दिल्ली में यमुना नदी का प्रदूषण: कारण, प्रभाव और समाधान Hindi News, November 7, 2025November 7, 2025 दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी आज गंभीर प्रदूषण की शिकार हो चुकी है। कभी यह नदी पवित्रता और जीवन का प्रतीक मानी जाती थी, लेकिन अब इसकी हालत इतनी खराब हो गई है कि इसमें न तो जलीय जीवन सुरक्षित है और न ही इंसानों के लिए इसका पानी उपयोगी।आइए जानते हैं, आखिर यमुना इतनी गंदी क्यों हो गई और इसे बचाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। 1. सीवेज का गंदा पानी – प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण दिल्ली में लगभग 20 से अधिक बड़े नाले सीधे यमुना नदी में मिलते हैं। इनमें से ज़्यादातर का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के नदी में छोड़ा जाता है। अनुमान के अनुसार, यमुना में जो गंदगी जाती है, उसका लगभग 70-80% हिस्सा घरेलू सीवेज से आता है।सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की संख्या तो है, लेकिन उनमें से कई या तो सही से काम नहीं करते या उनकी क्षमता से ज़्यादा गंदा पानी आता है। इसका परिणाम है — यमुना का पानी काला और बदबूदार हो गया है। 2. औद्योगिक कचरा – ज़हर घोलती फैक्ट्रियाँ दिल्ली और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला केमिकल और टॉक्सिक वेस्ट भी सीधे यमुना में डाला जाता है। खासकर वजीराबाद, ओखला और नजफगढ़ जैसे इलाकों में यह समस्या गंभीर है।इन रसायनों में भारी धातुएँ (जैसे सीसा, क्रोमियम, आर्सेनिक) शामिल होती हैं, जो न केवल पानी को ज़हरीला बनाती हैं, बल्कि मिट्टी और भूजल को भी दूषित कर देती हैं। 3. धार्मिक और घरेलू कचरा – भक्ति में प्रदूषण त्योहारों और पूजा के बाद मूर्तियाँ, फूल-मालाएँ, राख, और प्लास्टिक सामग्री लोग यमुना में प्रवाहित कर देते हैं। यह भावनात्मक रूप से सही लग सकता है, लेकिन इससे नदी का प्रदूषण बढ़ता है।धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना अब समय की ज़रूरत है। 4. जनसंख्या दबाव और अव्यवस्थित शहरीकरण दिल्ली की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। लाखों घरों से निकलने वाला गंदा पानी और घरेलू कचरा यमुना की ओर ही जाता है। अव्यवस्थित शहरीकरण और साफ-सफाई की कमी ने इस समस्या को और गहरा बना दिया है। 5. प्रशासनिक लापरवाही और योजना की कमी यमुना एक्शन प्लान (YAP) जैसी कई योजनाएँ शुरू की गईं, लेकिन उनमें अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। कारण है—कमज़ोर अमल, बजट की कमी और जनजागरूकता की अनुपस्थिति।अगर सरकार और जनता दोनों मिलकर जिम्मेदारी निभाएँ, तो यमुना को फिर से जीवित किया जा सकता है। 6. यमुना प्रदूषण के दुष्प्रभाव पानी पीने योग्य नहीं रहा।नदी में मछलियाँ और अन्य जलीय जीव मरने लगे हैं।आसपास का भूजल भी दूषित हो रहा है।स्वास्थ्य संबंधी बीमारियाँ जैसे स्किन इंफेक्शन, डायरिया और हैजा बढ़ रहे हैं। 7. समाधान – यमुना को फिर से स्वच्छ कैसे बनाया जाए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता और संख्या बढ़ाई जाए।औद्योगिक कचरे का सख्ती से निपटान किया जाए।धार्मिक सामग्री के लिए “कलेक्शन पॉइंट” बनाए जाएँ।स्कूलों और समाज में यमुना की सफाई के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए।सरकार और आम जनता दोनों मिलकर “क्लीन यमुना मूवमेंट” को सफल बनाएं। यमुना सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि दिल्ली की पहचान है। अगर हम आज इसे नहीं बचाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल किताबों में ही इसकी बात करेंगी।अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर यमुना की सफाई और संरक्षण की जिम्मेदारी लें, ताकि यह फिर से वैसी ही पवित्र और जीवनदायिनी बन सके जैसी यह कभी थी। दिल्ली की हवा ज़हर से भी ख़तरनाक: सरकारी बोर्ड पर 450 दिखा, लेकिन असली AQI 700 पार Information News Article