सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया Hindi News, October 3, 2025October 3, 2025 लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी ने पूरे देश में हलचल पैदा कर दी है। उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। उन्होंने कोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका, अनुच्छेद 32 के तहत, दायर की है और गिरफ्तारी को पूरी तरह अवैध करार दिया है। गिरफ्तारी और आरोप सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को पुलिस ने हिरासत में लिया। उन पर आरोप है कि उन्होंने लद्दाख में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान लोगों को भड़काया और उकसाने वाले बयान दिए। इसी आधार पर प्रशासन ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) लागू किया और उन्हें राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में भेज दिया गया। पत्नी की याचिका गीतांजलि अंगमो का कहना है कि गिरफ्तारी की कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी नियमों के खिलाफ है। उन्हें न तो पति से मिलने दिया गया और न ही गिरफ्तारी से जुड़े आदेशों की प्रति प्रदान की गई। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में यह तर्क दिया है कि यह मामला एक ‘witch-hunt’ यानी सुनियोजित प्रताड़ना जैसा है। इसके साथ ही, उन्होंने राष्ट्रपति को भी पत्र लिखकर सोनम वांगचुक की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की है। सोनम वांगचुक कौन हैं? सोनम वांगचुक सिर्फ एक पर्यावरण कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि शिक्षा सुधारक और नवप्रवर्तक (Innovator) भी हैं। उनका जन्म 1966 में लद्दाख में हुआ और उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद समाज के लिए काम करना शुरू किया। वांगचुक ने लद्दाख के बच्चों के लिए स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) की स्थापना की, जिसने क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया। उन्होंने जलवायु संकट से निपटने के लिए आइस स्तूप (Ice Stupa) जैसी तकनीक विकसित की, जिससे लद्दाख के किसानों को पानी की समस्या से राहत मिली।उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें कई पुरस्कार मिले, जिनमें शामिल हैं: रैमोन मैग्सेसे अवॉर्ड – 2018 (सामाजिक सुधार और पर्यावरण संरक्षण के लिए)रोलेक्स अवॉर्ड फॉर एंटरप्राइज – 2002 (आइस स्तूप और शिक्षा सुधार पहल के लिए)गांधी पीस प्राइज़ – 2021 (ग्रामीण विकास, शिक्षा और सतत विकास के प्रयासों के लिए)और कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मान। वांगचुक की पहचान एक ऐसे व्यक्ति के रूप में होती है जो सस्टेनेबल डेवलपमेंट, जलवायु संरक्षण, और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए लगातार संघर्षरत रहे हैं। सोनम वांगचुक का मामला अब सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। लद्दाख और देशभर में उनके समर्थक उनकी गिरफ्तारी को अनुचित बता रहे हैं। अब सबकी नज़र सुप्रीम कोर्ट पर है कि वह इस मामले में क्या रुख अपनाता है। लेह-लद्दाख में उबाल: राज्य दर्जे और अधिकारों की मांग पर प्रदर्शन हिंसक, कई मौतें और गिरफ्तारियाँ Information News Article