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भारत के अजीबो-गरीब कानूनों का सच्चा फैक्ट चेक

भारत के अजीबो-गरीब कानूनों का सच्चा फैक्ट चेक – क्या ये आज भी लागू हैं?

Hindi News, October 11, 2025October 11, 2025

भारत में कई ऐसे कानून हैं जो कभी तो ज़रूरत के समय बनाए गए थे, लेकिन आज की आधुनिक दुनिया में वे अजीब या मज़ेदार लगते हैं। इस आर्टिकल में हम हर ऐसे भारत के अजीब कानून का सच जानेंगे — कि क्या वे आज भी लागू हैं या सिर्फ इतिहास बन चुके हैं।

1. पतंग उड़ाने के लिए सरकारी अनुमति जरूरी है

कानून: भारतीय विमान अधिनियम, 1934
इस कानून के अनुसार, “एयरक्राफ्ट” की परिभाषा में पतंग भी शामिल थी। यानी बिना अनुमति पतंग उड़ाना अपराध माना जा सकता था।
सत्यापन:
यह कानून तकनीकी रूप से लिखा हुआ तो है, लेकिन अब व्यवहार में लागू नहीं होता। आज कोई भी पतंग उड़ाने पर कानूनी कार्रवाई नहीं होती।

नोट: अब लागू नहीं है (सिर्फ पुराने कानून की किताबों में मौजूद)।

2. ट्रेन में ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारी से बात करना अपराध

कानून: रेलवे अधिनियम, 1989
यदि कोई व्यक्ति ट्रेन में ड्यूटी पर मौजूद पुलिस या रेलवे अधिकारी के काम में दखल देता है या उसे परेशान करता है, तो सजा हो सकती है।
सत्यापन:
यह बात आंशिक रूप से सही है। सिर्फ ड्यूटी में बाधा डालना अपराध है, सामान्य बातचीत नहीं।

नोट: आंशिक रूप से लागू (केवल बाधा डालने की स्थिति में)।

3. 14 साल से कम उम्र के बच्चे को नौकरी पर रखना अपराध

कानून: बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986
यह कानून बच्चों को मजदूरी या किसी व्यवसाय में लगाने से रोकता है।
सत्यापन:
यह पूरी तरह से सच और लागू कानून है।

नोट: पूरी तरह लागू।

4. बिजली मीटर से छेड़छाड़ करना अपराध

कानून: इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003
बिजली चोरी या मीटर से छेड़छाड़ पर सजा और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।
सत्यापन:
यह कानून आज भी पूरी तरह लागू है और इसके तहत हर साल हजारों मामले दर्ज होते हैं।

नोट: पूरी तरह लागू।

5. ₹10 का सिक्का ठुकराना अपराध है

कानून: भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934
इस अधिनियम के तहत वैध मुद्रा को ठुकराना गैरकानूनी है।
सत्यापन:
यह सही और लागू है, लेकिन व्यवहार में इस पर सख्ती नहीं की जाती।

नोट: कानूनी रूप से लागू।

6. पुलिस वाले को सैल्यूट करना जरूरी नहीं

कानून: कोई नहीं
कई लोग मानते हैं कि पुलिस या अधिकारी को सैल्यूट न करना कानून तोड़ना है, लेकिन ऐसा कोई नियम नहीं है।
सत्यापन:
यह सिर्फ सामाजिक परंपरा है, कानूनी बाध्यता नहीं।

नोट: कोई कानूनी नियम नहीं।

7. नोट पर कुछ लिखना अपराध है

कानून: आरबीआई गाइडलाइन
रिजर्व बैंक ने नोटों पर कुछ लिखने को अनुचित बताया है, पर यह अपराध नहीं है। ऐसे नोट धीरे-धीरे चलन से बाहर कर दिए जाते हैं।
सत्यापन:
यह नैतिक रूप से गलत है, लेकिन कानून के तहत सजा योग्य अपराध नहीं।

नोट: आंशिक रूप से सही (नैतिक रूप से मना है, लेकिन अपराध नहीं)।

8. राष्ट्रीय ध्वज का गलत उपयोग अपराध है

कानून: भारतीय ध्वज संहिता, 2002
ध्वज का अपमान या गलत इस्तेमाल करना सजा योग्य अपराध है।
सत्यापन:
यह पूरी तरह से सही और लागू कानून है।

नोट: पूरी तरह लागू।

9. संसद में झूठ बोलना अपराध नहीं है

कानून: भारतीय संविधान के विशेषाधिकार प्रावधान
सांसदों को सदन में कही गई बातों के लिए विशेषाधिकार प्राप्त हैं।
सत्यापन:
यह कानूनी रूप से सच है। वे सदन में कही गई बातों पर मुकदमे से सुरक्षित रहते हैं।

नोट: कानूनी रूप से सही (अपराध नहीं)।

10. डाक टिकट फाड़ना अपराध है

कानून: भारतीय डाक अधिनियम, 1898
वैध डाक टिकट को नुकसान पहुँचाना या फाड़ना अपराध है।
सत्यापन:
यह कानून अब बहुत पुराना है, लेकिन तकनीकी रूप से अभी भी प्रभावी है।

नोट: पुराने रूप में अब भी मौजूद (लेकिन शायद ही लागू होता है)।

भारत के अजीब कानूनों की सच्चाई

इन कानूनों को पढ़कर यह स्पष्ट होता है कि भारत का कानूनी ढांचा समय के अनुसार विकसित हुआ है। कुछ कानून आज भी पूरी तरह लागू हैं और समाज के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदान करते हैं, जबकि कुछ सिर्फ इतिहास और किताबों में बचे हैं।
यह आर्टिकल आपको यह समझने में मदद करता है कि कानूनी नियमों और उनके व्यवहारिक प्रभाव में अंतर भी मौजूद है।

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