12 घंटे काम, OT नहीं — यही है भारतीय Workers की ग्राउंड रियलिटी एक जागरूक नागरिक, May 2, 2026May 2, 2026 गर्मी का मौसम आ गया है। बाहर 44-45°C temperature है। और ऐसे में एक factory worker सुबह 7 बजे घर से निकलता है — और रात के 10-11 बजे वापस आता है। बीच में बस एक आधे घंटे का lunch break। यह कोई एक दिन की बात नहीं। यही उसकी ज़िंदगी है। Factory के अंदर का हाल Automobile और manufacturing companies में काम करने वाले workers की situation इन दिनों बहुत tough है। अंदर का temperature कभी-कभी 48-50°C तक पहुँच जाता है। Cooling का कोई proper system नहीं। बस एक-दो पुराने fans। ऊपर से production का pressure अलग। Line रुकनी नहीं चाहिए। Target miss नहीं होना चाहिए। एक worker ने बताया — “Sir, पानी पीने जाओ तो supervisor घूरता है। कहता है time waste मत करो।” OT का पैसा? वो तो बाद में देखेंगे Factories Act कहता है कि 8 घंटे से ज़्यादा काम करवाया तो overtime देना होगा। लेकिन ground पर यह rule कागज़ों तक ही सीमित है। बहुत सी companies में 12-15 घंटे काम होता है। OT के नाम पर या तो कुछ नहीं मिलता, या इतना कम मिलता है कि बात करना बेकार लगता है। IT sector में तो यह और भी common है। Engineers रात 11-12 बजे तक laptop खोले बैठे हैं। “Deadline है भाई” — बस यही जवाब मिलता है। Double Shift — जब 24 घंटे भी कम पड़ जाते हैं कई workers ऐसे हैं जो day shift करते हैं और फिर किसी की जगह night shift भी cover करते हैं। पूरे 24 घंटे। क्यों? क्योंकि extra पैसों की ज़रूरत है। घर चलाना है, बच्चों की fees भरनी है। और management? उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। काम हो रहा है, बस यही important है। “बोलो मत, नौकरी चली जाएगी” सबसे बड़ी problem यह है कि कोई आवाज़ नहीं उठा सकता। अगर किसी ने HR से बात की, complaint की — तो अगले महीने उसका नाम layoff list में आ जाता है। यही डर लोगों को चुप रखता है। और यही चुप्पी system को चलाए रखती है। भारत के करोड़ों workers रोज़ इसी तरह अपना दिन निकाल रहे हैं। बिना किसी शोर के, बिना किसी headline के। आपके साथ या आपके आसपास भी ऐसा होता है? नीचे comment में बताइए — आपकी बात यहाँ सुनी जाएगी। ICMR Hack — 2023 में भी, 2025 में भी! आपका Data आज भी Safe नहीं है Facts Health & Care Information News Article