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हरिद्वार में महिला ने अस्पताल के फ्लोर पर दिया बच्चे को जन्म

हरिद्वार में महिला ने अस्पताल के फ्लोर पर दिया बच्चे को जन्म, नर्स बोली – “मज़ा आया, और बच्चे पैदा करोगी?”

Hindi News, October 4, 2025October 4, 2025

हरिद्वार (उत्तराखंड):
उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से एक चौंकाने वाली और शर्मनाक घटना सामने आई है। जहाँ एक बार फिर प्रशासन और इंसानियत शर्मसार हुई है। यहां एक गर्भवती महिला को भर्ती करने से मना कर दिया गया, जिसके बाद उसने सरकारी महिला अस्पताल के फ़र्श पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

महिला को क्यों नहीं मिला बेड?

जानकारी के मुताबिक, महिला को रात करीब 9:30 बजे परिजन हरिद्वार महिला अस्पताल लेकर पहुँचे थे। लेकिन आरोप है कि अस्पताल स्टाफ़ ने उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया। परिजन काफी देर तक अस्पताल स्टाफ़ से गुहार लगाते रहे, लेकिन महिला को समय पर बेड नहीं मिला।

इसी बीच महिला की स्थिति बिगड़ती चली गई और रात करीब 1:30 बजे उसने अस्पताल के फ़र्श पर ही बच्चे को जन्म दे दिया।

नर्स का अमानवीय तंज़

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दौरान एक नर्स ने महिला से तंज कसते हुए कहा – “मज़ा आया? और बच्चे पैदा करोगी?” यह बयान आसपास मौजूद लोगों ने सुना और वीडियो में भी इसका ज़िक्र हुआ है। इस टिप्पणी ने परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा और बढ़ा दिया।

घटना का वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में महिला को फ़र्श पर दर्द से कराहते हुए देखा जा सकता है, जबकि आसपास अस्पताल स्टाफ़ नदारद था। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।

स्वास्थ्य अधिकारियों की प्रतिक्रिया

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO आर.के. सिंह) ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि:

  • उन्होंने अस्पताल से प्रारंभिक रिपोर्ट मांगी है।
  • वीडियो की सत्यता (authenticity) की जांच कराई जाएगी।
  • अगर स्टाफ़ दोषी पाया गया तो सख़्त कार्रवाई होगी।

स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए:

  • रात की ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर डॉ. सोनाली को बर्खास्त कर दिया।
  • दो नर्सों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था

हरिद्वार की यह घटना बताती है कि स्वास्थ्य विभाग की ज़मीनी हकीकत अभी भी बेहद लचर है। सरकारें बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा करती हैं, लेकिन जब महिलाएँ प्रसव जैसी गंभीर स्थिति में फ़र्श पर बच्चे को जन्म देने पर मजबूर हो जाएँ, तो यह न केवल लापरवाही बल्कि अमानवीयता की भी मिसाल बन जाती है।

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