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Kejriwal का बड़ा कदम — “इस Judge के सामने न मैं आऊंगा, न मेरा Lawyer”

Kejriwal vs Justice Sharma: High Court विवाद की पूरी कहानी

Kejriwal vs Justice Sharma: High Court विवाद की पूरी कहानी

अप्रैल 2026 में एक ऐसी खबर आई जिसने पूरे देश को चौंका दिया। AAP नेता Arvind Kejriwal ने Delhi High Court की Justice Swarana Kanta Sharma के सामने अपना case लड़ने से साफ मना कर दिया — न खुद आएंगे, न कोई lawyer भेजेंगे।

लेकिन ऐसा क्यों हुआ? आइए समझते हैं।

Background क्या है?

Delhi Excise Policy case में 27 फरवरी 2026 को Trial Court ने Kejriwal, Sisodia समेत सभी 23 accused को discharge कर दिया — यानी कहा कि CBI का case टिकता नहीं। Court ने 40,000+ pages के सबूत देखने के बाद यह फैसला दिया।

CBI ने इसे High Court में challenge किया और case गई Justice Sharma के पास।

विवाद कहां से शुरू हुआ?

9 मार्च 2026 को — पहली ही सुनवाई में — बिना Kejriwal के lawyers को सुने, Justice Sharma ने कह दिया कि Trial Court का order “prima facie गलत” है।

Kejriwal का सवाल था — “जब judge ने शुरू में ही राय बना ली, तो fair सुनवाई कैसे होगी?”

इसके बाद उन्होंने Judge से recusal मांगी — यानी case से हटने की request। कारण गिनाए:

Judge का जवाब और Kejriwal का “Satyagraha”

20 अप्रैल 2026 को Justice Sharma ने 115 पन्नों के फैसले में bold letters में लिखा — “I will not recuse.”

इसके बाद Kejriwal ने letter लिखकर अपना Satyagraha घोषित किया। Manish Sisodia ने भी यही किया और कहा — “मुझे अब न्याय की उम्मीद नहीं।”

BJP ने इसे “जनता को गुमराह करने की कोशिश” बताया।

सच क्या है?

दोनों तरफ बात है। Trial Court का discharge order और judge के बच्चों का empanelment — ये legitimate सवाल हैं। लेकिन Court को reject करना और Satyagraha बोलना भी एक healthy democracy के लिए सही नहीं। Supreme Court का रास्ता खुला था।

यह case एक बड़ा सवाल छोड़ता है — क्या भारत में न्याय सिर्फ होना चाहिए, या दिखना भी चाहिए?

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