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पेपर लीक कांड 2023 से 2025: बार-बार लीक होती परीक्षाएँ और शिक्षा व्यवस्था पर संकट

2023 से 2025 लगातार लीक होती परीक्षाएँ और शिक्षा व्यवस्था पर खतरा

2023 से 2025 लगातार लीक होती परीक्षाएँ और शिक्षा व्यवस्था पर खतरा

भारत में हर साल लाखों छात्र-छात्राएँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। उनका सपना होता है कि मेहनत और ईमानदारी से पढ़ाई करके वह नौकरी या एडमिशन पा सकें। लेकिन हाल के वर्षों में एक ऐसा संकट बार-बार सामने आ रहा है जिसने छात्रों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है—वह है पेपर लीक कांड।

लगातार बढ़ती घटनाएँ

पहले यह माना जाता था कि पेपर लीक इक्का-दुक्का मामलों तक सीमित है, लेकिन अब यह हर साल कई बड़ी परीक्षाओं को प्रभावित कर रहा है। 2023 से 2025 के बीच दर्जनों ऐसी घटनाएँ हुईं, जिनमें छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया।

कब-कब और किन परीक्षाओं में लीक हुआ

छात्रों और समाज पर असर

हर बार जब पेपर लीक होता है, तो सबसे ज़्यादा नुकसान छात्रों का होता है। उनकी सालों की मेहनत, पैसे और समय व्यर्थ हो जाते हैं। बार-बार की रद्द परीक्षाओं से उनमें हताशा और गुस्सा बढ़ता है। यही नहीं, इसका असर समाज पर भी पड़ता है क्योंकि योग्य उम्मीदवार को सही अवसर नहीं मिल पाता।

समाधान की ज़रूरत

सरकारें सख़्ती की बात करती हैं, लेकिन असलियत यह है कि जब तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी, तब तक पेपर लीक रुकना मुश्किल है।

पेपर लीक सिर्फ एक परीक्षा या एक राज्य की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। अगर इस पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों का भरोसा शिक्षा व्यवस्था से उठ सकता है।

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