Deepika Nagar और Twisha Sharma के मामलों ने पूरे देश को झकझोर दिया, दहेज प्रथा भारत में बढ़ती जा रही है | एक जागरूक नागरिक, May 22, 2026May 22, 2026 Dowry Cases बढ़ रहे हैं – हर घंटे 1 महिला ⚠️ Alert Report Dowry Cases बढ़ रहे हैं – हर घंटे 1 महिला Deepika और Twisha के मामलों ने पूरे देश को झकझोर दिया हर साल 8,000+ दहेज मृत्यु सजा की दर 32% बेहद कम 2021-22 13,500+ दर्ज मामले Greater Noida और Bhopal से आए दो cases ने पूरे देश को चौंक दिया है। मई 2026 में Deepika Nagar (24 वर्षीय) और Twisha Sharma (33 वर्षीय) की संदिग्ध मृत्यु हुई – दोनों ही दहेज की मांग को लेकर। ये cases सिर्फ शहर की घटनाएं नहीं हैं, बल्कि भारत भर में होने वाली समस्या का प्रतीक हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक हर साल 8,000 से ज़्यादा महिलाएं दहेज से जुड़े अपराधों का शिकार होती हैं। इसका मतलब है हर घंटे एक महिला मर जाती है। 2021-22 में 13,500 से अधिक दहेज मामले दर्ज किए गए। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है कि भारत में दहेज लैंगिक हिंसा का सबसे बड़ा कारण है। Deepika की बात करें तो उसके सास-ससुर ने 45-50 लाख रुपये और एक Toyota Fortuner की मांग की थी। मृत्यु से कुछ घंटे पहले, उसने अपने पिता को रोते हुए बताया कि घर में मार-पीट हो रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मस्तिष्क में खून, आंतरिक अंगों का टूटना और पूरे शरीर पर चोट के निशान पाए गए। Twisha का case और भी गंभीर था। एक प्रसिद्ध वकील की बीवी होने के बावजूद उसे severe harassment, मार-पीट, mental abuse सहना पड़ा। सास एक retired judge थीं। जबरन abortion कराया गया, वजन 15 किलो कम हो गया। 12 मई को उसे छत से फांसी की स्थिति में पाया गया। दोनों cases में समानता ✓ शिक्षित महिलाएं ✓ दहेज की मांग ✓ मानसिक प्रताड़ना ✓ सास की भूमिका ✓ संदिग्ध परिस्थितियां ✓ न्याय में देरी 🔥 सबसे बड़ी समस्या: ये दोनों महिलाएं educated थीं, आर्थिक रूप से सक्षम थीं – फिर भी दहेज की चपेट में आ गईं। इसका मतलब ये है कि समस्या सिर्फ गरीबी या अशिक्षा नहीं है। यह एक सामाजिक मानसिकता है जहां महिला को इंसान नहीं, एक लेन-देन की चीज माना जाता है। दहेज प्रथा क्या है? दहेज एक प्राचीन परंपरा है जहां दुल्हन का परिवार दूल्हे और उसके परिवार को पैसा, गहने, यानी गिफ्ट देता है। भारत में ये 1961 में banned हो गया, लेकिन आज भी ये बदस्तूर जारी है। समस्या ये है कि विवाह के बाद भी मांग रुकती नहीं। पति का परिवार बार-बार ज़्यादा दहेज मांगता है, और अगर न मिले तो महिला को प्रताड़ना, बदसलूकी, यहां तक कि मौत का सामना करना पड़ता है। ये समस्या बढ़ क्यों रही है? आर्थिक विकास – भारत का विकास हुआ, पर दहेज की मांग और भी बढ़ गई। अब गिफ्ट नहीं, flat, car, लक्षों रुपये की मांग होती है पितृसत्तात्मक सोच – समाज में अभी भी महिला को ‘खरीदी वस्तु’ माना जाता है, न कि बराबर की इंसान कमजोर कानून – सजा की दर केवल 32%, अदालतों में केस में साल लग जाते हैं सामाजिक स्वीकृति – कई जगहों पर लोग दहेज को अभी भी ‘परंपरा’ और ‘प्रेम’ के नाम पर देते हैं क्या बदलना होगा? कानूनों को कठोर बनाना, स्कूलों में जागरूकता, घरों में बातचीत – और सबसे ज़रूरी है, लोगों की सोच बदलना। दहेज न दें, न लें। यही एक कदम है जो लाखों जिंदगियां बचा सकता है। Information News Article