मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के इंटरव्यू बयानों पर उठते गंभीर सवाल Hindi News, December 15, 2025December 15, 2025 मुख्यमंत्री पद पर बैठने के बाद किसी भी नेता की हर बात सामान्य नहीं रहती। उनके शब्द न केवल सरकार की सोच दिखाते हैं, बल्कि प्रशासन की समझ और तैयारी का भी संकेत देते हैं। हाल के इंटरव्यूज़ में सीएम रेखा गुप्ता के कुछ बयान ऐसे रहे, जिन्हें सुनकर लोगों ने सवाल उठाए कि क्या इंटरव्यू से पहले पर्याप्त तैयारी की गई थी। पहला पक्ष: जनता और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया कई मौकों पर सीएम रेखा गुप्ता ने ऐसे जवाब दिए जो या तो विषय से हटे हुए लगे, या फिर तथ्यों को लेकर भ्रम पैदा करते दिखे। इन्हीं बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज़ हुई और आम लोगों ने कहा कि एक मुख्यमंत्री से ऐसी भाषा और समझ की उम्मीद नहीं की जाती। AQI को लेकर दिया गया बयान प्रदूषण और एयर क्वालिटी इंडेक्स पर पूछे गए सवाल के जवाब में सीएम ने कहा कि“AQI तो एक तरह का टेम्परेचर होता है, जिसे किसी भी इंस्ट्रूमेंट से नापा जा सकता है।” इस बयान को लेकर लोगों ने सवाल उठाए क्योंकि AQI तापमान नहीं, बल्कि हवा में मौजूद प्रदूषक कणों का सूचकांक है। शब्दों की यह चूक छोटी लग सकती है, लेकिन मुख्यमंत्री जैसे पद पर बैठे व्यक्ति के लिए इसे गंभीर माना गया। कुनाल कामरा के कार्यक्रम को लेकर टिप्पणी स्टैंड-अप कॉमेडियन कुनाल कामरा के संदर्भ में सीएम रेखा गुप्ता का यह कहना कि“जो भी आए, वो अपनी रिस्क पर आए”कई लोगों को असंवेदनशील लगा। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर इस तरह की टिप्पणी को लेकर यह सवाल उठा कि क्या यह बयान जिम्मेदार पद की गरिमा के अनुरूप था। कानून-व्यवस्था पर टालने वाला जवाब एक इंटरव्यू में जब उनसे राज्य की कानून-व्यवस्था पर सीधा सवाल पूछा गया, तो जवाब में उन्होंने कहा कि“ऐसी घटनाएँ हर जगह होती हैं, इसमें कुछ नया नहीं है।” इस तरह का सामान्यीकरण लोगों को इसलिए खटका क्योंकि मुख्यमंत्री से अपेक्षा होती है कि वे समस्या को गंभीरता से स्वीकार करें, न कि उसे सामान्य बताकर टाल दें। महंगाई और रोज़गार पर अस्पष्ट बयान महंगाई और युवाओं के रोज़गार से जुड़े सवाल पर सीएम का जवाब था कि“सरकार काम कर रही है, धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।” यह जवाब इसलिए आलोचना में आया क्योंकि इसमें न कोई समयसीमा थी, न कोई ठोस योजना, और न ही यह बताया गया कि “कैसे” और “कब” स्थिति सुधरेगी। समस्या क्या है? यह कहना सही नहीं होगा कि मुख्यमंत्री को किसी विषय का ज्ञान नहीं है। लेकिन बार-बार ऐसे बयान आना यह संकेत देता है कि इंटरव्यू से पहले विषयों की गहरी तैयारी नहीं की गईशब्दों का चयन सोच-समझकर नहीं हुआऔर जवाबों में स्पष्टता की कमी रही मुख्यमंत्री का इंटरव्यू सिर्फ सवाल-जवाब नहीं होता, वह जनता से सीधा संवाद होता है।जब जवाब अस्पष्ट, भ्रमित या हल्के लगते हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।रेखा गुप्ता के इन बयानों ने यही दिखाया कि समस्या ज्ञान से ज़्यादा तैयारी, भाषा और प्रस्तुति की है। राहुल गांधी के आरोप: बीजेपी और चुनाव आयोग पर वोट चोरी के सवाल Facts Information News Article