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IPS वाई. पूरन कुमार की रहस्यमयी मौत_ आत्महत्या या सिस्टम की साजिश_

आईपीएस वाई. पूरन कुमार की रहस्यमयी मौत: एक ईमानदार अधिकारी की चुप्पी ने खोले सिस्टम के काले सच

Hindi News, October 16, 2025October 16, 2025

1. घटना जिसने पूरे देश को हिला दिया

हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की मौत ने पूरे पुलिस महकमे को झकझोर दिया है।
7 अक्टूबर की सुबह, चंडीगढ़ स्थित उनके सरकारी आवास में उनका शव संदिग्ध हालात में पाया गया। शुरुआती जांच में कहा गया कि उन्होंने खुद को गोली मारी।
उनके पास से नौ पन्नों का एक सुसाइड नोट और एक कथित वसीयत भी बरामद हुई।

इस नोट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए — जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों पर मानसिक प्रताड़ना, भेदभाव, और दबाव डालने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

2. सुसाइड नोट में क्या लिखा था?

पूरन कुमार ने अपने सुसाइड नोट में विस्तार से बताया कि उन्हें प्रशासनिक दबावों, अनुचित ट्रांसफर, और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
उन्होंने लिखा कि उनकी निष्ठा और कार्यशैली को बार-बार चुनौती दी जा रही थी।
नोट में उन्होंने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी उल्लेखित किए हैं, जिन पर उन्होंने आरोप लगाया कि वे उन्हें बार-बार नीचा दिखाने की कोशिश करते थे।

इस सुसाइड नोट के सार्वजनिक होने के बाद हरियाणा पुलिस और प्रशासनिक तंत्र में खलबली मच गई।

3. मौत के बाद जांच और विवाद

घटना के बाद तुरंत जांच शुरू हुई, लेकिन पोस्टमार्टम प्रक्रिया में देरी ने कई सवाल खड़े कर दिए।
पूरन कुमार की पत्नी, जो खुद एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं, ने पहले पोस्टमार्टम की अनुमति नहीं दी थी।
करीब आठ दिन बाद अनुमति मिलने के बाद चंडीगढ़ के एक बड़े मेडिकल संस्थान में पोस्टमार्टम हुआ।

परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि मामले की जांच में जानबूझकर ढिलाई बरती जा रही है, और जिन लोगों के नाम सुसाइड नोट में हैं, उन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

4. राजनीतिक दबाव और बढ़ती मांगें

पूरन कुमार की मौत के बाद राज्यभर में आक्रोश फैल गया।
पुलिस विभाग के साथ-साथ राजनीतिक दलों ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की।
कई संगठनों ने कहा कि यह घटना दिखाती है कि सिस्टम के अंदर भी भ्रष्टाचार, भेदभाव और सत्ता का दुरुपयोग कितना गहरा है।

परिवार की मांग है कि इस केस की CBI जांच कराई जाए, ताकि असली दोषियों को सजा मिले।

5. क्या यह सिर्फ आत्महत्या थी या कुछ और?

पूरन कुमार का केस सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि कई अनसुलझे सवालों का पुलिंदा बन चुका है।
सवाल उठ रहे हैं —

  • क्या उन्हें वाकई मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया?
  • क्या किसी ने उन्हें ऐसा कदम उठाने को मजबूर किया?
  • क्या सुसाइड नोट में लिखी बातें पूरी तरह सच हैं, या उनके पीछे कोई और कहानी छिपी है?

इन सवालों का जवाब फिलहाल जांच के नतीजों पर निर्भर करेगा, लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने पुलिस तंत्र की पारदर्शिता और कार्यसंस्कृति पर गहरे सवाल खड़े किए हैं।

6. नया मोड़: एक और अधिकारी की संदिग्ध मौत

पूरन कुमार की मौत के कुछ दिनों बाद, उनके विभाग से जुड़े एक अन्य अधिकारी की भी संदिग्ध आत्महत्या की खबर आई।
उस अधिकारी ने अपने आखिरी संदेश में कुछ ऐसे संकेत छोड़े, जिससे मामला और पेचीदा हो गया।
कहा जा रहा है कि उन्होंने भी विभागीय दबाव और भ्रष्टाचार के आरोपों का जिक्र किया था।

इससे यह शक और गहराया कि पूरन कुमार का केस शायद सिर्फ व्यक्तिगत नहीं था — बल्कि यह सिस्टम के भीतर चल रहे गहरे खेल का हिस्सा हो सकता है।

7. सिस्टम के लिए एक आईना

पूरन कुमार का मामला इस बात का प्रतीक बन गया है कि जब एक ईमानदार अधिकारी भी सिस्टम से लड़ने की कोशिश करता है, तो उसे किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
यह घटना न सिर्फ हरियाणा, बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि मानसिक स्वास्थ्य, पारदर्शिता और न्यायिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को अब अनदेखा नहीं किया जा सकता।

8. परिवार की आवाज़ और समाज की उम्मीद

पूरन कुमार की पत्नी और बेटियों ने सरकार से गुहार लगाई है कि जांच निष्पक्ष हो और दोषियों को सजा मिले।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ उनके पति के लिए नहीं, बल्कि हर उस ईमानदार अधिकारी के लिए है जो सच बोलने की हिम्मत रखता है।

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