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स्वामी जी प्लीज़ गाने को लेकर सिंगर प्रियंका मेहर को नोटिस

गढ़वाली सिंगर प्रियंका मेहर को नोटिस: एक गीत की लाइन से उठा विवाद, क्या वाकई इसकी ज़रूरत थी?

Hindi News, December 5, 2025December 5, 2025

उत्तराखंड की लोकप्रिय गढ़वाली सिंगर प्रियंका मेहर हाल ही में अपने नए गीत “स्वामी जी प्लीज़” के कारण विवादों में आ गई हैं। गांव उर्गम के कुछ लोगों की ओर से उन्हें कानूनी नोटिस जारी किया गया है। आरोप है कि गीत की एक पंक्ति में उर्गम गांव का ऐसा जिक्र किया गया है, जिससे गांव की छवि और सांस्कृतिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचती है। इस पंक्ति पर आपत्ति जताते हुए नोटिस भेजने वाले पक्ष का कहना है कि गीत में गांव को गलत तरीके से दर्शाया गया है।

नोटिस में यह भी मांग की गई है कि प्रियंका मेहर गीत को सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों से हटाएं और उर्गम गांव तथा स्थानीय समुदाय से सार्वजनिक माफी मांगें। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि 15 दिनों के अंदर ऐसा नहीं किया गया, तो उनके खिलाफ मानहानि सहित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह पहली बार नहीं है जब किसी गीत की वजह से उत्तराखंड में इस तरह का विवाद खड़ा हुआ हो, लेकिन इस बार मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया है।

विवाद का मुख्य केंद्र गीत की वह लाइन है, जिसे स्थानीय लोग अपनी धार्मिक-सांस्कृतिक भावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि उर्गम घाटी अपनी आध्यात्मिकता, प्राकृतिक सौंदर्य और परंपराओं के लिए जानी जाती है; ऐसे में उसका गलत या हल्का-फुल्का चित्रण स्वीकार्य नहीं है। दूसरी ओर, संगीत प्रेमियों और कलाकारों का मानना है कि किसी गाने की एक पंक्ति को लेकर इतने बड़े स्तर पर कानूनी दबाव बनाना उचित नहीं है।

क्या वाकई इसकी इतनी ज़रूरत थी?

यह सवाल अब बड़ा हो गया है कि क्या सिर्फ एक लाइन के लिए किसी कलाकार को नोटिस भेजना जरूरी था? उर्गम घाटी, जो अपनी सुन्दरता के साथ-साथ अनेक समस्याओं से भी जूझ रही है—जैसे सड़क सुविधा की कमी, स्वास्थ्य सेवाओं की दिक्कतें, आपदा जोखिम, पलायन—क्या उन मुद्दों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी नहीं है? वर्षों से गांव के वास्तविक और गंभीर मुद्दे उठाए जाने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन हल्की-फुल्की कलात्मक अभिव्यक्ति पर ही सबसे तेज़ प्रतिक्रिया दिखाई देती है।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि कला अभिव्यक्ति की आज़ादी और भावनात्मक आहत होने की सीमा कहाँ तक है। जरूरत शायद संतुलन की है—जहाँ कलाकार संवेदनशीलता बनाए रखें और समाज कला को थोड़ा व्यापक नजरिए से देखे।

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