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फिल्में या प्रोपेगैंडा_ मोदी के बयान के बाद गरमाई बहस

जब PM खुद मैदान में उतरें फिल्म बचाने — तो सवाल उठना लाज़मी है कि आखिर क्यों?

एक जागरूक नागरिक, April 6, 2026April 6, 2026

Dhurandhar, The Kerala Story और The Kashmir Files — तीन फिल्में जिनका बचाव अब एक चुनावी मंच से हो रहा है। क्या PM मोदी का यह कदम इन फिल्मों की साख बढ़ाता है, या अनजाने में उन सवालों को और वैध बना देता है जो इन पर उठते रहे हैं?

4 अप्रैल 2026। केरल का तिरुवल्ला। चुनावी गर्मी अपने चरम पर। और इसी माहौल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से तीन फिल्मों के नाम लिए — Dhurandhar, The Kerala Story और The Kashmir Files। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने इन फिल्मों को झूठ करार दिया, और यह उनकी “झूठ फैलाने की आदत” है।

बात सुनने में बेहद सरल लगती है। लेकिन जैसे ही आप इसे थोड़ा गहराई से देखते हैं, एक असुविधाजनक सवाल सामने आता है — क्या किसी देश के प्रधानमंत्री को चुनावी रैली में व्यावसायिक फिल्मों का नाम लेकर उनका बचाव करने की ज़रूरत पड़नी चाहिए?

“उन्होंने कहा Kerala Story झूठ है, Kashmir Files झूठ है, Dhurandhar झूठ है — इनका काम ही झूठ फैलाना है।”

— PM नरेंद्र मोदी, तिरुवल्ला रैली, 4 अप्रैल 2026

राजनीति और सिनेमा का यह गठजोड़ नया नहीं है

यह पहली बार नहीं है जब किसी नेता ने किसी फिल्म को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया हो। लेकिन यहाँ जो बात ध्यान खींचती है वह यह है कि मोदी जी ने न सिर्फ इन फिल्मों का समर्थन किया, बल्कि उन्हें विपक्ष के खिलाफ अपनी दलील का हिस्सा बनाया — CAA, FCRA और UCC जैसे कानूनी मुद्दों के साथ-साथ। यानी एक मनोरंजन उत्पाद को उसी पंक्ति में रखा गया जहाँ देश की नीतियाँ खड़ी हैं।

और यहीं से वह असुविधाजनक इशारा शुरू होता है।

सोचने वाली बात: जब कोई फिल्म सिर्फ कला होती है, तो उसे किसी PM के बचाव की ज़रूरत नहीं होती। लेकिन जब एक चुनावी मंच से उसे "सच्चाई का प्रतीक" बताया जाए, तो दर्शक के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है — क्या यह फिल्म कला थी, या एक सोची-समझी राजनीतिक परियोजना?

तीनों फिल्मों का राजनीतिक सफर

  1. The Kashmir Files (2022)

कश्मीरी पंडितों के पलायन पर आधारित। BJP नेताओं ने इसे tax-free कराया, संसद में इसकी तारीफ हुई, और PM ने इसे “सच्चाई का आईना” बताया। अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में इसे “propaganda” की श्रेणी में रखा गया।

2. The Kerala Story (2023)

ISIS में भर्ती होने वाली केरल की लड़कियों की कहानी। BJP शासित राज्यों में tax-free, सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा मामला। फिल्म के आंकड़ों पर खुद निर्माताओं को सफाई देनी पड़ी।

3. Dhurandhar (2025–26)

Kandahar hijack और 26/11 से प्रेरित। Aditya Dhar निर्देशित — वही निर्देशक जिन्होंने Uri बनाई थी, जिसे “surgical strike फिल्म” कहा गया। दोनों पार्ट चुनावी वर्ष में रिलीज़।

तीनों फिल्मों में एक साझा pattern है — सरकारी समर्थन, चुनावी टाइमिंग, और एक खास वर्ग या विचारधारा को केंद्र में रखना। यह संयोग हो सकता है। लेकिन जब PM खुद इन्हें एक ही साँस में बोलते हैं, तो यह pattern और स्पष्ट हो जाता है।

PM का बचाव — मदद या उलटा असर?

राजनीतिक संचार में एक पुरानी कहावत है — “जो सबसे ज़्यादा सफाई दे, उस पर सबसे ज़्यादा शक करो।” PM मोदी का यह भाषण विपक्ष को जवाब देने की कोशिश थी, लेकिन अनजाने में उन्होंने एक ऐसी बहस को फिर हवा दे दी जो शायद थमने लगी थी।

अगर Dhurandhar, Kerala Story और Kashmir Files — तीनों सच में सिर्फ कला थीं — तो उन्हें किसी चुनावी भाषण की ज़रूरत नहीं थी। Lagaan को नहीं पड़ी, Taare Zameen Par को नहीं पड़ी। लेकिन इन तीनों को पड़ी — और यही सबसे बड़ा सवाल है।

जब कोई फिल्म सत्ता की भाषा बोले, सत्ता के दुश्मनों को खलनायक दिखाए, और सत्ता उसका बचाव करे — तो उसे प्रोपगैंडा न कहें तो क्या कहें?

दूसरा पक्ष भी सुनिए

यह भी सच है कि विपक्ष ने इन फिल्मों का विरोध कई बार तथ्यों से नहीं, बल्कि राजनीतिक स्वार्थ से किया। The Kashmir Files में दिखाई गई पीड़ा एक ऐतिहासिक सच्चाई है, जिसे दशकों तक नज़रअंदाज़ किया गया। Dhurandhar एक real hijack पर आधारित है। इन्हें पूरी तरह “झूठ” कहना भी उतना ही गलत है।

सवाल यह नहीं कि ये फिल्में पूरी तरह झूठी हैं। सवाल यह है कि किस सच को चुना गया, कैसे दिखाया गया, कब दिखाया गया, और किसके फायदे के लिए दिखाया गया।

PM मोदी के इस भाषण ने अनजाने में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिन फिल्मों को “कला” और “सच्चाई” कहा जा रहा था, उनका बचाव अब एक चुनावी मंच पर हो रहा है। यह न तो फिल्मों के लिए अच्छा है, न लोकतंत्र के लिए। दर्शक को खुद तय करना होगा — वह सिनेमाघर में कला देखने गया था, या किसी की राजनीतिक कहानी सुनने।

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