Skip to content
Thehindinews
Thehindinews

  • Home
  • News Article
  • Story
  • Information
  • blog
  • Life Style
Thehindinews
Thehindinews

हनुमानगढ़ में इथेनॉल फैक्ट्री पर बवाल_ किसानों ने 16 वाहन फूंके, विधायक घायल

हनुमानगढ़ में बवाल: इथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में किसानों का उग्र प्रदर्शन, 16 वाहन फूंके; लाठीचार्ज में विधायक घायल

Hindi News, December 11, 2025December 11, 2025

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के राठीखेड़ा गाँव में बुधवार शाम को इथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में चल रहा किसान आंदोलन अचानक हिंसक हो गया। किसानों ने निर्माणाधीन फैक्ट्री की दीवार तोड़कर अंदर प्रवेश किया और वहां मौजूद लगभग 16 वाहनों को आग के हवाले कर दिया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

कैसे भड़का विवाद

किसानों का आरोप है कि इलाके में बनाई जा रही इथेनॉल फैक्ट्री से भू-जल स्तर गिरने, मिट्टी खराब होने और पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने का खतरा है। वे लंबे समय से फैक्ट्री के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उनकी मांगें पूरी नहीं होने के कारण गुस्सा भड़क गया।

सुबह शांतिपूर्ण विरोध के रूप में शुरू हुई रैली दोपहर बाद उग्र हो गई। किसान ट्रैक्टरों के साथ फैक्ट्री की ओर बढ़े, बैरिकेड हटाए और परिसर में घुसकर तोड़फोड़ शुरू कर दी।

हिंसा और पुलिस कार्रवाई

फैक्ट्री परिसर में घुसने के बाद भीड़ ने वाहनों, मशीनों और कई निर्माण सामग्री में आग लगा दी। स्थिति काबू से बाहर होती देखकर पुलिस ने बल प्रयोग किया। लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच झड़पें और तेज हो गईं।

इस दौरान एक कांग्रेस विधायक भी घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए हैं।

प्रशासन का रुख कड़ा

हिंसा के बाद पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। इंटरनेट सेवाएँ अस्थायी रूप से बंद कर दी गईं ताकि अफवाहें न फैलें। प्रशासन ने फैक्ट्री निर्माण कार्य रोक दिया है और किसानों से बातचीत शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

किसानों का कहना है कि वे पर्यावरण और खेती पर असर डालने वाली किसी भी परियोजना को स्वीकार नहीं करेंगे। वे फैक्ट्री को बंद करने और पर्यावरणीय मूल्यांकन की पारदर्शी रिपोर्ट की मांग पर अड़े हैं।

हनुमानगढ़ की घटना विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन को लेकर जारी संघर्ष का एक और उदाहरण है। जब स्थानीय लोगों की चिंताओं को समय पर नहीं सुना जाता, तो विवाद तेजी से हिंसा का रूप ले लेता है। अब पूरा मामला प्रशासन, किसानों और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा, जिससे इलाके में शांति बहाल की जा सके।

संसद में वंदे मातरम् पर बड़ी बहस: कौन क्या बोला और कब हुई चर्चा

News Article

Post navigation

Previous post
Next post

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • अंकिता भंडारी की मौत: क्या इंसाफ पूरा हुआ या सच अब भी छिपा है?
  • दंतेवाड़ा में 63 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण: बस्तर में शांति की ओर एक बड़ा कदम
  • ट्रंप-मोदी रिश्ते: कहीं नाराज़गी, कहीं तारीफ़ — असल सच क्या है?
  • भारत की राजनीति क्यों हमेशा इतिहास में उलझी रहती है?
  • सकट चौथ व्रत: संतान सुख और संकटों से रक्षा का पावन पर्व

Advertisement

social link

  • Facebook
  • अंकिता भंडारी की मौत: क्या इंसाफ पूरा हुआ या सच अब भी छिपा है?
  • दंतेवाड़ा में 63 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण: बस्तर में शांति की ओर एक बड़ा कदम
  • ट्रंप-मोदी रिश्ते: कहीं नाराज़गी, कहीं तारीफ़ — असल सच क्या है?
  • भारत की राजनीति क्यों हमेशा इतिहास में उलझी रहती है?
  • सकट चौथ व्रत: संतान सुख और संकटों से रक्षा का पावन पर्व

Advertisement




©2026 Thehindinews | WordPress Theme by SuperbThemes
Go to mobile version