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हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2025 में भारत 85वें नंबर पर

भारत का पासपोर्ट फिसला नीचे — हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2025 में भारत 85वें नंबर पर, जानिए क्यों गिर रही रैंकिंग

Laxmi Nautiyal, October 17, 2025October 17, 2025

हर साल हेनले पासपोर्ट इंडेक्स बताता है कि कौन-से देश के नागरिक बिना वीज़ा के कितने देशों में जा सकते हैं। इसे पासपोर्ट की “ताकत” भी कहा जाता है।
2025 की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का पासपोर्ट अब 85वें स्थान पर पहुंच गया है। पिछले साल भारत 80वें स्थान पर था, यानी रैंकिंग में फिर गिरावट आई है।

भारत के नागरिक फिलहाल सिर्फ 57 देशों में ही बिना वीज़ा या ऑन-अराइवल वीज़ा के साथ यात्रा कर सकते हैं। इसके मुकाबले जापान, सिंगापुर और फ्रांस जैसे देशों के नागरिक 190 से अधिक देशों में बिना वीज़ा जा सकते हैं।

हेनले पासपोर्ट इंडेक्स क्या है?

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स दुनिया का एक ग्लोबल रैंकिंग सिस्टम है, जिसे हर साल हेनले एंड पार्टनर्स कंपनी तैयार करती है।
इसमें यह देखा जाता है कि किसी देश के नागरिक कितने देशों में बिना वीज़ा या ऑन-अराइवल वीज़ा से जा सकते हैं।
यह डेटा अंतरराष्ट्रीय एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) से लिया जाता है, जो दुनियाभर की वीज़ा नीतियों पर नज़र रखती है।

भारत की रैंक नीचे क्यों गई?

भारत की रैंकिंग घटने के पीछे कुछ मुख्य कारण हैं –

  1. कम वीज़ा-फ्री देश: भारतीय पासपोर्ट पर केवल 57 देशों में ही बिना वीज़ा यात्रा की सुविधा है।
  2. सीमित कूटनीतिक समझौते: भारत ने अभी बहुत कम देशों के साथ वीज़ा वेवर एग्रीमेंट किए हैं।
  3. सुरक्षा जांच और प्रक्रियाएँ: कई देश भारतीय यात्रियों के लिए वीज़ा नीति सख्त रखते हैं।
  4. धीमी विदेश नीति: जापान, सिंगापुर जैसे देशों की तुलना में भारत की कूटनीतिक गति अभी थोड़ी धीमी है।

पहले स्थान पर कौन-कौन देश हैं?

2025 की रिपोर्ट में पहले स्थान पर जापान, सिंगापुर और फ्रांस हैं।
इन देशों के नागरिकों को 190 से ज्यादा देशों में बिना वीज़ा यात्रा की सुविधा है।
दूसरे स्थान पर जर्मनी और स्पेन हैं, जबकि तीसरे पर दक्षिण कोरिया, फिनलैंड और इटली हैं।
इन देशों की रैंकिंग ऊँची इसलिए है क्योंकि इनके दूसरे देशों से बेहतर कूटनीतिक रिश्ते और आर्थिक स्थिरता है।

भारत के लिए इसका क्या मतलब है?

भारत की रैंकिंग गिरने का मतलब यह नहीं कि भारत पीछे रह गया है, बल्कि यह दिखाता है कि अभी सुधार की काफी गुंजाइश है।
सरकार अगर विदेश नीति, आर्थिक सहयोग और पर्यटन से जुड़े समझौते और मज़बूत करे, तो भारत का पासपोर्ट आने वाले सालों में फिर ऊपर जा सकता है।
हाल के वर्षों में भारत ने कई देशों से ई-वीज़ा और ऑन-अराइवल वीज़ा की सुविधा भी शुरू की है, जो एक अच्छा कदम है।

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स किसी देश की वैश्विक साख को दर्शाता है।
भारत को अब अपने कूटनीतिक रिश्तों और भरोसे को मज़बूत बनाना होगा, ताकि आने वाले सालों में भारतीय पासपोर्ट दुनिया के टॉप 50 पासपोर्ट्स की सूची में जगह बना सके।

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