दंतेवाड़ा में 63 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण: बस्तर में शांति की ओर एक बड़ा कदम Hindi News, January 10, 2026January 10, 2026 छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले से एक अहम और सकारात्मक खबर सामने आई है। 9 जनवरी 2026 को जिले में 63 माओवादी कैडरों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया। यह घटना न सिर्फ सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है, बल्कि बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में भी एक मजबूत संकेत है। आत्मसमर्पण करने वालों में 36 ऐसे नक्सली शामिल हैं जिन पर सरकार की ओर से इनाम घोषित था। इन सभी पर मिलाकर करीब 1.19 करोड़ रुपये का इनाम रखा गया था। इनमें पुरुषों के साथ-साथ 18 महिलाएं भी शामिल हैं, जो यह दिखाता है कि माओवादी संगठन में महिलाओं की भागीदारी भी लंबे समय से रही है। आत्मसमर्पण क्यों महत्वपूर्ण है? दंतेवाड़ा और आसपास का बस्तर क्षेत्र कई दशकों से नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा है। सड़क निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी विकास कार्य इस वजह से बार-बार प्रभावित होते रहे हैं। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण होना यह दर्शाता है कि अब कई लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौटना चाहते हैं। पुनर्वास नीति की भूमिका सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों को आर्थिक सहायता, सुरक्षा और मुख्यधारा में शामिल होने का मौका दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि ये लोग दोबारा हिंसा की ओर न लौटें और सम्मानजनक जीवन जी सकें। उन्हें रोज़गार, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्वास से जोड़ा जाएगा। स्थानीय लोगों पर असर इस आत्मसमर्पण का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय आदिवासी समुदाय को मिलेगा। जब हिंसा कम होगी, तो स्कूल, अस्पताल, सड़कें और अन्य विकास कार्य तेज़ी से आगे बढ़ सकेंगे। साथ ही, आम लोगों में सुरक्षा की भावना भी मजबूत होगी। दंतेवाड़ा में 63 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण केवल एक खबर नहीं, बल्कि बस्तर में बदलते हालात का संकेत है। यह दिखाता है कि संवाद, पुनर्वास और लगातार प्रयासों से हिंसा का रास्ता छोड़ा जा सकता है। अगर यह सिलसिला आगे भी जारी रहता है, तो आने वाले समय में बस्तर क्षेत्र शांति और विकास की नई कहानी लिख सकता है। ट्रंप-मोदी रिश्ते: कहीं नाराज़गी, कहीं तारीफ़ — असल सच क्या है? News Article