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12वीं का रिजल्ट रुका, OSM में गड़बड़ी, portal अचानक बंद

12वीं का रिजल्ट रुका, OSM में गड़बड़ी, portal अचानक बंद — CBSE की एक के बाद एक चूक पर अब सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट सख्त

Laxmi Nautiyal, June 10, 2026June 10, 2026
CBSE पर अदालतों का शिकंजा

एक तरफ सुप्रीम कोर्ट, दूसरी तरफ दिल्ली हाईकोर्ट — और बीच में लाखों बच्चे जिनकी मेहनत, सपने और दाखिले अधर में लटके हैं। 8 जून 2026 को CBSE को एक ही दिन दो अलग-अलग अदालतों से नोटिस मिले। दोनों मामलों में एक ही सवाल था — बोर्ड अपने छात्रों के प्रति जिम्मेदार क्यों नहीं है?

पहला मामला — सुप्रीम कोर्ट : रिजल्ट रुका, दाखिला खतरे में

सऊदी अरब के अल-जुबैल में रहने वाले एक भारतीय छात्र प्रांशु जिगरकुमार पटेल ने 2026 में CBSE 12वीं की Improvement परीक्षा दी — Physics, Chemistry, Mathematics, English और Computer Science में। CBSE ने 13 मई 2026 को 12वीं के नतीजे घोषित किए, लेकिन उसका रिजल्ट “Result Later (RL)” दिखाता रहा।

प्रांशु ने 17 मई, 21 मई और 30 मई — तीन बार CBSE को पत्र लिखा। तीनों बार कोई जवाब नहीं मिला। थक-हारकर उसने सुप्रीम कोर्ट में Article 32 के तहत याचिका दाखिल की।

पश्चिम एशिया में ईरान-इज़राइल-अमेरिका संघर्ष के कारण CBSE ने सात खाड़ी देशों — बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और UAE — में 12वीं की परीक्षाएँ रद्द कर दी थीं। बाद में CBSE ने एक मूल्यांकन योजना बनाई जिसमें Quarterly, Half Yearly और Pre-Board के आधार पर अंक देने की व्यवस्था थी। लेकिन प्रांशु private candidate था — उसका कोई school assessment record नहीं था। CBSE के पास उसके लिए कोई रास्ता नहीं था।

“यह एक बच्चे के करियर का मामला है। वह सभी दाखिलों से चूक जाएगा। चाहे कुछ भी हो — रात भर जागकर काम करो।”

— जस्टिस मनमोहन, सुप्रीम कोर्ट (8 जून 2026)

जस्टिस मनमोहन और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने CBSE और उसके दुबई क्षेत्रीय अधिकारी को नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 12 जून 2026 को तय हुई। कोर्ट ने सुझाया कि छात्र के पिछले शैक्षणिक रिकॉर्ड के आधार पर मूल्यांकन पर विचार किया जा सकता है।


दूसरा मामला — दिल्ली हाईकोर्ट : OSM सिस्टम में गड़बड़ी, लाखों छात्र प्रभावित

2026 में CBSE ने पहली बार 12वीं की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए On-Screen Marking (OSM) सिस्टम लागू किया। इसमें answer sheets को digitise करके screen पर दिखाया जाता है और परीक्षक ऑनलाइन अंक देते हैं। CBSE का दावा था कि यह पारदर्शिता लाएगा।

लेकिन नतीजे आने के बाद छात्रों को पता चला कि कहीं scan अस्पष्ट था, कहीं pages गायब थे, कहीं supplementary sheets थी ही नहीं। NSUI ने दिल्ली हाईकोर्ट में PIL दाखिल की और माँग रखी कि OSM सिस्टम में हुई तकनीकी गड़बड़ियों की स्वतंत्र जाँच हो, प्रभावित छात्रों को compensatory marks मिलें और re-evaluation की समयसीमा बढ़ाई जाए।

याचिका के अनुसार CBSE ने re-evaluation portal पिछली रात अचानक बंद कर दिया था। छात्रों ने अपनी उत्तरपुस्तिकाएँ देखीं तो कई pages गायब मिले — लेकिन portal बंद होने से वे आवेदन भी नहीं कर पाए।

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा और जस्टिस मधु जैन की vacation bench ने केंद्र सरकार और CBSE दोनों को नोटिस जारी किए। सुनवाई की अगली तारीख 12 जून 2026 रखी गई।

फरवरी 2026 में दिल्ली सरकार के शिक्षक संघ (GSTA) ने CBSE से अपील की थी कि OSM सिस्टम को इस सत्र में जबरन लागू न किया जाए। संघ का कहना था कि अधिकांश शिक्षकों को इस डिजिटल प्रणाली की न तो ट्रेनिंग मिली है, न अभ्यास। लेकिन CBSE ने नहीं सुना।

यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं — यह व्यवस्था की विफलता है

दोनों मामलों को अलग-अलग देखने की ज़रूरत नहीं। एक ही सूत्र जोड़ता है इन्हें — CBSE की जवाबदेही का अभाव। एक छात्र तीन पत्र लिखता है, जवाब नहीं मिलता। लाखों बच्चे OSM में गड़बड़ी की शिकायत करते हैं, portal बंद कर दिया जाता है।

और यह कोई नई बात नहीं है। 2024 में NEET पेपर लीक हुआ। 2025 में Parliamentary Standing Committee ने NTA की विफलताओं पर सवाल उठाए। 2026 में CBSE पर साइबर अटैक हुआ। हर बार नई तकनीक का वादा आता है, हर बार वही पुरानी लापरवाही सामने आती है।

2019 से 2024 के बीच देश में कम से कम 64 बड़े पेपर लीक मामले सामने आए — 19 राज्यों में। इनमें NEET-UG 2024, JEE Mains 2021, CTET 2023 और Army recruitment exams शामिल थे। हर बार करोड़ों घंटों की मेहनत और लाखों परिवारों की उम्मीदें धूल में मिलती हैं।

बच्चों की मेहनत का क्या मोल?

इन सब के बीच सबसे अहम सवाल यह है — जो बच्चा सालों पढ़ता है, जिसके माँ-बाप coaching fees के लिए उधार लेते हैं, जो रात-रात भर जागता है — उसकी मेहनत का जिम्मा कौन लेगा? अगर result ‘RL’ आ जाए और CBSE हफ्तों तक न सुने, तो वह बच्चा किसके दरवाज़े जाए?

सुप्रीम कोर्ट ने एक बच्चे के लिए रात भर काम करने को कहा। लेकिन सवाल यह है कि बाकी लाखों बच्चों के लिए कौन जागता है — जिनके पास सुप्रीम कोर्ट जाने का न पैसा है, न जानकारी?

📌 क्या होना चाहिए था?

OSM सिस्टम से पहले शिक्षकों को पर्याप्त training मिलनी चाहिए थी। खाड़ी देशों में परीक्षाएँ रद्द होने पर private candidates के लिए भी स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए थी। Re-evaluation portal बंद करने से पहले छात्रों को उचित सूचना और समय दिया जाना चाहिए था। और सबसे बड़ी बात — CBSE को नागरिकों के पत्रों का जवाब देना ही होगा।

12 जून को दोनों मामलों की सुनवाई होनी है। देखना यह है कि CBSE अदालत को क्या जवाब देता है — और उससे भी ज़रूरी, क्या वह जवाब उन लाखों छात्रों तक पहुँचेगा जो अभी भी अपने results का इंतज़ार कर रहे हैं।

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