बिहार के कुछ हिस्सों में किए गए एक हालिया अध्ययन ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन को चिंता में डाल दिया है। अध्ययन में यह पाया गया कि कुछ क्षेत्रों में महिलाओं के स्तन-दूध (Breast Milk) में यूरेनियम (U-238) की मात्रा सामान्य स्तर से अधिक दर्ज की गई है। यह खुलासा उन इलाकों के जल स्रोतों और पर्यावरण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
अध्ययन में क्या पाया गया?
अध्ययन के दौरान कई जिलों से सैंपल लिए गए, जिनमें कुछ नमूनों में यूरेनियम की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक पाई गई। यह संकेत देता है कि प्रभावित क्षेत्रों में जल या मिट्टी के माध्यम से रेडियोलॉजिकल तत्व मानव शरीर में प्रवेश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्तन-दूध में यूरेनियम का पाया जाना सीधे तौर पर पर्यावरणीय प्रदूषण और भूजल गुणवत्ता में कमी का संकेत है।
क्यों चिंता का विषय है यह निष्कर्ष
स्तन-दूध नवजात शिशुओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण और प्राथमिक भोजन होता है। ऐसे में रेडियोएक्टिव तत्वों का मौजूद होना बच्चों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।
संभावित जोखिम:
- बच्चों के हड्डियों और किडनी पर असर
- प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना
- दीर्घकालिक विकास संबंधी समस्याएँ
- माताओं में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ना
हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जोखिम का स्तर कई कारकों पर निर्भर करता है, लेकिन सवालों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
यूरेनियम पानी में कैसे पहुँच सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, भूजल में यूरेनियम की मौजूदगी कई कारणों से हो सकती है:
- प्रभावित क्षेत्रों की चट्टानों और भूगर्भीय संरचना
- औद्योगिक गतिविधियाँ
- खनिजों का प्राकृतिक रिसाव
- खराब जल-प्रबंधन प्रणाली
जब यह दूषित पानी पीने, पकाने और अन्य घरेलू कार्यों में उपयोग होता है, तो यह धीरे-धीरे मानव शरीर में पहुंच सकता है।
क्या कहती है स्वास्थ्य एजेंसियाँ?
स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और वैज्ञानिक संस्थानों ने प्रभावित क्षेत्रों में पानी की जांच बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ ही आने वाले समय में विस्तृत अध्ययन और सतही से लेकर गहरे जल स्तरों की जांच की भी योजना बनाई जा रही है।
कई विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि समस्या व्यापक नहीं है, लेकिन इसे प्राथमिकता पर जांचा जाना जरूरी है ताकि किसी भी तरह के संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिन क्षेत्रों में अध्ययन ने असामान्य तत्वों की उपस्थिति दिखाई है, वहाँ जल शुद्धिकरण और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। साथ ही लोगों को जागरूक करने और जरूरी स्वास्थ्य जांच कराने की भी तैयारी चल रही है।
स्तन-दूध में यूरेनियम की उपस्थिति एक चेतावनी है कि पर्यावरण और जल गुणवत्ता को लेकर अधिक सतर्कता जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि:
- भूजल की नियमित जाँच
- सुरक्षित पेयजल आपूर्ति
- पर्यावरणीय निगरानी
- जन-जागरूकता कार्यक्रम
इन सभी कदमों को संगठित रूप से लागू करना होगा।
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