बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय से राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार ने एक बार फिर इतिहास रचते हुए दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह उपलब्धि उन्हें भारत के सबसे अनुभवी और लंबे समय तक पद पर बने रहने वाले नेताओं में शामिल करती है।
कैसे साफ हुआ मुख्यमंत्री बनने का रास्ता
नवगठित विधानसभा के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन की बैठक में नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। इसके साथ ही उनके मुख्यमंत्री बनने का मार्ग तय हो गया।
गठबंधन के भीतर उनकी स्वीकार्यता और राजनीतिक प्रबंधन क्षमता ने इस फैसले को और मजबूत किया।
राजनीतिक सफर: स्थिरता और रणनीति का मेल
नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ावों से भरा रहा है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान राजनीतिक स्थिरता और रणनीतिक निर्णयों से बनी है।
- उन्होंने कई बार गठबंधन बदले,
- राजनीतिक समीकरण बदले,
- लेकिन हर परिस्थिति में सत्ता के केंद्र में बने रहे।
इसी कारण उन्हें बिहार की राजनीति का “संतुलनकारी नेतृत्व” कहा जाता है।
नई सरकार से जुड़ी अहम बातें
नई सरकार में करीब 35 सदस्यों के बड़े मंत्रिमंडल के शामिल होने की संभावना है। गठबंधन के सभी प्रमुख दलों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की जा रही है।
राज्य में दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की भी चर्चा है, जिससे सरकारी कामकाज को गति देने की कोशिश की जाएगी।
बिहार के लिए इसका क्या मतलब है
नीतीश कुमार के दसवीं बार मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार से कई उम्मीदें जुड़ी हैं:
1. विकास योजनाओं में तेजी
सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में नई योजनाएं लागू होने की संभावना है। जनता उम्मीद कर रही है कि पहले से चल रही परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा और नई परियोजनाएं शुरू होंगी।
2. रोजगार और उद्योग पर फोकस
बिहार में बेरोजगारी लंबे समय से बड़ी समस्या रही है। इस कार्यकाल में उद्योगों को आकर्षित करने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष जोर दिए जाने की उम्मीद है।
3. कानून-व्यवस्था में सुधार
नीतीश सरकार से राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने, अपराध और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की अपेक्षा है।
4. सामाजिक न्याय की दिशा में कदम
बिहारी समाज की विविधता को समझते हुए नई सरकार सामाजिक न्याय और कल्याणकारी योजनाओं को और आगे बढ़ा सकती है।
राजनीतिक चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार का अनुभव बहुत बड़ा है, लेकिन उनके सामने कुछ बड़ी चुनौतियाँ भी हैं:
- गठबंधन की एकजुटता बनाए रखना
- क्षेत्रीय दलों की मांगों को संतुलित करना
- चुनावी वादों को समय पर पूरा करना
- राज्य की आर्थिक चुनौतियों से निपटना
इन सबके बीच उनका राजनीतिक कौशल एक बार फिर परीक्षा में रहेगा।
नीतीश कुमार का दसवीं बार मुख्यमंत्री बनना न सिर्फ राजनीतिक इतिहास का खास पल है, बल्कि बिहार के लिए एक नए दौर की शुरुआत भी है।
जनता इस कार्यकाल से विकास, रोजगार, स्थिरता और पारदर्शी शासन की उम्मीद कर रही है। यह सरकार आने वाले वर्षों में राज्य की दिशा तय करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

