नई दिल्ली में हाल ही में दुनिया के सबसे बड़े AI कार्यक्रमों में से एक AI Impact Summit 2026 हुआ। इसका मकसद भारत को वैश्विक तकनीक मंच पर आगे दिखाना था और दुनिया भर के नेताओं, कंपनियों और टेक एक्सपर्ट्स को एक जगह लाना था। लेकिन जिस तरह से यह आयोजन बाहर की दुनिया को दिखाया गया, अंदर की असलियत उससे अलग रही।
भीड़ और अव्यवस्था — शुरुआत से ही परेशानी
समिट के पहले दिन ही भारी भीड़ देखकर व्यवस्थाएँ संभल नहीं पाईं। कई लोगों को सुबह 7 बजे से लाइन में लगना पड़ा, फिर भी बहुत देर तक अंदर नहीं जा पाए। कतारें इतनी लंबी थीं कि लोग परेशान हो गए। बहुत से प्रतिभागियों ने बताया कि उनका क्यूआर कोड या पास सही से काम नहीं कर रहा था, जिससे प्रवेश में दिक्कत हुई और वह घंटों इंतज़ार में रहे।
लोग नेटवर्क, पानी और बैठने जैसी बुनियादी चीज़ों की भी कमी का जिक्र कर रहे हैं। कुछ ने कहा कि जैसे ही सुरक्षा कारणों से प्रधानमंत्री की टीम की तैयारी शुरू हुई, लोगों को बाहर निकलने या स्थानांतरित करने के लिए कहा गया, जिससे भ्रम और बढ़ गया। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर यह भी लिखा कि उन्हें वहाँ पहले से लगाए गए प्रमोशनल बैनरों के मुकाबले लोजिस्टिक्स और मेहमान-नवाज़ी की कमी ज्यादा दिखी।
व्यवस्थागत कमियाँ और ऑनलाइन शिकायतें
कुछ प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि आयोजन के मुख्य सत्र या हॉल काफी दूर-दूर थे, जिससे एक सत्र से दूसरे में पहुँचने में 20-30 मिनट लग जाते थे। सुरक्षा समीक्षा बार-बार होने से लोग अपनी इच्छित सत्रों का समय भी खो बैठे। कुछ ने यह तक लिखा कि कुछ स्टार्टअप प्रदर्शनों के डेमो उपकरण गायब हो गए और किसी को स्पष्ट जानकारी भी नहीं दी गई।
ट्रैफिक और बाहर की कहानी
समिट के दौरान राजधानी के कई हिस्सों में ट्रैफिक भी बिगड़ा, कुछ सड़कों पर घंटों जाम लगा रहा, जिससे आम लोग भी प्रभावित हुए। कई लोगों ने बताया कि cabs या वापसी की व्यवस्था बिना योजना के हो गई जिससे शाम-को समाप्त होने के बाद निकलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
पीएम मोदी और मंच पर अनुभव
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi की उपस्थिति थी और कई ग्लोबल टेक लीडर्स जैसे सीईओ और विदेशी प्रतिनिधि भी आए। लेकिन कुछ प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किया कि मंच पर प्रधानमंत्री के साथ खड़े होने या हाथ पकड़कर खड़े होने जैसे पलों ने कुछ लोगों को असहज महसूस कराया — खासकर जब आयोजनों के बीच और बाहर लोगों को इंतज़ार करना पड़ा। ऑनलाइन कई प्रतिक्रियाएँ ऐसी भी थीं जहाँ कुछ लोगों ने कहा कि प्रधानमंत्री के आसपास तस्वीरें और प्रचार सामग्री थी, लेकिन वास्तविक अनुभव और व्यवस्थाएँ जनता की उम्मीदों के अनुरूप नहीं थीं। (निगरानी-योग्य सोशल मीडिया पोस्ट यह बताती हैं कि आयोजन के बड़े विज़ुअल्स के मुकाबले व्यवस्थाएँ पीछे रह गईं थीं।)
विरोध प्रदर्शन और मीडिया हाइलाइट
समिट के बीच कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने विरोध भी जताया, जिस दौरान सुरक्षा घेरा टूट गया और कुछ प्रदर्शनकारी टी-शर्ट खोलकर नारेबाजी करने लगे। इस घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी और पुलिस कार्रवਾਈ भी हुई। इसके बाद मीडिया चैनलों ने इस प्रदर्शन को खूब दिखाया। इसके कारण कुछ लोगों ने महसूस किया कि मुख्य समस्याओं — जैसे भीड़, खराब व्यवस्थाएँ, प्रतीक्षा समय और असुविधाएँ — की बजाय विरोध प्रदर्शन को ज़्यादा दिखाया गया, जिससे असल मुद्दों पर कम ध्यान गया।
AI रोबोट डॉग को लेकर उठे सवाल
समिट के दौरान एक रोबोटिक “AI डॉग” भी प्रदर्शित किया गया, जिसने काफी ध्यान खींचा। सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स ने दावा किया कि यह तकनीक मूल रूप से चीन की कंपनी द्वारा विकसित मॉडल से मिलती-जुलती है। इसके बाद ऑनलाइन बहस शुरू हो गई कि क्या यह डिवाइस पूरी तरह स्वदेशी था या आयातित तकनीक पर आधारित।
AI Summit का उद्देश्य बड़े स्तर पर तकनीक को दिखाना था, लेकिन आयोजन के अंदर की वास्तविक परेशानियाँ — जैसे लंबी कतारें, कनेक्टिविटी समस्या, सुविधाओं की कमी, अव्यवस्थित प्रवेश प्रक्रिया और व्यवस्थागत कमियाँ — ने कुछ लोगों को निराश किया। कुछ लोग इसे हाई-प्रोफाइल इवेंट के लिए अपेक्षित संचालन की कमी मान रहे हैं, जबकि आयोजक पक्ष इस कार्यक्रम को वैश्विक स्तर पर भारत की उपलब्धि के रूप में देखता है।
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