गाजियाबाद से अच्छी खबर : एनसीआर में इस मेट्रो लाइन के बनने का रास्ता साफ, 80:20 के पैटर्न को मिली मंजूरी Laxmi Nautiyal, January 13, 2024January 13, 2024 Ghaziabad News : नमस्कार, दोस्तों दिल्ली की परिवहन व्यवस्था में मेट्रो एक अहम भूमिका निभाती है। मेट्रो से पहले यातायात वाहनों का ज्यादातर बोझ सड़को पर था। लेकिन अब मेट्रो को यातायात के लिए सुगम माना जा रहा है। पहले मेट्रो की व्यवस्था दिल्ली के कुछ जगहों पर ही मिलती थी, लेकिन अब धीरे धीरे मेट्रो लाइन पर काम किया जा रहा है। इसी के चलते गाजियाबाद में मेट्रो लाइन बनने की एक योजना में काफी जोर शोर से काम किया जा रहा है। मेट्रो के इस निर्माण कार्य के दो फेज पूरे हो चुके हैं। वहीं अब आगे के पैटर्न को भी मंजूरी मिल गयी है। जी हाँ अब मेट्रो के तीसरे पैटर्न को शुरू करने का राष्ट साफ़ होता दिखाई दे रहा है। अब जल्दी ही आगे का काम शुरू हो जायेगा। दिल्ली मेट्रो गाजियाबाद में मेट्रो योजना गाजियाबाद में मेट्रो की योजना का आरम्भ हो चुका है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साहिबाबाद से नोएडा के सेक्टर-62 के लिए मेट्रो का निर्माण किया जा रहा है। जिसके 2 फेज पूरे हो चुके हैं। पहले फेज में मेट्रो का काम वैशाली तक पहुँचाया गया। इसके बाद दूसरे फेज में काम शुरू किया गया। दूसरे फेज में ये काम दिलशाद गार्डन से नए बस अड्डे तक पहुंचा। आपको बता दें कि इसके तीसरे चरण में वैशाली से मोहन नगर और साहिबाबाद से नोएडा के सेक्टर- 62 तक मेट्रो लाने की योजना थी। एक बार फंडिंग को लेकर जीडीए ने भी मुँह मोड़ लिया था। लेकिन अब साहिबाबाबद को नोएडा से जोड़ने के लिए जीडीए ने इसके डीपीआर मांगी है। 80:20 के पैटर्न को मिली मंजूरी गाजियाबाद में साहिबाबाद से नोएडा के सेक्टर-62 में बननी वाली मेट्रो की योजना के तीसरे फेज के बनने आसार नजर आ रहे हैं। हालाँकि तीसरे पैटर्न की पहली डीपीआर जब जीडीए को मिली तो उन्होंने फंडिंग के कारण इससे पीछा छुड़ाना चाहा। लेकिन जब पैटर्न को लेकर जिलाधिकारी ने स्थिति साफ की और जीडीए को उन्होंने सुझाव दिया। जिसमें कहा कि प्रोजेक्ट का 80 फीसदी हिस्सा उत्तर प्रदेश शासन, जबकि 20 प्रतिशत हिस्सा डीएमआरसी को देना होगा। इसके बाद अब जीडीए फिर से इस योजना पर काम करने की सोच रही है। लोन पर टिकी है जीडीए की उम्मीदें जब योजना को आगे बढ़ने के लिए जीडीए ने योजना के तीसरे पैटर्न का पहला डीपीआर देखा। तो उन्होंने उसके खर्चे की गणना की। जिसमे उन्होंने देखा कि योजना के तीसरे पैटर्न के लिए करीब 1517 करोड़ का बजट चाहिए। जो कि जीडीए के खजाने में नहीं था। जीडीए के खजाने में इतनी रकम न होने के कारण जीडीए ने अपना हाथ पीछे खींच लिया था। लेकिन जब जीडीए को ये कहा गया कि इस योजना के तीसरे पैटर्न का 80 प्रतिशत फंड उत्तर प्रदेश सरकार देगी और 20 प्रतिशत डीएमआरसी को देना होगा। तक जीडीए इस काम को करने के लिए तैयार है। बजट के कारण पहली डीपीआर को रिजेक्ट कर दिया था। इसलिए अब नयी डीपीआर बनाई जा रही है। उम्मीद है इस बार के डीपीआर में कम खर्चा आये। और जीडीए जल्द ही यह योजना शुरू करे। News Article