GDP बढ़ी, पर जेब खाली ही रह गई: आखिर आम आदमी तक क्यों नहीं पहुँचता विकास? Hindi News, November 29, 2025November 29, 2025 भारत की अर्थव्यवस्था आज कागज़ पर बेहद मजबूत दिखाई देती है। रिपोर्ट्स, ग्राफ़ और आंकड़े बताते हैं कि देश की GDP तेज़ रफ़्तार से बढ़ रही है। लेकिन आम लोगों का कहना है कि यह बस ऊपर-ऊपर चमकदार है , नीचे असलियत काफी कमजोर है। विकास के ये बड़े आंकड़े आम इंसान के रोज़मर्रा के जीवन में दिखाई नहीं देते। महंगाई बढ़ रही है, नौकरियाँ सीमित हैं और छोटे व्यापार पहले की तरह टिक नहीं पा रहे। GDP बढ़ रही है, लेकिन आम आदमी की जेब क्यों खाली है? अर्थव्यवस्था का विकास कई बार सिर्फ आंकड़ों में अच्छा दिखता है। बड़े उद्योगों की कमाई बढ़ती हैविदेशी निवेश आता हैGDP की ग्रोथ दिखाई देती है लेकिन इसी के बीच— रोज़गार स्थिर नहींवेतन नहीं बढ़ रहायुवा लगातार संघर्ष कर रहेछोटे दुकानदार और व्यापारी दबाव में हैं इस वजह से आम लोगों को वह विकास महसूस नहीं होता, जिसकी तस्वीर GDP दिखाती है। अमीर और गरीब का अंतर तेज़ी से क्यों बढ़ रहा है? भारत में आर्थिक असमानता लगातार गहरी होती जा रही है। अमीरों के पास पूँजी, तकनीक और बड़े अवसर हैंगरीब और मध्यम वर्ग के पास सीमित आय और बढ़ता खर्च नतीजा यह है किअमीर और अमीर, और गरीब और गरीब होता जा रहा है। GDP चाहे जितनी भी बढ़ जाए, जब तक उसकी गर्मी नीचे के लोगों तक नहीं पहुँचेगी, असमानता खत्म नहीं होगी। ग्राउंड लेवल की सच्चाई क्यों छिप जाती है? सरकार और बड़े संगठन आमतौर पर वही आंकड़े दिखाते हैं जो अर्थव्यवस्था को चमकदार बनाते हैं।लेकिन असल हालात— शहरों में नौकरी की कमीगांवों में मंदीछोटे व्यापारियों पर बोझबढ़ती महंगाई इन सबकी तस्वीर कभी उतनी साफ़ सामने नहीं आती। सच्चा विकास कैसा होना चाहिए? भारत के लिए ज़रूरी है कि विकास सिर्फ GDP के चार्ट में नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी में भी दिखे। इसके लिए— गुणवत्तापूर्ण नौकरियाँछोटे उद्योगों को समर्थनकौशल और शिक्षा में सुधारग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करनाऔर आम आदमी की आय बढ़ाना ये कदम वाकई बदलाव ला सकते हैं। भारत की अर्थव्यवस्था में आगे बढ़ने की बहुत क्षमता है, लेकिन इसकी असली सफलता तब होगी जब GDP की चमक आम इंसान की जिंदगी में भी रोशनी लाए। आज जरूरत इस बात की है कि विकास कागज़ पर नहीं, जमीन पर दिखे। Information News Article