Cockroach Janta Party का जंतर मंतर धमाका — लाखों “कॉकरोच” सड़क पर, लट्ठ वाले कहाँ हैं? एक जागरूक नागरिक, June 6, 2026June 6, 2026 Cockroach Janta Party का जंतर मंतर प्रोटेस्ट और “लट्ठ बजाने” की धमकी — सवाल जरूरी है संक्षेप में आज दिल्ली के जंतर मंतर पर Cockroach Janta Party (CJP) का पहला बड़ा प्रोटेस्ट हो रहा है। CJP के founder Abhijeet Dipke Boston से वापस भारत आए और इस प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे हैं। मांग है — Education Minister Dharmendra Pradhan का इस्तीफा, NEET और CBSE paper leak पर जवाबदेही। इसी बीच RSS और बजरंग दल से जुड़े कुछ लोगों के videos वायरल हो रहे हैं जिनमें “लट्ठ बजाने” की धमकी दी जा रही है। 15 मई 2026 को Chief Justice of India Surya Kant ने बेरोज़गार युवाओं को “cockroaches” और “parasites of society” कहा। अगले ही दिन Abhijeet Dipke ने X पर एक satirical movement शुरू की — Cockroach Janta Party। 78 घंटे में Instagram पर 30 लाख followers, 5 दिन में 1 करोड़। यह आंदोलन इतनी तेज़ी से बड़ा हुआ कि आज जंतर मंतर पर इसका पहला असली प्रोटेस्ट हो रहा है। CJP की मांग साफ है — NEET, CBSE और CUET में हुए paper leaks और irregularities पर सरकार जवाब दे और Education Minister Dharmendra Pradhan इस्तीफा दें। Sonam Wangchuk भी इस protest में शामिल हुए। Delhi Police ने 1000 से ज़्यादा जवान तैनात किए और protest की permission दी। लट्ठ की धमकी — यह कौन होते हैं? इस protest को लेकर सोशल मीडिया पर RSS और बजरंग दल से जुड़े कुछ लोगों के videos वायरल हो रहे हैं जिनमें वो साफ कह रहे हैं — अगर कुछ भी “देश के खिलाफ” हुआ तो वो लट्ठ लेकर आएंगे। लेकिन सवाल यह है कि ये कौन होते हैं लट्ठ बजाने वाले? जब देश में बलात्कार होता है, जब महिलाओं पर अत्याचार होता है, जब गरीबों के साथ अन्याय होता है — तब इनका लट्ठ कहाँ चला जाता है? जब rape होता है, जब महिलाओं पर अत्याचार होता है — तब ये लट्ठ कहाँ चले जाते हैं? ज़रूरी बातें CJP यानी Cockroach Janta Party — 16 May 2026 को Abhijeet Dipke ने शुरू की, CJI की “cockroach” टिप्पणी के जवाब में। मांग: Education Minister Dharmendra Pradhan का इस्तीफा, NEET-CBSE paper leak पर जवाबदेही। Article 19 के तहत शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का काम है — किसी निजी संगठन का नहीं। कानून क्या कहता है? भारत का संविधान हर नागरिक को शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट का अधिकार देता है — Article 19 में यह साफ लिखा है। अगर कोई गड़बड़ी होती है तो उसे संभालने के लिए पुलिस है, कानून है, अदालत है। कोई भी प्राइवेट संगठन खुद “enforcer” नहीं बन सकता — यह सीधे-सीधे गैरकानूनी है। लोकतंत्र में असहमति की आवाज़ उठाना गुनाह नहीं है। गुनाह यह है कि लाखों बेरोज़गार युवाओं की आवाज़ को लट्ठ से दबाने की कोशिश की जाए। 📢 इस खबर को शेयर करें जागरूक बनें, जागरूक बनाएं — हर शेयर एक आवाज़ है WhatsApp Twitter / X Facebook लिंक कॉपी करें ✅ लिंक कॉपी हो गया! 🇮🇳 जागरूक नागरिक, मज़बूत लोकतंत्र। इस खबर को शेयर करें और अपने आसपास के लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों के बारे में जागरूक बनाएं। Uncategorized