नमस्कार, दोस्तों मोदी सरकार द्वारा अडानी ग्रुप को बिहार में मात्र 1 रूपये में 1050 एकड़ जमीन 30 साल के लिए लीज पर दिया गया है। जिसपर कई पत्रकार और कटेंट क्रेटर ने सवाल उठाते हुए इसकी आलोचना की है। जो कि जायज भी है। लेकिन सरकार को ये बात रास नहीं आ रही। जिसको लेकर सरकार ने अडानी से सम्बंधित इस प्रकार की वीडियो और पोस्ट को हटाने का फरमान जारी किया। अडानी इंटरप्राइजेज ने उनकी मानहानि को लेकर इस पर दिल्ली कोर्ट में याचिका दर्ज की। जिसको लेकर सभी पत्रकार और क्रेटर्स को अदाणी से जुड़े 221 वीडियो और पोस्ट हटाने का फरमान दिया गया।
अदाणी से जुड़े 221 वीडियो और पोस्ट हटाने के दिए आदेश
आपको बता दें कि मोदी सरकार और अडानी की आलोचना पर जिस भी प्लेटफार्म पर वीडियो पड़ा है। सभी वीडियोस को हटाने का आदेश जारी हुआ है। जिसमे 138 यूट्यूब वीडियो हैं और 83 इंस्टाग्राम पोस्ट हैं जो छोटे बड़े क्रेटर्स ने और पत्रकारों ने बनाई है। वीडियो को हटाने का आदेश सभी को मिला है। जिसमे पत्रकार रवीश कुमार, अजीत अंजुम, अभिसार शर्मा, आकाश बनर्जी और ध्रुव राठी जैसे क्रेटर्स शामिल हैं।
पत्रकार रवीश कुमार ने जताई नाराजगी
सरकार द्वारा वीडियो हटाने के आदेश को लेकर रवीश कुमार ने बड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स (ट्विटर) पर लिखा “मुझे भी यू ट्यूब ने सूचना भेजी है कि अदाणी पर बने वीडियो ख़ुद हटा लूं या फिर वह हटा देगा। सूचना मंत्रालय ने कई लोगों और संस्थाओं को नोटिस जारी किया है, इनमें न्यूज़लौंड्री, द वायर सहित ध्रुव राठी, अभिसार, अजीत अंजुम, आकाश बनर्जी के वीडियो के भी लिंक हैं। कुल 138 वीडियो हटाए जाने हैं। इंस्टाग्राम पर भी पोस्ट किए गए वीडियो हटाने होंगे। आज अदाणी वीडियो टेक डाउन दिवस है। अगर कोई यू ट्यूबर इसी पर वीडियो बनाए कि अदाणी पर बने 138 वीडियो टेक डाउन करने के आदेश दिए गए हैं तो क्या उसके वीडियो को भी टेक डाउन किया जाएगा। टेक डाउन का मतलब होता है वीडियो डिलिट करना।”
अजीत अंजुम ने भी किया ट्वीट
अजीत अंजुम ने भी इसपर लिखा, “अडानी का नाम लेना अब गुनाह हो गया ? दिल्ली की एक अदालत के आदेश के बाद सूचना प्रसारण मंत्रालय और यूट्यूब की तरफ़ से मुझे 24 वीडियो को डिलीट करने का फरमान आया है . अडानी के जिन वीडियो को हटाने के मुझे निर्देश मिले हैं , उनमें प्रशांत भूषण , यशवंत सिन्हा , सुचेता दलाल और सुब्रमण्यम स्वामी के इंटरव्यू भी शामिल हैं . कुछ वीडियो में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भाषण के हिस्से हैं . सुप्रिया श्रीनेत की पीसी है .
इंडियन एक्सप्रेस और कुछ अखबारों की रिपोर्ट के हवाले से बनाए गए वीडियो हैं. ऐसा लग रहा है जैसे अडानी का नाम जिस भी विडियो में लिया गया है , उन सबको हटाने का फरमान है . हमारा पक्ष न तो सुना गया . न ही हम किसी मुकदमें में पार्टी हैं . बस फरमान है कि अडानी का जहां भी नाम लिया गया , सबको हटा दो . द वायर और न्यूज़लौंड्री समेत रवीश कुमार ध्रुव राठी, अभिसार शर्मा, आकाश बनर्जी समेत कई और लोगों को ये फरमान मिला है.”
Note : दोस्तों कोई भी पार्टी की सरकार क्यों न हो, हम जनता हैं और हमसे ही नेता भी हैं। अगर हमें अपनी बात रखने का और सवाल उठाने का अधिकार ही नहीं। तो यह लोकतंत्र किस बात का ? नेपाल में सभी ने देख और सुन लिया है कि आखिर जनता की ताकत क्या है। तो इसीलिए सरकार न्यायपूर्वक चले और जनता को भी इस प्रकार न निचोड़ें।
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