विश्व बैंक ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश के स्वच्छ वायु कार्यक्रमों के लिए बड़ी वित्तीय मंजूरी दी
विश्व बैंक के कार्यपालक निदेशक मंडल ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए दो बड़े कार्यक्रमों को 10 दिसंबर 2025 को मंजूरी दी है। मंजूरी के तहत दोनों राज्यों को लगभग 600 मिलियन डॉलर (करीब 5,000 करोड़ रुपये) का वित्तीय सहयोग मिलेगा। यह फंड अगले कई वर्षों तक इन राज्यों में वायु प्रदूषण कम करने, पर्यावरण सुधारने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने में मदद करेगा।
क्यों जरूरी था यह निवेश
उत्तर भारत लंबे समय से वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या का सामना कर रहा है। प्रदूषण के कारण लोगों में सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियाँ बढ़ रही हैं, बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है। प्रदूषण के चलते श्रम क्षमता कम होती है और स्वास्थ्य व्यय बढ़ता है। इन कारणों से वायु गुणवत्ता सुधारने के बड़े और दीर्घकालिक उपायों की जरूरत महसूस की जा रही थी। विश्व बैंक ने इस निवेश को स्वास्थ्य, आर्थिक उत्पादकता और पर्यावरण संतुलन के लिए आवश्यक बताया है।
उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन कार्यक्रम (UPCAMP)
इस कार्यक्रम को लगभग 299.66 मिलियन डॉलर का वित्तीय सहयोग मिला है। यह योजना दस वर्षों के लिए है, जिसमें दो वर्ष की अतिरिक्त ग्रेस अवधि शामिल है। कार्यक्रम का उद्देश्य लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर और वाराणसी सहित कई प्रमुख शहरों में प्रदूषण के स्तर को कम करना है।
योजना के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- लगभग 15,000 इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और 500 इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा
- सड़क एवं परिवहन क्षेत्र में प्रदूषण कम करने के लिए नीतियाँ
- करीब 3.9 मिलियन परिवारों के लिए स्वच्छ खाना पकाने की तकनीक उपलब्ध कराना
- भारी वाहनों के लिए कम-उत्सर्जन वाले विकल्पों को प्रोत्साहन
- कृषि, उद्योग, परिवहन और घरेलू प्रदूषण नियंत्रण के लिए व्यापक उपाय
इनके माध्यम से राज्य में परिवहन, घरेलू ऊर्जा उपयोग और औद्योगिक गतिविधियों से उत्पन्न प्रदूषण में महत्वपूर्ण कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।
हरियाणा स्वच्छ वायु परियोजना (HCAPSD)

हरियाणा को भी लगभग 300 मिलियन डॉलर की स्वीकृति मिली है। यह कार्यक्रम 23.5 वर्ष की अवधि के लिए है, जिसमें 6 वर्ष की ग्रेस अवधि रखी गई है। इसका लक्ष्य गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत जैसे अत्यधिक प्रदूषित शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता को सुधारना है।
परियोजना में शामिल कुछ प्रमुख उपाय हैं:
- प्रदूषण की सटीक निगरानी के लिए उन्नत वायु गुणवत्ता और उत्सर्जन निगरानी प्रणालियाँ
- इलेक्ट्रिक बसों और इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के संचालन को बढ़ावा
- छोटे और मध्यम उद्योगों को स्वच्छ तकनीकें अपनाने में मदद
- कृषि अवशेष प्रबंधन के लिए उन्नत समाधान
- परियोजना को संचालित करने के लिए विशेष प्रबंधन इकाई की स्थापना
हरियाणा में सर्दियों के समय प्रदूषण के खतरनाक स्तर तक पहुंचने के चलते यह निवेश अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बच्चों और परिवारों के लिए लाभ
दोनों राज्यों में लाखों परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने की तकनीकें और स्वच्छ ईंधन तक बेहतर पहुंच मिलने से बच्चों में सांस की समस्याओं में कमी की उम्मीद है। इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ परिवहन प्रणालियों के बढ़ने से शहरी इलाकों में धुआं और धूल कम होगी, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों और रोज़ाना यात्रा करने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
योजनाओं से जुड़ी चुनौतियाँ
ये कार्यक्रम लंबी अवधि के हैं और इनका वास्तविक असर दिखने में वर्षों लग सकते हैं। राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन का पूरा सहयोग आवश्यक होगा। कृषि अवशेष प्रबंधन और औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में लगातार निगरानी और कड़े पालन की जरूरत होगी। इसके अलावा शहरी ढांचों में बदलाव और स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए जनता और उद्योगों दोनों का सहयोग जरूरी है।
