फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़के जिनमें 53 लोग मारे गए — जिनमें 40 मुस्लिम, 13 हिंदू और एक पुलिस कांस्टेबल शामिल थे — और 700 से ज़्यादा लोग घायल हुए। CAA और NRC के विरोध प्रदर्शनों के बीच भड़की इस हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस की Special Cell ने एक “बड़ी साजिश” का मामला दर्ज किया — FIR नंबर 59/2020।
ये लोग गिरफ्तार क्यों हुए?
दिल्ली पुलिस का आरोप था कि दंगे अचानक नहीं भड़के — बल्कि इन्हें पहले से plan किया गया था। Police के अनुसार, CAA विरोध की आड़ में secret meetings हुईं, WhatsApp groups बने, speeches दी गईं और chakka jam organize किया गया जिसका मकसद दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़काना था।
इसी आरोप के तहत 2020 में कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें JNU के students, Jamia के students, activists और एक नेता शामिल थे। खास बात यह है कि इनमें हिंदू और मुस्लिम — दोनों थे।
इन सभी पर लगाया गया कानून था — UAPA यानी Unlawful Activities (Prevention) Act।
UAPA क्या है? यह एक बेहद कड़ा anti-terror कानून है। इसमें bail मिलना लगभग नामुमकिन होता है जब तक court को prima facie यानी सतह पर आरोप झूठे न लगें। इसमें “terrorist act” की परिभाषा बहुत व्यापक है और बिना trial के भी आरोपी सालों जेल में रह सकता है।
18 आरोपी — कौन कहाँ है आज?
नीचे सभी 18 आरोपियों की list है जिन पर FIR 59/2020 के तहत UAPA लगाया गया:
| नाम | पहचान | स्थिति |
|---|---|---|
| उमर खालिद | JNU पूर्व scholar | जेल में |
| शरजील इमाम | JNU scholar | जेल में |
| ताहिर हुसैन | पूर्व AAP पार्षद | जेल में |
| मीरान हैदर | activist | जेल में |
| गुलफिशा फातिमा | activist, RJ | जमानत मिली — Jan 2026 |
| शिफा उर रहमान | activist | जमानत मिली — Jan 2026 |
| मोहम्मद सलीम खान | activist | जमानत मिली — Jan 2026 |
| शादाब अहमद | activist | जमानत मिली — Jan 2026 |
| खालिद सैफी | activist | जेल में |
| सलीम मलिक | activist | जेल में |
| तसलीम अहमद | activist | जेल में |
| अथर खान | activist | जेल में |
| देवांगना कालिता | JNU scholar, Pinjra Tod (हिंदू) | जमानत मिली — Jun 2021 |
| नताशा नरवाल | JNU scholar, Pinjra Tod (हिंदू) | जमानत मिली — Jun 2021 |
| सफूरा ज़रगर | Jamia student | जमानत — humanitarian |
| आसिफ इकबाल तन्हा | Jamia student | जमानत मिली — Jun 2021 |
| इशरत जहाँ | activist | जमानत मिली |
| मोहम्मद फ़ैज़ान खान | activist | जमानत मिली |
बाकियों को bail मिली — उमर खालिद और शरजील इमाम को क्यों नहीं?
5 जनवरी 2026 को Supreme Court ने एक बड़ा फैसला सुनाया। Justice Arvind Kumar और Justice NV Anjaria की bench ने माना कि 5 साल से ज़्यादा की जेल और trial में देरी गंभीर है। इसी आधार पर गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को 12 कड़ी शर्तों के साथ जमानत दे दी।
लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को bail नहीं मिली। Court का कहना था — इन दोनों की भूमिका “planning, लोगों को जुटाने और रणनीतिक निर्देश देने” के स्तर की थी यानी इन्हें साजिश का “central face” माना गया। बाकी आरोपियों की भूमिका “limited और ancillary” बताई गई।
Court ने यह भी कहा कि ये दोनों अगले एक साल तक इस case में दोबारा bail नहीं माँग सकते।
वो सवाल जो अभी भी बेजवाब हैं
- 5 साल से ज़्यादा जेल, trial अभी शुरू भी नहीं हुआ — क्या यह न्यायसंगत है?
- जब उन्हीं के 18 में से कई साथी आरोपियों को bail मिल गई, तो इन दोनों को “central role” कैसे तय हुआ — बिना trial के?
- देवांगना कालिता और नताशा नरवाल — जो हिंदू हैं — उन्हें 2021 में ही bail मिल गई। तो फिर सिर्फ उमर खालिद और शरजील इमाम ही क्यों रह गए?
- 900 गवाहों के बयान बाकी हैं — ऐसे में trial कब पूरा होगा और तब तक जेल?
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