हैदराबाद में Earth Summit की शुरुआत: खेती, जलवायु और ग्रामीण नवाचार पर वैश्विक मंथन Hindi News, November 21, 2025November 21, 2025 हैदराबाद अर्थ समिट 2025 का Earth Summit भव्य रूप से शुरू हुआ, जिसमें देश-विदेश के वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, कृषि विशेषज्ञ और पर्यावरण कार्यकर्ता शामिल हुए। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नए समाधान तलाशना और ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ विकास की राह बनाना है। खेती में नई तकनीक और बदलाव पर फोकस सम्मेलन में कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि बदलते मौसम और कम होती उपज के बीच किसानों को नई तकनीक, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और स्मार्ट खेती की आवश्यकता है।चर्चा में ये मुख्य बिंदु शामिल रहे: सूखे और बाढ़ जैसे चरम मौसम से निपटने के उपायड्रोन, एआई और सेंसर आधारित खेतीजैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षणपानी बचाने वाली माइक्रो-इरिगेशन तकनीकें क्लाइमेट एक्शन: तुरंत कदम उठाने की जरूरत Earth Summit का दूसरा बड़ा फोकस जलवायु परिवर्तन रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे खाद्य सुरक्षा, जल सुरक्षा और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे हैं।समाधानों में शामिल हैं: उद्योगों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करनानवीकरणीय ऊर्जा का विस्तारशहरों में हरित योजनाओं को बढ़ावाजलवायु न्याय और संवेदनशील समुदायों की सुरक्षा ग्रामीण इनोवेशन से विकास को गति सम्मेलन में ग्रामीण नवाचार को भविष्य का आधार बताया गया।कुछ प्रमुख बिंदु: गांवों में डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने की जरूरतग्रामीण युवाओं के लिए स्टार्ट-अप मॉडलस्थानीय संसाधनों पर आधारित छोटे उद्योगरोजगार पैदा करने वाली तकनीकी परियोजनाएँ ये इनोवेशन न सिर्फ गांवों को मजबूत बनाएंगे, बल्कि जलवायु संकट के बीच टिकाऊ विकास का रास्ता भी दिखाएंगे। भारत की भूमिका और वैश्विक उम्मीदें Earth Summit में भारत को वैश्विक समाधान के एक प्रमुख भागीदार के रूप में देखा जा रहा है।भारत की प्रमुख पहलें: नवीकरणीय ऊर्जा में तेजी से विस्तारजीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के प्रयासखेती को स्मार्ट और टिकाऊ बनाने की योजनाएँग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नए मॉडल हैदराबाद अर्थ समिट 2025 सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए ठोस रणनीति बनाने का मंच है। जलवायु परिवर्तन, कृषि संकट और ग्रामीण चुनौतियों को देखते हुए यह सम्मेलन समय की बड़ी जरूरत साबित हो रहा है। भारत की जलवायु रैंकिंग में बड़ी गिरावट: पर्यावरण नीतियों पर उठे सवाल News Article