“दो कौड़ी के लोग भी YouTube पर पढ़ा रहे हैं और खुद को शिक्षक बता रहे हैं।”

— अंजना ओम कश्यप, Aaj Tak, मई 2026

एक बयान। बस एक बयान — और पूरा देश हिल गया। Aaj Tak की senior anchor अंजना ओम कश्यप ने live TV debate में YouTube teachers को “दो कौड़ी का” और “बड़ा fraud” बोल दिया। लेकिन जो reaction आया, वो शायद उन्होंने सोचा नहीं था।

Reaction सड़कों पर नहीं, screens पर था — social media पर एक tsunami आई। और हो भी क्यों नहीं? जब कोई उन teachers को dismiss करे जिन्होंने गरीब घरों के बच्चों को IIT, UPSC और government jobs तक पहुँचाया — तो गुस्सा तो आएगा।


असली सवाल: Value किसकी है?

करोड़ों students जो free YouTube education लेते हैं
₹0 Suman Ma’am की free marathon classes की fees
2020 COVID में YouTube teachers ने पढ़ाना बंद नहीं किया

Bihar, UP, Rajasthan के उन बच्चों से पूछो जो ₹500 की coaching नहीं afford कर सकते थे — उनके लिए Khan Sir, Suman Mam, Abhinay Sharma जैसे teachers एक उम्मीद थे, एक रास्ता थे।

जो काम expensive coaching centers नहीं कर पाए — वो एक smartphone और YouTube connection ने कर दिया। और यह “दो कौड़ी का” काम था?


जिन्होंने जवाब दिया

Suman Mam

“AC studio में बैठकर हमें fraud बोलना आसान है। हम वो हैं जो गरीब बच्चों के लिए free पढ़ाते हैं।”

Abhinay Sharma

“JEE, NEET, SSC crack करने वाले students को किसने तैयार किया? वही ‘दो कौड़ी के’ teachers ने।”

Khan Sir

Tens of millions followers। छात्रों की आवाज़ — जिन्होंने media की कमियों को publicly उठाया था।


TV Media बनाम Digital Education — असली picture

यह सिर्फ एक comment नहीं था। यह उस बड़े tension का हिस्सा है जो mainstream TV media और तेज़ी से बढ़ती digital education के बीच बन रही है।

TV channels पर TRP के लिए चीखती debates होती हैं, paper leak पर silence होता है, student unemployment पर कोई prime time नहीं होता — लेकिन YouTube teachers को “fraud” बोलने का time ज़रूर निकलता है।

सोचने वाली बात यह है: जो media खुद TRP के लिए हर रोज़ drama करती है, sensational headlines चलाती है, और controversial debates से viewership बढ़ाती है — वो किसी और को “views बटोरने” के लिए कैसे judge कर सकती है?

हाँ, online education में भी कुछ लोग हैं जो students को mislead करते हैं — यह सच है और इस पर बात होनी चाहिए। लेकिन पूरे community को “दो कौड़ी का” बोलना न तो fair है, न factual — यह उन लाखों genuine teachers के साथ अन्याय है जो रात-दिन पढ़ाते हैं, free content देते हैं, और गरीब बच्चों की life बदलते हैं।


“दो कौड़ी के” वो नहीं हैं जो बिना fees के गरीब बच्चों का भविष्य बनाते हैं।

“दो कौड़ी का” वो होता है जो AC studio में बैठकर, बिना ज़मीनी reality जाने,
उन्हीं लोगों पर कीचड़ उछाले — जो असल में देश बदल रहे हैं।