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Who is Jean Drèze : ज्यां द्रेज़ आखिर कौन हैं? जंतर-मंतर पर एक सवाल और फिर चर्चा में आए NREGA के आर्किटेक्ट

Who is Jean Drèze

ज्यां द्रेज़ आखिर कौन हैं? जंतर-मंतर पर एक सवाल और फिर चर्चा में आए NREGA के आर्किटेक्ट

Who is Jean Drèze : 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रोटेस्ट के दौरान एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें एक पत्रकार मशहूर अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़ से पूछ रहा था कि वो कौन हैं और कहाँ से आए हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। फिर खबर आई कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, चार घंटे बाद छोड़ने की पेशकश की, और उन्होंने बाहर जाने से मना कर दिया। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि द्रेज़ कौन हैं और अभी क्या चल रहा है।

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर क्या हुआ?

CJP ने उस दिन जंतर-मंतर पर “Jantar Mantar 2.0” प्रोटेस्ट बुलाया था। पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके की माँग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। मुद्दा वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision (SIR) में कथित गड़बड़ियों का है। CJP SIR को रोकने, 2024 से पहले की वोटर लिस्ट बहाल करने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता की माँग कर रही है। दिपके का दावा है कि करीब 13 करोड़ वोटर हटाए गए, जिसे चुनाव आयोग नकारता है। आयोग का कहना है कि SIR समेत सारे फैसले तीन सदस्यीय आयोग ने सर्वसम्मति से लिए।

इलाके में भारी सिक्योरिटी थी और BNSS की धारा 163 के तहत पाबंदियाँ लगाई गई थीं। द वीक के मुताबिक द्रेज़ वहाँ पहुँचे और ANI के कैमरे पर कहा कि वो उन लोगों की तरफ से बोल रहे हैं जो “ताकत के इस अविश्वसनीय प्रदर्शन” की वजह से यहाँ नहीं पहुँच पाए, और यह सब बहुत ज्यादा है। उन्होंने रिपोर्टर्स से कहा कि सरकार को हिंसा या सिक्योरिटी रिस्क का डर नहीं है, उसे डर यह है कि लोग समझ जाएँगे कि उनका वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है।

इसी दौरान पत्रकार ने उनसे उनकी पहचान पूछी। Outlook India के अनुसार इस सवाल पर ऑनलाइन काफी आलोचना हुई, और कुछ रिपोर्ट्स में यह भी पूछा गया कि एक “विदेशी दिखने वाला” शख्स पुलिस ब्लॉकेड के बावजूद वहाँ तक कैसे पहुँचा। जबकि द्रेज़ भारत के नागरिक हैं और यहाँ करीब पाँच दशक से रह रहे हैं।

हिरासत और वो फैसला जिसकी हो रही है तारीफ

Article 14 की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने द्रेज़ को तीन और एक्टिविस्ट्स के साथ जंतर-मंतर के पास हिरासत में लिया। Siasat की रिपोर्ट में इनके नाम परन अमिताव, अंजलि एस और अबान रज़ा बताए गए हैं। सबको करीब 16 किलोमीटर दूर नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली के आदर्श नगर थाने ले जाया गया।

थाने में उन्हें और भी लोग मिले, जिनमें Article 14 के मुताबिक कई असम और पश्चिम बंगाल के मुस्लिम मजदूर थे, जिन्हें अपने रोजमर्रा के काम के दौरान ही उठा लिया गया था। करीब चार घंटे बाद पुलिस ने द्रेज़ और उनके साथियों को जाने दिया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। उनके शब्दों में, उन्होंने पुलिस से कहा कि या तो सभी हिरासत में लिए गए लोग एक साथ छोड़े जाएँ, या वो वहीं रुकेंगे। उन्होंने इसके लिए लिखित अर्जी भी दी। लगभग 11 घंटे बाद सभी को छोड़ दिया गया।

Article 14 से बातचीत में द्रेज़ ने कहा कि वो करीब 50 साल से इस देश में हैं, लेकिन किसी प्रोटेस्ट को दबाने के लिए इतनी फोर्स का इस्तेमाल पहले कभी नहीं देखा। उसी रिपोर्ट में छोड़े गए एक व्यक्ति शमीम जफर ने उनका शुक्रिया अदा किया है। Article 14 ने यह भी लिखा कि उस दिन दिल्ली में हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया था।

हर कोई इस मामले में एक राय नहीं रखता। दक्षिणपंथी झुकाव वाले पोर्टल The Commune ने द्रेज़ पर तीखा लेख छापा और CJP के प्रोटेस्ट को “बिना इजाजत” वाला बताया। यानी उनकी मौजूदगी पर बहस दोनों तरफ से चल रही है।

ज्यां द्रेज़ कौन हैं?

