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2023 से 2025 लगातार लीक होती परीक्षाएँ और शिक्षा व्यवस्था पर खतरा

पेपर लीक कांड 2023 से 2025: बार-बार लीक होती परीक्षाएँ और शिक्षा व्यवस्था पर संकट

Hindi News, September 26, 2025September 26, 2025

भारत में हर साल लाखों छात्र-छात्राएँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। उनका सपना होता है कि मेहनत और ईमानदारी से पढ़ाई करके वह नौकरी या एडमिशन पा सकें। लेकिन हाल के वर्षों में एक ऐसा संकट बार-बार सामने आ रहा है जिसने छात्रों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है—वह है पेपर लीक कांड।

लगातार बढ़ती घटनाएँ

पहले यह माना जाता था कि पेपर लीक इक्का-दुक्का मामलों तक सीमित है, लेकिन अब यह हर साल कई बड़ी परीक्षाओं को प्रभावित कर रहा है। 2023 से 2025 के बीच दर्जनों ऐसी घटनाएँ हुईं, जिनमें छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया।

कब-कब और किन परीक्षाओं में लीक हुआ

  • 2024 – NEET-UG पेपर लीक विवाद
    मेडिकल की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा में लीक के आरोप लगे। बिहार से लेकर देशभर में गिरफ्तारियाँ हुईं और कई छात्रों के एडमिशन रद्द भी कर दिए गए। यह घटना लाखों छात्रों के सपनों पर भारी पड़ी।
  • 2024 – BPSC 70वीं प्रीलिम्स
    बिहार लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित परीक्षा में भी पेपर लीक का मामला सामने आया। इसे लेकर छात्रों ने ज़बरदस्त विरोध किया और परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठे।
  • 2024 – यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा
    लाखों उम्मीदवारों ने यह परीक्षा दी थी, लेकिन पेपर लीक की खबरों के बाद विरोध प्रदर्शन हुए। मामला इतना बढ़ा कि सरकार को जांच के आदेश देने पड़े।
  • 2025 – उत्तराखंड भर्ती परीक्षा (UKSSSC)
    हाल ही में हुई इस परीक्षा में आरोप है कि प्रश्नपत्र लाखों रुपये में बेचा गया। SIT की जांच में कई आरोपी पकड़े गए। यह मामला राज्य में बड़ी राजनीतिक बहस का कारण बना।
  • 2025 – OTET (ओडिशा शिक्षक पात्रता परीक्षा)
    इस साल की शुरुआत में ही ओडिशा में शिक्षक भर्ती से जुड़ी परीक्षा का पेपर लीक हो गया। पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए।
  • 2025 – AIIMS NORCET परीक्षा
    सोशल मीडिया पर सवाल वायरल हुए तो दावा किया गया कि पेपर लीक हुआ है। हालांकि AIIMS प्रशासन ने इसे “लीक” मानने से इंकार किया और कहा कि ये सिर्फ “मेमोरी बेस्ड” प्रश्न हैं।

छात्रों और समाज पर असर

हर बार जब पेपर लीक होता है, तो सबसे ज़्यादा नुकसान छात्रों का होता है। उनकी सालों की मेहनत, पैसे और समय व्यर्थ हो जाते हैं। बार-बार की रद्द परीक्षाओं से उनमें हताशा और गुस्सा बढ़ता है। यही नहीं, इसका असर समाज पर भी पड़ता है क्योंकि योग्य उम्मीदवार को सही अवसर नहीं मिल पाता।

समाधान की ज़रूरत

सरकारें सख़्ती की बात करती हैं, लेकिन असलियत यह है कि जब तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी, तब तक पेपर लीक रुकना मुश्किल है।

  • परीक्षाओं को पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित बनाना होगा।
  • पेपर वितरण की प्रक्रिया पर सख़्त निगरानी ज़रूरी है।
  • दोषियों को तुरंत सज़ा देकर उदाहरण पेश करना होगा।

पेपर लीक सिर्फ एक परीक्षा या एक राज्य की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। अगर इस पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों का भरोसा शिक्षा व्यवस्था से उठ सकता है।

उत्तराखंड में UKSSSC परीक्षा पेपर लीक: पूरी घटना और कार्रवाई

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