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सड़क किनारे पेड़ लगाने के फायदे, पर्यावरणीय महत्व, प्रदूषण नियंत्रण

सड़क किनारे पेड़ लगाने के फायदे और बढ़ती जरूरत

Hindi News, November 17, 2025November 17, 2025

भारत जैसे तेज़ी से विकसित हो रहे देश में सड़कें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इन सड़कों के साथ पेड़ कम होते जा रहे हैं। बढ़ते तापमान, धूल, प्रदूषण और पर्यावरणीय असंतुलन के बीच सड़क किनारे पेड़ लगाना आज सिर्फ एक सामाजिक पहल नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बन चुका है। यह न केवल प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि इंसानों और जानवरों दोनों के लिए जीवनदायिनी भूमिका निभाता है।

सड़क किनारे पेड़ लगाने के प्रमुख फायदे

1. वायु प्रदूषण में कमी

सड़क किनारे भारी मात्रा में वाहनों का आवागमन होता है, जिससे धुआं, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड और विभिन्न गैसें वातावरण में फैलती हैं। पेड़ इन हानिकारक गैसों को सोखकर स्वच्छ ऑक्सीजन छोड़ते हैं। इससे सड़क किनारे और आसपास रहने वाले लोगों को राहत मिलती है।

2. तापमान नियंत्रित करना

बड़े शहरों में बढ़ते कंक्रीट, भवन और वाहनों के कारण हीट आइलैंड इफेक्ट बढ़ रहा है। सड़क किनारे लगाए गए पेड़ अपने छायादार क्षेत्र के कारण तापमान को स्वाभाविक रूप से कम करते हैं, जिससे गर्मियों में सड़कों पर गर्मी का असर काफी कम हो जाता है।

3. मिट्टी कटाव रोकना

सड़क किनारे पेड़ों की जड़ें मिट्टी को मजबूती से पकड़कर पानी या हवा से होने वाले कटाव को रोकती हैं। खासकर पहाड़ी और ढलान वाले इलाकों में यह और भी अहम भूमिका निभाते हैं।

4. सड़क सुरक्षा में मदद

पेड़ न केवल छाया प्रदान करते हैं बल्कि सड़क पर आने वाली तेज हवाओं के प्रभाव को भी कम करते हैं। साथ ही, सड़क के किनारे बनी प्राकृतिक हरियाली ड्राइवरों की आंखों को राहत देती है और मानसिक थकान कम करती है।

5. जैव विविधता को बढ़ावा

सड़क किनारे पेड़ लगाने से पक्षियों, तितलियों और छोटे जीवों के लिए प्राकृतिक आवास तैयार होते हैं। यह स्थानीय जैव विविधता को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सफल पेड़ारोपण अभियान कैसे चलाए जाएं

1. सही पेड़ों का चुनाव

सड़क किनारे ऐसे पेड़ लगाए जाएं जो तेजी से बढ़ें, अधिक देखभाल की जरूरत न हो और पर्यावरण के अनुकूल हों, जैसे नीम, पीपल, गुड़हल, कनेर, अशोक, अमलतास और बरगद।

2. सामुदायिक भागीदारी

पेड़ लगाने और उसकी देखभाल में स्थानीय निवासियों, स्कूलों, स्वयंसेवी संगठनों और पंचायतों की भागीदारी जरूरी है। सामुदायिक जुड़ाव से पेड़ लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।

3. नियमित देखभाल

पेड़ लगाना आसान है, लेकिन उनकी देखभाल असली काम है। पानी देना, सुरक्षा घेरा लगाना और सूखे पेड़ों को बदलना जरूरी प्रक्रियाएं हैं।

4. सरकारी सहयोग

कई राज्य सरकारें पेड़ारोपण अभियान चलाती हैं। इन अभियानों में ग्रामीणों, युवाओं और संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए पौधे, खाद और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है। सड़क विकास परियोजनाओं में ग्रीन कॉरिडोर को अनिवार्य करना इस दिशा में बड़ा कदम है।

5. जागरूकता अभियान

स्कूलों, सोशल मीडिया, पंचायत स्तर और स्थानीय बैठकों में पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है। जब लोग इसके फायदे समझेंगे, तभी पेड़ारोपण वास्तव में सफल होगा।

आज की जरूरत: हर सड़क को बनाएं ग्रीन कॉरिडोर

तेजी से बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण के दौर में सड़क किनारे पेड़ लगाना एक दीर्घकालिक समाधान है। यह न केवल पर्यावरण को स्वस्थ बनाता है बल्कि इंसान और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। यदि हर नागरिक एक सड़क के किनारे एक पेड़ लगाने और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी ले ले, तो देश की लाखों सड़कें प्राकृतिक हरियाली से भर जाएंगी।

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