दिल्ली की हवा ज़हर से भी ख़तरनाक: सरकारी बोर्ड पर 450 दिखा, लेकिन असली AQI 700 पार Hindi News, November 7, 2025November 7, 2025 दिल्ली में प्रदूषण से हाहाकार दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी बोर्डों पर जहाँ AQI 450 के आसपास दिखाया जा रहा है, वहीं स्वतंत्र पर्यावरण एजेंसियों के अनुसार कई इलाकों में वास्तविक AQI 700 से भी ऊपर दर्ज किया गया है।यह स्तर “अत्यंत खतरनाक” श्रेणी में आता है, जो न केवल बीमार लोगों बल्कि सामान्य नागरिकों के लिए भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। कम AQI दिखाने पर सवाल स्थानीय निवासियों का कहना है कि ट्रकों से लगातार पानी का छिड़काव और सफाई के कारण AQI अस्थायी रूप से घटता है, जिससे सरकारी बोर्डों पर प्रदूषण का स्तर कम दिखता है।पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल सतही सुधार है, क्योंकि हवा में मौजूद जहरीले तत्व (PM 2.5 और PM 10) वैसे ही बने रहते हैं। अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों जैसे एम्स, सफदरजंग और जीटीबी में साँस और एलर्जी से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या में भारी इज़ाफ़ा हुआ है।डॉक्टरों के अनुसार, बीते एक सप्ताह में ऐसे मामलों में लगभग 40 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।बच्चे और बुज़ुर्ग सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जबकि अस्थमा और दिल के मरीज़ों की हालत और बिगड़ रही है। मौतों के आंकड़े भी चिंताजनक स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदूषण से जुड़ी समयपूर्व मौतों में इस साल करीब 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर बढ़ सकती है। दिल्ली इतना दमघोंटू क्यों हुआ? पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने के मामलों में बढ़ोतरीट्रैफिक और डीज़ल वाहनों का धुआँऔद्योगिक उत्सर्जन और निर्माण कार्यों की धूलसर्द हवाओं की कमी, जिससे प्रदूषक ज़मीन के पास जम जाते हैं क्या है आगे की राह? सरकार की ओर से उठाए गए कदम, जैसे पानी का छिड़काव, निर्माण कार्यों पर रोक और स्कूलों की छुट्टियाँ, केवल अस्थायी समाधान हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि अब दिल्ली को दीर्घकालिक रणनीति की ज़रूरत है — जिसमें ग्रीन एनर्जी, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा और औद्योगिक प्रदूषण पर सख्त नियंत्रण जैसे कदम शामिल हों। राजधानी के लिए खतरे की घंटी दिल्ली की हवा अब केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं रही, बल्कि यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति बन चुकी है।अगर जल्द प्रभावी और सच्चे कदम नहीं उठाए गए, तो दिल्ली का जीवन आने वाले समय में और भी कठिन होता जाएगा। दिवाली के बाद दिल्ली की हवा फिर ज़हरीली: सरकार के दिखावे वाले कदमों से नहीं थम रहा प्रदूषण Health & Care Information News Article