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Global Forest Fund_ वनों की रक्षा के लिए नया कदम

Global Climate Summit 2025: वनों की रक्षा के लिए प्रस्तावित ‘फॉरेस्ट फंड’, भारत कैसे निभा सकता है अहम भूमिका

Hindi News, November 7, 2025November 7, 2025

ब्राज़ील के बेलें (Belém) शहर में जल्द ही होने वाला ग्लोबल क्लाइमेट समिट 2025 या COP30 पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है।
यह सम्मेलन 10 नवंबर से 21 नवंबर 2025 के बीच आयोजित होने वाला है, जिसमें विश्व के लगभग 200 देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।
इस समिट से पहले ही एक महत्वपूर्ण पहल की चर्चा जोरों पर है — एक नया अंतरराष्ट्रीय फंड, जिसका नाम है “Tropical Forest Forever Facility (TFFF)” या साधारण भाषा में “फॉरेस्ट फंड”।

फॉरेस्ट फंड क्या है?

यह प्रस्तावित फंड उन देशों की मदद के लिए बनाया जा रहा है जो अपने वन क्षेत्रों की रक्षा करते हैं और उन्हें काटने से बचाते हैं।
इस फंड के तहत, देशों को आर्थिक प्रोत्साहन (Incentive) दिया जाएगा ताकि वे वन संरक्षण और कार्बन अवशोषण पर ज़्यादा काम कर सकें।
यह पूरी पहल इस विचार पर आधारित है कि अगर वनों को बचाया जाए तो यह जलवायु परिवर्तन की गति को काफी हद तक कम कर सकता है।

आधिकारिक वेबसाइट और प्री-इवेंट घोषणाएँ

हालांकि यह समिट अभी शुरू नहीं हुआ है, लेकिन इससे जुड़ी कई घोषणाएँ और नीतिगत प्रस्ताव पहले ही आधिकारिक वेबसाइट cop30.br और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साझा किए जा चुके हैं।
इन्हीं प्री-इवेंट घोषणाओं में बताया गया है कि 53 देशों ने इस प्रस्तावित फंड को समर्थन देने की सहमति दी है।
इनमें प्रमुख देश हैं — ब्राज़ील, नॉर्वे, फ्रांस, इंडोनेशिया, पुर्तगाल, जर्मनी और कई अन्य।
औपचारिक घोषणा COP30 सम्मेलन के दौरान ही की जाएगी, यानी यह पहल अभी तैयारी के चरण में है।

भारत की संभावित भूमिका

भारत ने अब तक इस फंड में कोई औपचारिक वित्तीय घोषणा नहीं की है,
लेकिन भारत का पर्यावरण संरक्षण में रिकॉर्ड मज़बूत रहा है।
भारत पहले से ही ग्रीन इंडिया मिशन, राष्ट्रीय हरित अभियान और वन महोत्सव जैसी योजनाओं के ज़रिए जंगलों को बचाने के लिए काम कर रहा है।
भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक 2.5 से 3 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड को हरित क्षेत्रों के माध्यम से अवशोषित किया जाए।
इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि भारत भविष्य में इस वैश्विक फंड में नीतिगत और तकनीकी योगदान देकर अहम भूमिका निभा सकता है।

भारत के लिए अवसर क्या हैं?

  1. भारत की कुल भूमि का लगभग 21% भाग वन क्षेत्र में आता है, जिससे उसे इस फंड के तहत विशेष लाभ मिल सकता है।
  2. भारत अपने कार्बन क्रेडिट बाजार (Carbon Credit Market) को विकसित कर आर्थिक अवसर बढ़ा सकता है।
  3. भारत दक्षिण एशिया के देशों के लिए ग्रीन टेक्नोलॉजी का केंद्र बन सकता है।

ग्लोबल क्लाइमेट समिट 2025 सिर्फ नीतियों की बैठक नहीं, बल्कि यह धरती के भविष्य के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
“फॉरेस्ट फंड” जैसी पहलें बताती हैं कि दुनिया अब पर्यावरण को आर्थिक मूल्य देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
भारत के पास इस दिशा में न केवल अनुभव है बल्कि क्षमता भी है,
और अगर भारत इसमें सक्रिय भूमिका निभाता है, तो यह वैश्विक हरित विकास (Green Growth) की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

भारत में क्लाइमेट चेंज: यह सबसे बड़ा मुद्दा क्यों होना चाहिए और इस पर चर्चा क्यों कम होती है

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