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लद्दाख आंदोलन: सोनम वांगचुक की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा — अब तक की पूरी कहानी (अपडेटेड, 14 अक्टूबर 2025)

लद्दाख इन दिनों देश की सुर्खियों में है। वजह है राज्य के दर्जे और स्थानीय स्वायत्तता की मांग, जिसके लिए पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में बड़ा आंदोलन चल रहा है। सितंबर के आख़िरी हफ्ते में यह आंदोलन हिंसक हो गया और अब हालात पर पूरे देश की नज़र है।

सुप्रीम कोर्ट में लेह डीएम का हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में लेह के जिलाधिकारी (डीएम) ने कहा है कि सोनम वांगचुक राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और आवश्यक सेवाओं के रखरखाव को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में शामिल थे।
इसी कारण उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया।
डीएम ने यह भी कहा कि वांगचुक को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार नहीं किया गया और न ही उन्हें हिरासत में किसी तरह की प्रताड़ना दी जा रही है।

वांगचुक पक्ष का तर्क

वहीं, सोनम वांगचुक के वकीलों का कहना है कि यह गिरफ्तारी पूरी तरह राजनीतिक और मनमानी है। उन्होंने अदालत से वांगचुक की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अहिंसा और संविधान के दायरे में रहकर आंदोलन किया है।

अदालत की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश डी. वाय. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि “लोकतंत्र में असहमति को अपराध नहीं माना जा सकता।”
अदालत ने केंद्र और लद्दाख प्रशासन को 17 अक्टूबर तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

आंदोलन की वर्तमान स्थिति

लेह और करगिल में अभी भी शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है। इंटरनेट सेवाएँ सीमित हैं, लेकिन लोग अब भी “वांगचुक को रिहा करो” के नारे लगा रहे हैं।
लद्दाख की जनता की मुख्य मांगें अब भी वही हैं — राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची में शामिल करना और गोलीकांड की न्यायिक जांच।

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