लेह, 26 सितंबर 2025 – लद्दाख में पिछले कुछ महीनों से simmer कर रहे विरोध प्रदर्शनों ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। सोमवार को लेह शहर और आसपास के इलाकों में स्थानीय संगठनों और युवाओं द्वारा राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर रैली निकाली गई। यह रैली शुरुआत में शांतिपूर्ण थी, लेकिन कुछ घंटों बाद हालात बेकाबू हो गए और प्रदर्शन हिंसक रूप ले बैठा।
क्यों भड़का आक्रोश?
2019 में अनुच्छेद 370 हटने और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। तब लोगों को उम्मीद थी कि इससे विकास और प्रशासनिक स्वतंत्रता बढ़ेगी। लेकिन समय बीतने के साथ स्थानीय समुदायों ने महसूस किया कि उन्हें न तो पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला और न ही भूमि और रोजगार पर संवैधानिक सुरक्षा।
इसी असंतोष ने हाल के महीनों में “राज्य का दर्जा” और “छठी अनुसूची” की मांग को जन आंदोलन का रूप दे दिया।
प्रदर्शन कैसे बिगड़ा?
सोमवार को हजारों लोग लेह की सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने बैनर और नारेबाज़ी करते हुए अपनी मांगें रखीं। दोपहर के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें शुरू हुईं। कुछ इलाकों में पथराव और आगज़नी हुई। बताया जा रहा है कि पुलिस ने भीड़ को काबू में करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया, जिसके बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए।
इस दौरान गोली चलने की घटनाएँ भी सामने आईं, जिनमें कम से कम चार लोगों की मौत और दर्जनों घायल हुए।
प्रशासनिक कार्रवाई
स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए जिला प्रशासन ने लेह और आसपास के इलाकों में कर्फ्यू लागू कर दिया है। इंटरनेट सेवाएँ अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं और सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगा दी गई है। पुलिस ने अब तक करीब 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है, जिन पर हिंसा भड़काने का आरोप है।
कांग्रेस पार्षद सोनम वांगचुक के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई है, जबकि सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है।
लद्दाख की जनता की मुख्य माँगें
लेह-लद्दाख के लोग लंबे समय से अपनी पहचान और अधिकारों को लेकर आवाज़ उठा रहे हैं। इस बार के आंदोलन में उनकी कुछ प्रमुख माँगें साफ़ तौर पर सामने आई हैं:
- राज्य का दर्जा (Statehood):
जनता चाहती है कि लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बजाय राज्य का दर्जा दिया जाए, ताकि उन्हें अपनी ज़मीन, संसाधनों और संस्कृति पर पूरा नियंत्रण मिल सके। - छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करना:
लद्दाखी लोगों की यह बड़ी माँग है कि उन्हें संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए। इससे उन्हें जनजातीय और सांस्कृतिक पहचान की कानूनी सुरक्षा मिलेगी। - स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार और आरक्षण:
आंदोलनकारियों का कहना है कि लद्दाख के युवाओं को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता और आरक्षण दिया जाए। - पर्यावरण और ज़मीन की सुरक्षा:
लद्दाख संवेदनशील पारिस्थितिकी वाला इलाका है। लोग चाहते हैं कि बाहरी लोगों द्वारा ज़मीन की खरीद-फरोख़्त पर रोक लगे और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। - स्थानीय स्वशासन (Autonomous Council) को मज़बूत करना:
हिल डेवलपमेंट काउंसिल को अधिक अधिकार देकर जनता की भागीदारी बढ़ाने की भी माँग है।
लोगों की पीड़ा और चिंता
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे लंबे समय से शांति और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठा रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी आवाज़ को गंभीरता से नहीं सुना। उनका मानना है कि लद्दाख की विशिष्ट संस्कृति, पर्यावरण और रोजगार के अवसर तभी सुरक्षित रह सकते हैं जब उन्हें संवैधानिक गारंटी मिले।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम सिर्फ अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। यह हमारी जमीन और हमारी पहचान का सवाल है।
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