ज्यां द्रेज़ डेवलपमेंट इकोनॉमिस्ट और सोशल एक्टिविस्ट हैं। उनका जन्म 22 जनवरी 1959 को बेल्जियम में हुआ। उनके पिता जैक्स द्रेज़ भी जाने-माने अर्थशास्त्री हैं। Outlook के अनुसार वो 1979 से भारत में रह रहे हैं, और 2002 में उन्हें भारतीय नागरिकता मिली। The Week के मुताबिक उन्होंने बेल्जियम की नागरिकता छोड़कर भारतीय नागरिकता अपनाई।

पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने इंग्लैंड की University of Essex से मैथमेटिकल इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की। फिर दिल्ली के Indian Statistical Institute से पीएचडी की, जिसका फोकस cost-benefit analysis पर था। उन्होंने London School of Economics और Delhi School of Economics में पढ़ाया। इलाहाबाद के G.B. Pant Social Science Institute में वो विजिटिंग फैकल्टी रहे और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में honorary chair professor भी। रांची यूनिवर्सिटी से भी उनका जुड़ाव रहा है। उनकी रिसर्च भूख, गरीबी, जेंडर इनइक्वालिटी, बच्चों की सेहत और शिक्षा पर है। जमीनी काम की वजह से उन्हें “Barefoot Economist” भी कहा जाता है।

अमर्त्य सेन के साथ किताबें और PROBE Report

नोबेल विजेता अमर्त्य सेन के साथ द्रेज़ ने Hunger and Public Action (1989) और An Uncertain Glory: India and Its Contradictions (2013) जैसी किताबें लिखी हैं। निकोलस स्टर्न और नोबेल विजेता एंगस डीटन के साथ भी उन्होंने किताबें लिखी हैं। वो शिक्षा पर चर्चित PROBE Report के को-ऑथर भी हैं, और उनके निबंधों का संग्रह Sense and Solidarity नाम से छपा है।

NREGA, RTI और भोजन का अधिकार

आम लोग द्रेज़ को सबसे ज्यादा NREGA की वजह से जानते हैं। Deccan Herald के मुताबिक वो UPA सरकार में नेशनल एडवाइजरी काउंसिल (NAC) के सदस्य थे और NREGA का पहला ड्राफ्ट तैयार करने में उनकी भूमिका थी। Outlook भी 2005 के ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून में उनके बड़े योगदान की बात करता है। RTI Act और National Food Security Act पर भी उनसे सलाह ली गई। वो Right to Food अभियान से लंबे समय से जुड़े हैं।

सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं

Outlook की प्रोफाइल के अनुसार पीएचडी के दौरान वो लंदन में बेघर लोगों के साथ रहे और 1988 में उन्हें अपना आंदोलन खड़ा करने में मदद की। इस अनुभव पर उन्होंने No. 1 Clapham Road: The Diary of a Squat लिखी। 1990-91 के खाड़ी युद्ध के दौरान वो इराक-कुवैत बॉर्डर पर एक पीस कैंप में शामिल हुए और बाद में Hunger and Poverty in Iraq, 1991 लिखी।

2019 में भी हुई थी हिरासत

यह पहली बार नहीं है। मार्च 2019 में झारखंड के गढ़वा जिले में पुलिस ने उन्हें और दो और एक्टिविस्ट्स को हिरासत में लिया था। रॉयटर्स के अनुसार वो एक ग्रामीण स्वयं सहायता समूह की फूड सिक्योरिटी मीटिंग में थे और प्रशासन का कहना था कि इजाजत नहीं ली गई थी। द्रेज़ के मुताबिक 10 दिन पहले अर्जी दी गई थी, जिस पर न मंजूरी मिली न इनकार। गढ़वा के डिप्टी कमिश्नर हर्ष मंगला ने बताया कि पूछताछ के बाद सबको छोड़ दिया गया। Deccan Herald के अनुसार बिशुनपुर थाने में पर्सनल बॉन्ड भरने के बाद रिहाई हुई।

