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दीपिका पादुकोण ने अबाया पहना तो मचा बवाल

दीपिका पादुकोण ने अबाया पहना तो मचा बवाल : लेकिन सवाल ये है, हिजाब पहना तो क्या गलत किया?

Laxmi Nautiyal, October 9, 2025October 9, 2025

बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण फिर एक बार सुर्खियों में हैं। वजह है उनका हाल ही में रिलीज़ हुआ अबू धाबी टूरिज़्म का एक विज्ञापन, जिसमें उन्होंने पारंपरिक अबाया पहन रखा है। लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे “हिजाब” कहकर विवाद खड़ा कर दिया। ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम पर लोग दो हिस्सों में बंट गए — एक तरफ आलोचना, तो दूसरी तरफ समर्थन।

असल में मामला क्या है?

दीपिका पादुकोण ने यह विज्ञापन अबू धाबी टूरिज़्म के लिए शूट किया, जिसमें उन्होंने शेख ज़ायद मस्जिद का दौरा किया। मस्जिद में प्रवेश के लिए महिलाओं को सिर ढकना और शरीर को ढके कपड़े पहनना नियम के तौर पर ज़रूरी होता है। दीपिका ने उसी संस्कृति और नियम का सम्मान करते हुए अबाया पहना था — लेकिन कुछ लोगों ने इसे हिजाब समझ लिया और ट्रोलिंग शुरू कर दी।

सोशल मीडिया पर बवाल क्यों मचा?

कुछ यूज़र्स ने लिखा कि “दीपिका अब हिजाब प्रमोट कर रही हैं”, जबकि हक़ीक़त में उन्होंने सिर्फ उस जगह के ड्रेस कोड का पालन किया था।
वहीं उनके चाहने वालों ने साफ कहा —

“अगर उन्होंने हिजाब पहना भी लिया तो क्या गलत किया?
वो किसी धर्म को नहीं, बल्कि उस संस्कृति का सम्मान कर रही थीं।”

और सच कहा जाए तो ये बिल्कुल सही बात है — अगर कोई महिला अपनी इच्छा से हिजाब पहनती है, तो उसमें बुराई क्या है? ये उसका निजी फैसला है, किसी के दबाव में नहीं लिया गया। दीपिका ने न तो इसे अपनाने का ऐलान किया है और न ही किसी को इसके लिए प्रेरित किया।

हमारे समाज को क्या हो गया है?

सबसे बड़ा सवाल यही है — हम हर बात में धर्म क्यों खोज लेते हैं?
आज देश में हर छोटी-बड़ी बात “हिंदू-मुस्लिम”, “मंदिर-मस्जिद” तक सिमट कर रह गई है।
कोई विकास की बात नहीं करता,
कोई शिक्षा पर चर्चा नहीं करता,
कोई अस्पतालों की हालत पर सवाल नहीं उठाता।
बस जब देखो, धर्म के नाम पर बवाल!

क्या यही था “नया भारत” जिसका सपना हम सबने देखा था?

Note :

दीपिका पादुकोण का ये मामला हमें यही सिखाता है कि कपड़े किसी की पहचान नहीं होते, इरादे होते हैं।
अगर कोई एक्ट्रेस किसी संस्कृति का सम्मान करते हुए पारंपरिक पोशाक पहनती है, तो उसमें ट्रोल करने जैसा कुछ नहीं।
हमें अपनी सोच बदलनी होगी — वरना हम धर्म की बहसों में उलझकर असली मुद्दों को हमेशा भूलते रहेंगे।

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