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आखिर कोई भारत क्यों छोड़ रहा है?

भारत की नागरिकता क्यों छोड़ रहे हैं हज़ारों लोग

Laxmi Nautiyal, May 21, 2026May 21, 2026
आखिर कोई भारत क्यों छोड़ रहा है? | एक जागरूक नागरिक
एक जागरूक नागरिक
Facts · News · Analysis

आखिर कोई भारत क्यों छोड़ रहा है?

📅 May 2026 ✍️ एक जागरूक नागरिक ⏱️ 4 min read
हर साल लाखों भारतीय अपना घर, अपनी गली, अपना देश छोड़कर विदेश जा रहे हैं। कोई Canada जा रहा है, कोई UAE, कोई Germany। सवाल यह नहीं है कि वो जा रहे हैं — सवाल यह है कि क्यों जा रहे हैं? क्या सच में बाहर इतना अच्छा है, या फिर यहाँ कुछ ऐसा है जो उन्हें जाने पर मजबूर कर रहा है?

📊 पहले Numbers देखते हैं

ये सिर्फ बातें नहीं हैं — data बोलता है। भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा emigrant देश बन चुका है।

1.85 Cr भारतीय 2024 में विदेश में रह रहे थे
6.3 L लोग सिर्फ 2024 में भारत छोड़ गए (net)
3X 1990 से अब तक emigration तीन गुना हो गई
6% दुनिया के सभी migrants में भारतीय

1990 में जहाँ 65 लाख भारतीय विदेश में थे, 2024 में यह संख्या 1 करोड़ 85 लाख हो गई है। यानी सिर्फ 34 सालों में यह तीन गुना बढ़ी। यह सिर्फ opportunity की तलाश नहीं है — यह एक बड़ा signal है।


😤 कारण क्या हैं?

  • 🎓
    Youth की कोई परवाह नहीं 15-29 साल के युवाओं में unemployment rate करीब 15% है। Degree है, talent है — लेकिन job नहीं। बड़े शहरों में educated women की unemployment तो 40% तक पहुँच गई है कुछ states में। सरकारी नौकरी के लिए लाखों apply करते हैं, seats होती हैं सैकड़ों।
  • 🏫
    School system जो future नहीं बनाता रटना, pass होना, marks लाना — यही system है। Critical thinking नहीं, creativity नहीं। Private school इतने महंगे हैं कि middle class की कमर टूट जाती है, और सरकारी school में infrastructure का हाल किसी से छुपा नहीं।
  • 🏥
    Health system — नाम का है, काम का नहीं Govt hospital में doctors कम हैं, bed कम हैं, दवाइयाँ कम हैं। Private hospital की fees इतनी है कि बीमारी से पहले बिल देखकर दिल का दौरा पड़ जाए। Ayushman Bharat scheme है — लेकिन कितनों को actually मिला? यह सवाल आज भी जवाब माँगता है।
  • 📰
    Press Freedom — बोलने का हक? RSF के 2026 World Press Freedom Index में भारत 180 देशों में 157वें नंबर पर आया है — 2025 में 151वाँ था, यानी 6 पायदान और नीचे गिरे। Nepal 87वें नंबर पर है। Bhutan 150वें पर। हम उनसे भी नीचे हैं। जो journalist सवाल पूछता है उसे case मिलता है, जो चुप रहता है उसे channel।
  • ⚖️
    जब अपराधी आज़ाद हों, सवाल पूछना जुर्म हो कोई बड़ा आदमी crime करे — bail मिल जाती है, case खिंच जाता है। कोई common आदमी सरकार से सवाल पूछे — FIR, sedition, UAPA। यह दोहरा system देश के भरोसे को तोड़ता है।
  • 🏛️
    Parliament और Ministers का हाल जिन्हें हमने चुना, वो संसद में बहस करने की जगह हंगामा करते हैं। कई ministers की educational qualification पर सवाल हैं। जनता की problems पर कम, politics पर ज़्यादा focus है। हर session में disruption, हर issue पर drama।
💬 “जब system सवाल पूछने वाले को सज़ा दे और
चुप रहने वाले को इनाम — तो लोग या तो
चुप हो जाते हैं, या चले जाते हैं।”

📉 Press Freedom — Neighbours से भी पीछे

World Press Freedom Index 2026 — कौन कहाँ है? (180 देशों में)

🇳🇴 Norway
#1
🇳🇵 Nepal
#87
🇧🇹 Bhutan
#150
🇮🇳 India
#157

Source: RSF World Press Freedom Index 2026

यह सोचने वाली बात है — Bhutan, जो एक छोटा सा देश है, press freedom में हमसे आगे है। Nepal तो बहुत आगे है। “दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र” — यह tag हम लगाते हैं, लेकिन rankings कुछ और कहती हैं।


✈️ कहाँ जा रहे हैं भारतीय?

UAE और USA में सबसे ज़्यादा भारतीय हैं — दोनों में करीब 17-17% diaspora। इसके अलावा Canada, Australia, UK और Germany popular destinations हैं। 2023 में 12 लाख से ज़्यादा Indian students विदेश में पढ़ रहे थे। और remittances यानी बाहर से भेजा पैसा — 100 billion dollars से ऊपर निकल गया।

मतलब हम पैसा तो वापस भेज रहे हैं — लेकिन खुद नहीं आ रहे। क्योंकि जो सुकून, opportunity और dignity बाहर मिलती है, वो यहाँ नहीं मिल पाती।

तो क्या भारत छोड़ना ही जवाब है?

नहीं। भारत छोड़ना शायद किसी एक इंसान की problem solve कर दे — लेकिन देश की नहीं। जब तक पढ़ा-लिखा, सोचने वाला, सवाल पूछने वाला तबका यहाँ से जाता रहेगा — यहाँ बदलाव कौन लाएगा?

असली सवाल यह है — क्या हम उस system को ठीक करने की कोशिश करेंगे, या बस निकल जाएंगे? क्योंकि जो रह जाते हैं और आवाज़ उठाते हैं, वही असली जागरूक नागरिक हैं।

Data बोल रहा है। Numbers चीख रहे हैं। अब सुनना government की ज़िम्मेदारी है — और याद दिलाना हमारी।

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