नील नदी की दिशा उल्टी क्यों है? जानिए इस रहस्यमयी प्रवाह का भूगोलिक कारण Hindi News, November 9, 2025November 8, 2025 नील नदी दुनिया की सबसे लंबी नदी मानी जाती है। यह लगभग 6,650 किलोमीटर लंबी है और अफ्रीका के 11 देशों से होकर बहती है। लेकिन इसके बारे में सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह दक्षिण से उत्तर की ओर बहती है, जबकि ज़्यादातर नदियाँ उत्तर से दक्षिण की दिशा में बहती हैं। आइए जानते हैं, ऐसा क्यों होता है। नील नदी की शुरुआत कहाँ से होती है नील नदी का उद्गम पूर्वी अफ्रीका के विक्टोरिया झील (Lake Victoria) से होता है।यह झील भूमध्य रेखा (Equator) के दक्षिण में स्थित है।यहां से नदी उत्तर की ओर बढ़ती हुई सूडान, दक्षिण सूडान, युगांडा और अंत में मिस्र (Egypt) से होकर बहती है, और अंत में भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) में जाकर मिल जाती है। दिशा उल्टी क्यों लगती है असल में नील नदी की दिशा “उल्टी” नहीं है, बल्कि उसका प्रवाह भूगोल के अनुसार स्वाभाविक है।धरती पर नदियाँ हमेशा ऊँचाई से नीचाई की ओर बहती हैं — दिशा उत्तर या दक्षिण नहीं, बल्कि ऊँचाई पर निर्भर करती है।अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से ऊँचाई पर हैं, जबकि उत्तर की ओर मिस्र और भूमध्य सागर का इलाका नीचा है।इसलिए नील नदी ऊँचाई वाले दक्षिण अफ्रीका से नीचे की ओर यानी उत्तर दिशा में बहती है। क्या केवल नील ही ऐसी नदी है? नहीं, दुनिया में और भी नदियाँ हैं जो उत्तर की ओर बहती हैं।उदाहरण के तौर पर — रूस की ओब (Ob) नदीजर्मनी की एल्बे (Elbe) नदीभारत की सोन नदी — कुछ हिस्सों में उत्तर दिशा में बहती है। इन सभी का प्रवाह भी उनके भू-आकृतिक (topographical) ढांचे पर निर्भर करता है। नील नदी का ऐतिहासिक महत्व नील नदी मिस्र की सभ्यता की जीवनरेखा मानी जाती है।प्राचीन मिस्रवासियों ने इसी नदी के किनारे अपनी पूरी सभ्यता बसाई थी।खेती-बाड़ी, व्यापार और जीवन का हर पहलू नील पर ही निर्भर था।इस नदी के कारण ही रेगिस्तान के बीच मिस्र एक उपजाऊ देश बन सका। पर्यावरण और वर्तमान स्थिति आज नील नदी कई चुनौतियों से जूझ रही है — जैसे कि प्रदूषण, जल की कमी और डैम निर्माण।इथियोपिया में बन रहा Grand Ethiopian Renaissance Dam (GERD) इस नदी के जल-वितरण को लेकर अफ्रीका के देशों में विवाद का कारण बना हुआ है।फिर भी, नील नदी आज भी अफ्रीका की जीवनरेखा बनी हुई है। प्रकृति का अद्भुत संतुलन नील नदी हमें यह सिखाती है कि प्रकृति का हर प्रवाह अपनी दिशा खुद तय करता है — चाहे वह हमें “उल्टा” ही क्यों न लगे।उसका रास्ता हमेशा संतुलन और ऊँचाई-नीचाई के नियमों पर आधारित होता है, जो धरती के अद्भुत भूगोल को दर्शाता है। जापान की ‘फॉरेस्ट बाथिंग’ क्या है? जानिए इस नेचर थेरेपी के चौंकाने वाले फायदे Facts Information