भारत के वे गाँव जहाँ महिलाएँ ही पूरा शासन संभालती हैं: एक अनोखी सामाजिक व्यवस्था की सच्ची कहानी Hindi News, November 17, 2025November 17, 2025 भारत में पंचायत राज व्यवस्था अक्सर पुरुष प्रधान देखी जाती है, लेकिन देश में कुछ ऐसे गाँव भी हैं जहाँ शासन और निर्णय लेने की पूरी शक्ति महिलाओं के हाथ में है। यह कहानियाँ सिर्फ प्रेरणा नहीं, बल्कि समाज में बदलाव का एक ज़बरदस्त उदाहरण भी हैं। इन गाँवों में महिलाएँ गाँव की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, विकास, सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों का पूरा नेतृत्व संभालती हैं। इनका मॉडल आज पूरे देश के लिए सीख है। तो आईये जानते हैं महिलाओं द्वारा संचालित गाँव कौन कौन से हैं। महिलाओं द्वारा संचालित गाँव: एक अनदेखी लेकिन सशक्त कहानी भारत के कई हिस्सों में महिलाओं का नेतृत्व बढ़ा है, लेकिन कुछ गाँव ऐसे भी हैं जहाँ महिलाओं की परिषद, पंचायत और समितियाँ वर्षों से सक्रिय हैं। इन गाँवों में पुरुष केवल सहायक भूमिका निभाते हैं जबकि मुख्य नीतियाँ और फैसले महिलाएँ लेती हैं। 1. मेघालय के मातृसत्तात्मक गाँव: जहाँ वंश और विरासत महिलाओं से चलती है मेघालय के खासकर खासी और जयंतिया समुदाय में महिलाएँ समाज की सबसे बड़ी स्तंभ मानी जाती हैं।यहाँ की खास विशेषताएँ: परिवार की संपत्ति बेटी को विरासत में मिलती है।घर की मुखिया महिला होती है।विवाह के बाद पति पत्नी के घर रहता है।पंचायत का नेतृत्व महिलाओं के हाथ में रहता है। यह मॉडल स्थिर सामाजिक ढांचे और पारिवारिक संतुलन का एक अनूठा उदाहरण है। 2. नागालैंड के वो गाँव जहाँ महिलाएँ आर्थिक फैसले लेती हैं नागालैंड के कई जनजातीय गाँवों में महिला समितियाँ इतनी मजबूत हैं कि गाँव के बड़े आर्थिक फैसले भी वे स्वयं करती हैं।इन समितियों के काम: बाजार व्यवस्था नियंत्रित करनाकृषि के फैसले लेनावित्तीय योजना बनानाउत्पादन और व्यापार तय करना इन क्षेत्रों में पुरुषों की भूमिका सलाहकार तक सीमित रहती है। 3. केरल के कुछ गाँव: पंचायत में महिलाओं की 100 प्रतिशत भागीदारी केरल में महिला पंचायत प्रतिनिधियों का प्रभाव इतना मजबूत है कि कुछ गाँवों में पूरा प्रशासन महिलाओं द्वारा चलाया जाता है।वे: स्वास्थ्य योजनाएँ लागू करती हैंस्कूलों और एंगलवाड़ी की निगरानी करती हैंसाफ-सफाई और जल प्रबंधन पर सख्त नियंत्रण रखती हैं इन गाँवों में महिलाओं का प्रशासनिक मॉडल सबसे सफल माना जाता है क्योंकि यहाँ भ्रष्टाचार बेहद कम है और विकास तेज गति से होता है। 4. राजस्थान के कुछ गाँव: महिलाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मॉडल राजस्थान के कई ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की सामूहिक समितियों ने गाँव का प्रशासन अपने हाथ में लिया है।इन समितियों की ताकत: शराबबंदी लागू करानालड़कियों की शिक्षा को अनिवार्य करनाघरेलू हिंसा पर सख्त कार्रवाईजल संरक्षण से लेकर कृषि तक हर फैसले में नेतृत्व यह मॉडल ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाते हुए पूरे समाज में बदलाव ला रहा है। 5. उत्तराखंड का ‘द वीमेन विलेज’ – बराड़ी गाँव: महिलाओं की अनोखी पहल का जीवंत उदाहरण उत्तराखंड का बराड़ी गाँव आज पूरे देश में “द वीमेन विलेज” के नाम से जाना जाता है। यह गाँव इसलिए खास है क्योंकि यहाँ महिलाओं ने न सिर्फ घर-परिवार संभाला, बल्कि गाँव का प्रशासन, अर्थव्यवस्था और सामाजिक प्रबंधन भी अपने हाथों में लिया है। बराड़ी गाँव में वर्षों से महिलाएँ सामुदायिक फैसलों में प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने गाँव में साफ-सफाई, जल प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य और पौधारोपण जैसी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया है। इस गाँव की महिला समितियाँ: विकास की हर योजना की रूपरेखा तय करती हैंगाँव में होने वाले खर्चों पर निगरानी रखती हैंसामाजिक समस्याओं का समाधान सामूहिक रूप से करती हैंपर्यावरण संरक्षण को सबसे ऊपर प्राथमिकता देती हैं बराड़ी गाँव की महिलाएँ आत्मनिर्भरता और नेतृत्व का ऐसा मॉडल प्रस्तुत करती हैं जो पूरे उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि भारत के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यही वजह है कि इस गाँव को आधिकारिक तौर पर “द वीमेन विलेज” कहा जाने लगा है। क्यों खास हैं ये महिलाएँ चलाए गाँव? इन गाँवों की सबसे बड़ी विशेषताएँ: फैसले बिना दबाव, पारदर्शी तरीके से लिए जाते हैंविकास योजनाएँ ज़मीनी स्तर पर लागू होती हैंभ्रष्टाचार और पक्षपात कमसमाज में महिलाओं और लड़कियों के अधिकार सुरक्षितशिक्षा और स्वास्थ्य पर अत्यधिक ध्यान जहाँ निर्णय महिलाएँ लेती हैं, वहाँ परिवार से लेकर समाज तक सकारात्मक बदलाव तेज़ी से दिखता है। समाज के लिए प्रेरणा: महिला-नेतृत्व वाले गाँवों का बढ़ता प्रभाव भारत में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के साथ इन गाँवों की संख्या भी बढ़ रही है।इन गाँवों ने साबित किया है कि: नेतृत्व क्षमता किसी लिंग की मोहताज नहीं होतीजब महिलाएँ प्रशासन संभालती हैं, तो समाज में संतुलन, सुरक्षा और विकास का स्तर बढ़ जाता हैग्रामीण समाज में बदलाव तब गहरा होता है जब महिलाओं की आवाज़ सीधे फैसलों में शामिल होती है जलवायु संकट की असली योद्धा: गरीब और जनजातीय महिलाएं प्रकृति बचाने की अग्रिम पंक्ति में Facts Information