बिहार में हाल ही में लिया गया एक बड़ा फैसला सुर्खियों में है। भागलपुर जिले के पीरपैंती क्षेत्र में राज्य सरकार ने अडानी ग्रुप को 1,050 एकड़ ज़मीन थर्मल पावर प्लांट के लिए दी है। यह डील बेहद चर्चा में है क्योंकि सरकार ने यह जमीन 33 साल की लीज़ पर सिर्फ ₹1 वार्षिक किराए पर उपलब्ध कराई है। यही कारण है कि विपक्ष और आम लोग इसे “औने-पौने दाम पर सौदा” कहकर सवाल उठा रहे हैं।
कहाँ और क्यों दी गई जमीन?
भागलपुर का पीरपैंती इलाका उपजाऊ भूमि और बागबानी के लिए जाना जाता है। यहाँ आम, लीची और सागौन जैसे पेड़ों की भरपूर खेती होती है। सरकार का कहना है कि इस पावर प्लांट से बिहार की बिजली की ज़रूरतें पूरी होंगी और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। योजना के तहत यहाँ पर 2,400 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट लगाया जाएगा जो तीन यूनिट्स में काम करेगा।
बिजली की कीमत पर विवाद
अडानी ग्रुप ने बिहार सरकार के साथ 25 साल का पावर सप्लाई एग्रीमेंट किया है। इसके मुताबिक, कंपनी बिजली की दर लगभग ₹6.075 प्रति यूनिट पर राज्य को बेचेगी। अब यहीं पर सबसे बड़ा विवाद खड़ा हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दर कई अन्य राज्यों की तुलना में कहीं ज़्यादा है। सवाल यह है कि जब बिहार की जनता पहले से ही महँगी बिजली का बोझ झेल रही है तो इस प्रोजेक्ट से राहत मिलेगी या और महँगी बिजली खरीदनी पड़ेगी?
किसानों और पर्यावरण पर असर
इस सौदे का सबसे गंभीर पहलू किसानों और पर्यावरण पर पड़ने वाला असर है। जिन इलाकों की जमीन ली गई है वहाँ खेती-बागबानी से हजारों लोग अपना जीवन यापन कर रहे थे। आरोप है कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसानों को ठीक से भरोसे में नहीं लिया गया और कई जगह दबाव डालकर उनकी जमीन ली गई।
इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट के लिए हजारों पेड़ काटे जाएंगे, जिससे स्थानीय पर्यावरण और जलवायु पर सीधा असर होगा। पर्यावरणविद इसे “प्रकृति और किसान दोनों पर डबल मार” मान रहे हैं।
विपक्ष और जनता की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने इस डील को सीधे-सीधे “कॉर्पोरेट परस्त” बताया है। उनका कहना है कि मोदी और नीतीश सरकार बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुँचाने में लगी हुई हैं जबकि आम जनता और किसान लगातार संकट झेल रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड कर रहा है जहाँ लोग इसे “अन्यायपूर्ण सौदा” कहकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं।
आखिर यह अन्याय क्यों?
लोगों के मन में कुछ बड़े सवाल खड़े हैं —
- क्या बिहार के किसानों की उपजाऊ जमीन को औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में बदलना सही है?
- जब बिजली इतनी महँगी मिलेगी तो इसका बोझ आम जनता पर ही क्यों डाला जाएगा?
- क्या राज्य में निवेश और उद्योग की ज़रूरत पूरी करने का कोई और न्यायपूर्ण तरीका नहीं था?
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