इसी साल मिला इंटरनेशनल अवॉर्ड

5 जून 2026 को पेरिस स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में हुई World Inequality Conference में द्रेज़ को Global Inequality Research Award (GiRA) मिला। INOMICS के मुताबिक यह भारत में गरीबी और असमानता पर उनकी रिसर्च और NREGA व खाद्य सुरक्षा कानून की पैरवी के लिए दिया गया। 2024 के पहले संस्करण में यह बीना अग्रवाल और जेम्स बॉयस को मिला था। अवॉर्ड लेते हुए द्रेज़ ने कहा कि यह अकेले उनकी उपलब्धि नहीं है, क्योंकि वो जो भी करते हैं वो बदलाव के लिए काम करने वाले लोगों और समूहों के साथ मिलकर होता है।

अब आंदोलन कहाँ पहुँचा है?

जंतर-मंतर वाले दिन के बाद भी CJP का आंदोलन थमा नहीं। Deccan Herald के अनुसार CJP और लेफ्ट स्टूडेंट व यूथ संगठनों ने ऐलान किया कि जब तक ज्ञानेश कुमार हटाए नहीं जाते, रोज जंतर-मंतर पर मार्च होगा। SCMP के मुताबिक 12 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर का प्रोटेस्ट साइट का दर्जा हटाकर तीन वैकल्पिक जगहें बताईं। अगले दिन CJP के आशुतोष रंका और सौरव दास बैरिकेड कूदकर अंदर घुसने की कोशिश में फिर हिरासत में लिए गए। 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में “लहरा दो तिरंगा” मार्च में Outlook के अनुसार करीब 150 लोग हिरासत में आए, जिनमें AISA अध्यक्ष नेहा बोरा भी थीं, जिन्हें बाद में छोड़ा गया। Outlook की एक हेडलाइन के मुताबिक अभिजीत दिपके को गिरफ्तार किया गया है। चुनाव आयोग अपने रुख पर कायम है कि फैसले सर्वसम्मति से हुए।

FAQs: ज्यां द्रेज़ के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. ज्यां द्रेज़ कौन हैं?

बेल्जियम में जन्मे और अब भारतीय नागरिक डेवलपमेंट इकोनॉमिस्ट और सोशल एक्टिविस्ट, जो भूख, गरीबी, शिक्षा और सोशल सिक्योरिटी पर काम के लिए जाने जाते हैं।

2. क्या ज्यां द्रेज़ भारतीय नागरिक हैं?

हाँ। Outlook और The Week के अनुसार उन्हें 2002 में भारतीय नागरिकता मिली और वो 1979 से भारत में रह रहे हैं।

3. जंतर-मंतर पर ज्यां द्रेज़ क्यों गए थे?

वो CJP के उस प्रोटेस्ट में शामिल हुए जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर रोक की माँग कर रहा था। उन्होंने सरकार के रिएक्शन को जरूरत से ज्यादा बताया।

4. क्या ज्यां द्रेज़ को हिरासत में लिया गया था?

हाँ। Article 14 के अनुसार 10 अक्टूबर को उन्हें तीन साथियों के साथ हिरासत में लिया गया। चार घंटे बाद उन्हें छोड़ने की पेशकश हुई, पर उन्होंने सबकी रिहाई तक रुकने का फैसला किया और करीब 11 घंटे बाद सभी छोड़े गए।

5. NREGA से ज्यां द्रेज़ का क्या रिश्ता है?

Deccan Herald के अनुसार उन्होंने NREGA का पहला ड्राफ्ट तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

6. अमर्त्य सेन के साथ उनकी कौन सी किताबें हैं?

Hunger and Public Action (1989) और An Uncertain Glory (2013) सबसे जानी-मानी हैं।

7. ज्यां द्रेज़ को हाल में कौन सा अवॉर्ड मिला?

5 जून 2026 को पेरिस में Global Inequality Research Award।

8. CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी क्या है?

एक युवा-नेतृत्व वाला प्रेशर ग्रुप, जिसके फाउंडर अभिजीत दिपके हैं। इस वक्त इसका फोकस CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोटर लिस्ट SIR पर है।

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