उत्तराखंड विधानसभा सत्र में अनुशासनहीनता पर स्पीकर की सख्ती: लोकतंत्र की गरिमा पर उठे सवाल Hindi News, November 8, 2025November 8, 2025 उत्तराखंड विधानसभा सत्र इस बार सुर्खियों में रहा, लेकिन इस बार कारण कोई नीतिगत बहस नहीं बल्कि कुछ विधायकों का अनुशासनहीन व्यवहार था। सदन की कार्यवाही के दौरान हुई अव्यवस्था ने सभी को चौंका दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने इस पर कड़ी नाराज़गी जताई और कहा कि यह रवैया लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है। अध्यक्ष की सख्त चेतावनी अध्यक्ष ने विधायकों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में भी ऐसा व्यवहार दोहराया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सदन बहस और समाधान का मंच है, हंगामे का नहीं। जनता अपने प्रतिनिधियों से शालीनता और जिम्मेदारी की उम्मीद करती है, न कि विवाद और शोर-शराबे की। बाधित हुई सदन की कार्यवाही राज्य में इस समय कई अहम नीतियाँ चर्चा के लिए लंबित हैं — जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे विषय शामिल हैं। मगर हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। इससे न केवल सरकारी कामकाज प्रभावित हुआ बल्कि जनता में भी निराशा दिखी। सदन का उद्देश्य जनता की आवाज़ को सरकार तक पहुँचाना है, लेकिन जब बहस की जगह अव्यवस्था हावी हो जाती है, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है। विशेषज्ञों की राय राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह समय आत्मचिंतन का है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को यह समझना होगा कि जनता ने उन्हें राज्य के विकास के लिए चुना है। अगर वे आपसी विवादों में उलझे रहेंगे, तो इससे केवल जनता का नुकसान होगा। लोकतंत्र की खूबसूरती संवाद में है। असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन उसे संवाद के ज़रिये सुलझाना ही असली नेतृत्व की पहचान होती है। लोकतंत्र की मर्यादा बनाए रखना ज़रूरी विधानसभा अध्यक्ष की टिप्पणी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब सबकी नज़र अगले सत्र पर है कि विधायक इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेते हैं। उत्तराखंड विधानसभा की यह घटना हमें यह सिखाती है कि लोकतंत्र तभी मजबूत बनता है जब उसके स्तंभ एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखें। जनप्रतिनिधियों का आचरण ही जनता के विश्वास को मजबूत करता है। News Article