सिंगरेनी कोलियरीज से 40 लाख टन कोयला कैसे गायब हुआ? जानिए पूरा सच Laxmi Nautiyal, June 18, 2026June 18, 2026 तेलंगाना की सबसे बड़ी सरकारी कोयला खनन कंपनी सिंगरेनी कोलियरीज़ कंपनी लिमिटेड (SCCL) में एक बड़ा मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी की खदानों से करीब 40 लाख टन कोयला, जिसकी कीमत लगभग ₹1,600 करोड़ बताई जा रही है, गायब हो गया है। SCCL तेलंगाना सरकार और केंद्र सरकार की साझा कंपनी है, जिसमें राज्य सरकार की हिस्सेदारी 51% और केंद्र की 49% है। मामला क्या है: केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने 10 जून 2026 को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को एक पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने अलग-अलग अखबारों में प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए कहा कि लगभग 40 लाख टन कोयला गायब होने से कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, और इस मामले की तुरंत और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा? किशन रेड्डी ने अपने पत्र में लिखा कि SCCL पहले से ही गंभीर आर्थिक दबाव में है, क्योंकि तेलंगाना सरकार की तरफ से कंपनी का करीब ₹51,500 करोड़ का बकाया अभी तक नहीं चुकाया गया है। ऐसी हालत में अगर 40 लाख टन कोयला सच में गायब हुआ है, तो यह कंपनी की पहले से कमज़ोर वित्तीय स्थिति को और बिगाड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सिंगरेनी में कुछ कोयला स्टॉक की जवाबदेही गायब है और कथित तौर पर धोखाधड़ी के मामले भी सामने आए हैं। सवाल यही है — आखिर इतना कोयला कहां गया? 40 लाख टन कोयला किसी एक दिन में गायब नहीं हो सकता। यह इतनी बड़ी मात्रा है कि इसके पीछे या तो लंबे समय की लापरवाही है, या स्टॉक रिकॉर्डिंग में जानबूझकर की गई गड़बड़ी। SCCL जैसी सरकारी कंपनी में हर महीने स्टॉक का हिसाब-किताब और ऑडिट होना तय प्रक्रिया है। ऐसे में सवाल बनता है कि निगरानी तंत्र इतने बड़े अंतर को वर्षों तक पकड़ क्यों नहीं पाया, और क्या सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारी ही इसके लिए ज़िम्मेदार हैं, या ज़िम्मेदारी ऊपर तक भी जाती है। यह पहली बार नहीं है — कोल इंडिया परिवार में ऐसे मामलों का इतिहास कोयला स्टॉक में गड़बड़ी की यह कोई इकलौती घटना नहीं है। कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों में ऐसे मामले पहले भी सामने आते रहे हैं: केस 1 — SECL, अनूपपुर (मध्य प्रदेश), जून 2026: साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की बहेराबांद खदान में स्टॉक मिलान के दौरान 11,382 मीट्रिक टन कोयला रिकॉर्ड से कम पाया गया। CBI जांच के बाद जबलपुर की विशेष अदालत ने 4 जून 2026 को चार पूर्व अधिकारियों को दोषी करार दिया — दो को 4 साल और दो को 1 साल की सज़ा, साथ में जुर्माना भी लगा। केस 2 — भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL), झारखंड: कोल इंडिया की इस सहायक कंपनी में धनबाद की एक कंपनी के ज़रिए गैरकानूनी भुगतान करके करीब ₹22.16 करोड़ की हेराफेरी का आरोप सामने आया था, जिसमें CBI ने वरिष्ठ अधिकारियों पर मामला दर्ज किया। यह पैटर्न बताता है कि स्टॉक और बिलिंग में गड़बड़ी सिर्फ एक राज्य या एक कंपनी तक सीमित नहीं है — यह कोल इंडिया के पूरे ढांचे में बार-बार सामने आने वाली समस्या लगती है। अब आगे क्या? अभी तक यह मामला सिर्फ मीडिया रिपोर्ट्स और केंद्रीय मंत्री के पत्र तक सीमित है — तेलंगाना सरकार की तरफ से अभी कोई औपचारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। सवाल बना हुआ है कि क्या राज्य सरकार पारदर्शी जांच करेगी, कोयले का यह नुकसान कैसे भरा जाएगा, और क्या ज़िम्मेदार लोगों पर वैसी ही सख्त कार्रवाई होगी जैसी SECL के मामले में हुई। जब तक स्वतंत्र जांच पूरी नहीं होती, यह कहना मुश्किल है कि असल नुकसान कितना है और इसके पीछे कौन ज़िम्मेदार है। इस खबर को शेयर करें: Facebook X WhatsApp Telegram Facts Information News Article