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UPSC Student Story: दिन में पढ़ाई,रात में गार्ड की नौकरी को मजबूर! पढ़िए मुखर्जी नगर की ‘कोचिंग मंडी’ पर स्पेशल रिपोर्ट

Laxmi Nautiyal, January 14, 2024January 17, 2024

UPSC Student Story: नमस्कार, दोस्तों आज के दौर में हर आदमी चाहता है कि उसके पास सरकारी नौकरी हो। जिससे वह जीवन आराम से व्यतीत कर पाए। इसके लिए आज के युवा पीढ़ी रात दिन मेहनत करने में जुटी हुई है। हर कोई छोटी सी छोटी और बड़ी से बड़ी पोस्ट के लिए तैयारी कर रहा है। ऐसे ही भारत का सबसे बड़ा एग्जाम UPSC के लिए लाखों बच्चे तैयारी में लगे हैं। लाखों बच्चों का सपना होता है कि वो IAS बनें। IAS बनने का सपना लेकर शहरों में जाते हैं और जी जान से पढाई करते हैं। कई विद्यार्थी तो ऐसे होते हैं जो रात को रात नहीं समझते और दिन को दिन। बस पढाई और पढाई और बस पढाई ही करते रहते हैं। ताकि को अपने और अपने परिवार के सपनो को पूरा कर सके।

मुखर्जी नगर

ऐसे ही बिहार के रहने वाले केशव नंदन बिहार से दिल्ली के मुखर्जी नगर में IAS बनने का सपना लेकर आये। उन्होंने अपने आखरी अटेम्प्ट तक खूब मेहनत की। हालाँकि उन्हें सफलता नहीं मिली लेकिन उनका विश्वास और उम्मीद अभी भी उनकी आँखों में झलकती है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण उनको मुखर्जी नगर में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। पढ़ाई के साथ साथ उन्होंने अपने परिवार के खर्चे को भी संभाला। आईये आपको केशव नंदन की यह इंट्रेस्टिंग और स्ट्रगल भरी जिंदगी से रूबरू करवाते हैं। आपको बताते हैं कि कैसे वो पढाई के साथ साथ गार्ड की नौकरी, चाय की दुकान और किताबों की दुकान चलाने लगे।

कैसे शुरू की IAS बनने की तैयारी

केशव नंदन बताते हैं कि वे बिहार के गया जिले से belong करते हैं। केशव नंदन ने अपनी 12वीं की पढाई की और इसके बाद बीएससी किया। बीएससी करने के बाद वे एमएससी करना चाहते थे लेकिन कुछ कारणों से वो एमएससी की पढाई नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने बीए में एडमिशन लिया और बीए की पढाई की। उनके गाँव में बिजली की सप्लाई सिस्टम में कोई दिक्कत होने पर उन्होंने अपनी बात मंत्री तक पहुंचाई। वहीं मंत्री ने कहा कि तुम पढ़े लिखे हुए हो और तुम्हारी एज भी कम है। तुम IAS बनने की तैयारी करो। हम उनसे ही अपने काम करवाते हैं। उनके ये कहने पर केशव नंदन भी चल पड़े दिल्ली के मुखर्जी नगर में। आईएएस बनने का सपना आँखों में लिए वे भी लांखों की भीड़ में शामिल हो गए।

दिन में पढाई और रात में गार्ड की नौकरी

आँखों में आईएएस बनने का सपना और हाथों में ढाई हजार रूपये लेकर केशव नंदन दिल्ली के मुखर्जी नगर में पहुंचे। और जी जान से मेहनत करने लगे।वे दिन में पढाई करते थे और रात को मुखर्जी नगर में गार्ड की नौकरी करते। कोचिंग सेंटर बदलने के बाद उन्होंने अपने गार्ड का कार्ड सेंटर में दिखाया तो उनकी फीस माफ़ हो गयी। तैयारी करते करते वो परीक्षा के अटेम्प्ट देने लगे। लेकिन उन्हें सफलता हासिल नहीं हुई। लेकिन वे मेहनत करते रहे। उनके घर में आर्थिक समस्याएं बढ़ने लगी। जिससे उन्हें पैसे कमाने की जरुरत पड़ गयी।

चाय की दूकान से कताबें बेचने तक का सफर

आर्थिक स्थिति ख़राब होने के कारण उनको पैसे कमानें की जरूरत पड़ी। उन्होंने चाय की टपरी खोली और वो चाय बेचने लगे। उनके साथ तैयारी कर रहे दोस्तों ने उसको राय दी कि वो चाय से अच्छा किताबें बेचना शुरू करे। और इसके बाद केशव नंदन ने किताबें बेचना शुरू किया। पहले पहले वो जगह जगह घूमकर किताबें बेचने लगे और फिर उन्होंने दूकान खोल दी। गाँव में उनकी माँ अकेली रहती थी। इसके लिए उनको शादी करनी पड़ी।

कभी नहीं छोड़ी उम्मीद

UPSC में सफलता नहीं मिली लेकिन उन्होंने अपनी उम्मीद नहीं छोड़ी। UPSC में सारे अटेम्प्ट पूरे करने के बाद भी उन्हें अपनी मंजिल नहीं मिली। लेकिन केशव नंदन ने हार नहीं मानी और वो लगातार तैयारी करते रहे। अब वे UPSC के अलावा अन्य परीक्षाओं की तैयारी में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि ‘न ही कोई जीत आखरी होती है, और न ही कोई हार आखरी होती है।’

दोस्तों यह तो केवल एक केशव नंदन की कहानी है। दिल्ली के मुखर्जी नगर में कई ऐसे केशव नंदन हैं जो कि IAS बनने का सपना लेकर यहाँ आते हैं। लेकिन सफलता न मिलने के कारण उनको आर्थिक स्थिति का सुधार करने के लिए कुछ न कुछ करना ही पड़ता है। कहा जाता है कि अगर किसी में जरा सी भी योग्यता हो तो उसको मुखर्जी नगर में काम मिल ही जाता है।

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