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पुतिन इंटरव्यू में दो एंकरों की बैठने की मुद्रा पर हंगामा, पेशेवर शिष्टाचार पर उठे सवाल

हाल ही में व्लादिमीर पुतिन के साथ हुआ एक विशेष इंटरव्यू चर्चा का केंद्र बन गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस इंटरव्यू में पूछे गए सवाल या राजनीतिक बयान चर्चा का विषय नहीं बने, बल्कि इंटरव्यू लेने वाली दो भारतीय एंकरों की बैठने की मुद्रा और बॉडी लैंग्वेज ने पूरी बहस को जन्म दे दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों और वीडियो क्लिप्स ने इस मुद्दे को और तेज़ कर दिया है।

क्या था विवाद?

इंटरव्यू के दौरान दिखाई गई तस्वीरों में दोनों एंकर पुतिन के सामने बेहद आरामदेह और अनौपचारिक ढंग से बैठी नज़र आईं। एक एंकर पैर मोड़कर बैठी थीं और दूसरी की मुद्रा भी औपचारिक इंटरव्यू स्टाइल से काफी अलग दिख रही थी। दर्शकों ने इसे ग्लोबल स्तर की बातचीत के लिए अनुचित बताया। कई लोगों का मानना है कि इतने बड़े नेता के सामने पत्रकारों को अधिक संतुलित, औपचारिक और पेशेवर मुद्रा अपनानी चाहिए थी।

“यह सिर्फ मीडिया हाउस नहीं, भारत की छवि भी”

आलोचकों ने इस बात पर जोर दिया कि कैमरे पर दिखाई देने वाला पत्रकार केवल एक मीडिया संस्था का प्रतिनिधि नहीं होता, बल्कि वह पूरे देश की छवि को भी साथ लेकर बैठता है। जब विश्व मंच पर भारत की ओर से कोई पत्रकार सवाल पूछ रहा होता है, तो उसकी बॉडी लैंग्वेज और व्यवहार उसी गंभीरता को दर्शाने चाहिए। पुतिन इंटरव्यू में यह तुलना और भी स्पष्ट दिखाई दी—जहां पुतिन अत्यंत शालीन और औपचारिक मुद्रा में बैठे थे, वहीं एंकरों का स्टाइल इससे बिल्कुल उलट नज़र आया।

सोशल मीडिया पर तेज़ प्रतिक्रियाएँ

सोशल मीडिया पर इस विषय पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई दर्शकों ने एंकरों की पेशेवर तैयारी पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने कहा कि पत्रकारों को कैमरे पर बैठने की ट्रेनिंग और एटिकेट्स का पालन करना अनिवार्य है। कुछ ने यह भी कहा कि आलोचना केवल बैठने की मुद्रा तक सीमित होनी चाहिए, व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए।

पेशेवरिता क्यों ज़रूरी है

यह विवाद मीडिया संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है। इंटरव्यू की तैयारी सिर्फ सवालों और रिसर्च तक सीमित नहीं होनी चाहिए; पेशेवर बॉडी लैंग्वेज, बैठने का तरीका और संपूर्ण प्रस्तुति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। जब पत्रकार अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो उनकी हर हरकत और मुद्रा कैमरे के माध्यम से भारत की छवि बनाती या बिगाड़ती है। पुतिन इंटरव्यू ने यह साफ कर दिया कि ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी बहस का विषय बन सकती है।

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