। उसके बाद The Quint में भी Adani की media company ने 49% हिस्सेदारी खरीद ली। Network18 Reliance के पास है। और यह तो बस कुछ उदाहरण हैं। जब channel का मालिक ही सरकार के करीबी कारोबारी हों, तो उस channel का editor सरकार के खिलाफ कितनी हिम्मत से खबर लिखेगा? यह सवाल हर पत्रकार के मन में होता है — और अक्सर जवाब यह होता है कि खबर लिखी ही नहीं जाती। 📋 तथ्य Reporters Without Borders (RSF) के World Press Freedom Index 2025 में भारत 180 देशों में 151वें स्थान पर है। रिपोर्ट में साफ़ कहा गया है कि भारत में media का corporate conglomerates द्वारा एकत्रीकरण और उनके सत्ताधारी दल से राजनीतिक संबंध — यही press freedom की सबसे बड़ी समस्या है। सरकारी विज्ञापन का खेल — जिसे कोई नहीं बताता भारत में news channels की कमाई का सबसे बड़ा ज़रिया है — विज्ञापन। और सरकार इस देश के सबसे बड़े विज्ञापनदाताओं में से एक है। जो channel सरकार को खुश रखेगा, उसे सरकारी विज्ञापन मिलेंगे। जो channel कड़े सवाल पूछेगा, उसका विज्ञापन बंद हो सकता है। RSF ने अपनी रिपोर्ट में यह बात specifically mention की है कि Modi सरकार ने सरकारी विज्ञापन के ज़रिए media को control करने का काम किया है। यानी खबर सच्ची हो या झूठी — पहले यह देखा जाता है कि उसे छापने से कमाई पर असर तो नहीं पड़ेगा। जब 2019 में Dainik Bhaskar ने Adani Group के खिलाफ investigative reports छापीं — तो उसके editor को इस्तीफ़ा देना पड़ा। आखिर क्यों? खबर लिखी जाती है, फिर गायब हो जाती है कुछ मामलों में तो खबरें लिखी भी जाती हैं — और फिर बाद में चुपचाप delete कर दी जाती हैं। Index on Censorship की July 2025 की रिपोर्ट बताती है कि भारत में journalists के पुराने investigative articles इंटरनेट से बिना किसी explanation के गायब हो रहे हैं। एक editor ने बताया — “अब newsroom में कोई सरकार के खिलाफ story pitch ही नहीं करता।” कई reporters खुद अपने पुराने articles हटवा रहे हैं — सिर्फ इसलिए कि उन्हें गिरफ्तारी का डर है। 📋 concrete उदाहरण The Caravan magazine ने Kashmir में army द्वारा civilians की हत्या पर एक रिपोर्ट छापी। सरकार ने official order दिया कि यह रिपोर्ट 24 घंटे के अंदर हटाई जाए। इसी तरह 2024 elections के दौरान Hindi YouTube channel “Bolta Hindustan” को Ministry of Information and Broadcasting के आदेश पर block कर दिया गया — बिना कोई कारण बताए — जबकि उसके 2.75 लाख subscribers थे। तो Google का क्या कसूर है? Google का algorithm बहुत simple तरीके से काम करता है — जो content internet पर exist करती है, जिस पर ज़्यादा लोग click करते हैं, वो ऊपर आती है। Google कोई खबर नहीं लिखता। वो बस वही दिखाता है जो मौजूद है। तो जब बड़े channels ने सरकार की आलोचना वाली खबर लिखी ही नहीं — या लिखकर हटा दी — तो Google उसे कहाँ से दिखाएगा? आपको search results में सिर्फ वही मिलता है जो पहले से exist करता है। और जो exist नहीं करता, वो नज़र नहीं आता। यही वो चक्र है जो एक जागरूक नागरिक को समझना ज़रूरी है। ◈ ◈ ◈ तो हम क्या करें? ✦ कुछ practical तरीके जो आपके काम आ सकते हैं — 01 Google की जगह DuckDuckGo try करें — यह आपकी search history के हिसाब से results नहीं बदलता, इसलिए ज़्यादा neutral results मिलते हैं। 02 सीधे independent news websites पर जाएं — The Wire, Scroll, NewsLaundry, Article 14 जैसे platforms अभी भी बिना डरे खबरें लिखते हैं। 03 किसी भी खबर को share करने से पहले उसका source देखें — जो channel सरकार की तारीफ में दिन-रात लगा हो, उसकी “breaking news” पर आँख मूंदकर भरोसा मत करें। 04 Press Freedom Index जैसी international reports को खुद पढ़ें — ये किसी “विदेशी एजेंडे” की बात नहीं, बल्कि documented facts हैं। एक लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका सरकार पर नज़र रखना है — न कि उसकी तारीफ का ढोल बजाना। जब मीडिया यह ज़िम्मेदारी निभाना बंद कर देता है, तो नुकसान किसी एक पार्टी का नहीं होता — नुकसान होता है हम जैसे आम नागरिकों का, जो सच्ची जानकारी के हकदार हैं। अगली बार जब Google पर कोई खबर न मिले — तो सवाल यह मत पूछिए कि Google ने क्या छुपाया। सवाल यह पूछिए कि वो खबर लिखी क्यों नहीं गई। यह लेख एक जागरूक नागरिक की तरफ़ से — क्योंकि सवाल पूछना हमारा हक़ है। Facts News Article