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नौगांव पुलिस स्टेशन में हुए धमाके में 9 मौतें हुईं

नौगांव पुलिस स्टेशन धमाका: जांच, वजहें और सुरक्षा चूक की पूरी कहानी

Laxmi Nautiyal, November 17, 2025November 17, 2025

14 नवंबर 2025 की रात लगभग 11:20 बजे श्रीनगर के नौगांव पुलिस स्टेशन में एक तेज़ धमाका हुआ, जिसने पूरे परिसर को हिला दिया। यह विस्फोट तब हुआ जब पुलिस और फॉरेंसिक टीम ज़ब्त किए गए विस्फोटकों की जांच कर रही थी। प्रारंभिक जांच में इसे “आकस्मिक विस्फोट” बताया गया है, यानी यह कोई बाहरी हमला नहीं था, बल्कि जांच के दौरान हुई एक गंभीर दुर्घटना थी।

मौत और घायल होने वालों की संख्या

इस हादसे में कुल 9 लोगों की मौत हुई है। मरने वालों में पुलिसकर्मी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ, राजस्व अधिकारी और एक स्थानीय नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा 27 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायल लोगों को श्रीनगर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

घटना के पीछे क्या कारण माने जा रहे हैं

1. मानवीय चूक की संभावना

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार विस्फोटक पदार्थ बेहद संवेदनशील थे। ऐसे में जांच करते समय सुरक्षा प्रोटोकॉल का थोड़ी सी भी अवहेलना बड़ा खतरा पैदा कर सकती थी। कई विशेषज्ञों का कहना है कि विस्फोटक को पुलिस स्टेशन जैसे स्थान पर रखना ही जोखिम भरा कदम था।

2. स्टोरेज और हैंडलिंग में लापरवाही

विस्फोटक के नमूने लिए जा रहे थे और इसी दौरान किसी तकनीकी कमी, गलत हैंडलिंग या तापमान-संवेदनशील प्रतिक्रिया ने धमाके को जन्म दिया हो सकता है। यह भी जांच का हिस्सा है कि क्या जांच के दौरान उचित उपकरण और सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी या नहीं।

3. आतंकी कोण की संभावना से इंकार

जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी ने साफ तौर पर कहा है कि इस घटना में कोई आतंकी एंगल नहीं मिला है। सुरक्षा एजेंसियों ने सभी प्रारंभिक तथ्यों की जांच कर इसे एक दुर्घटना करार दिया है।

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हादसे को गंभीरता से लेते हुए मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये और घायलों को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही उच्च स्तरीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सुरक्षा व्यवस्था में कहां कमी थी और भविष्य में ऐसी त्रुटियों से कैसे बचा जा सकता है।

सुरक्षा प्रोटोकॉल पर उठ रहे सवाल

इस घटना के बाद सुरक्षा विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि जब इतने संवेदनशील विस्फोटक बरामद किए गए थे, तो उन्हें स्थानीय पुलिस स्टेशन के बजाय किसी उच्च-सुरक्षा वाले स्थान पर क्यों नहीं भेजा गया।
इसी के साथ यह बात भी सामने आ रही है कि संवेदनशील सामग्री की जांच फील्ड लेवल पर नहीं, बल्कि अत्याधुनिक सुरक्षा लैब में की जानी चाहिए थी।

आगे की जांच और संभावित कदम

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या सुरक्षा मानकों में कोई ऐसी कमी थी जो इस हादसे की वजह बनी। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या जांच के दौरान मौजूद टीम का अनुभव और उपकरण पर्याप्त थे या नहीं।
सरकार की मंशा है कि इस घटना के बाद पूरे राज्य में विस्फोटक हैंडलिंग और स्टोरेज के प्रोटोकॉल की फिर से समीक्षा की जाए।

नौगाम पुलिस स्टेशन धमाका सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी खामी का संकेत है। यह घटना बताती है कि संवेदनशील विस्फोटकों के साथ थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा हो सकती है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर हैं, जो यह स्पष्ट करेगी कि इस हादसे की असली वजह क्या थी और भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए क्या बदलाव किए जाएंगे।

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